हाथ लोहे के
पांव लोहे के
छाती लोहे की
लोहे का आदमी है वो
पर दिल तो दिल की तरह
जैसा मेरा ,उसका और आपका है जनाब ....
लोहा तप जाता है
पिघलता है भीतर बाहर
इस्पात बनता जाता है जनाब.....
हाथ थके तो सहला देना
पांव थके तो कुछ देर थम जाने देना
पर दिल मत थकने देना ज़नाब ....
मजदूर का दिल थक गया तो
वो अगर रुक गया तो
तुम्हारे दिल तक लहू कैसे पहुंचेगा जनाब ?
क्योकि तुम्हारे जिस्म में
लोहा तो है ही नही
जिससे कि रक्त कण बन सके .....
!!! मधु सक्सेना !!!

बहुत खूब
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