Monday, September 30, 2019

गांधी जी मेरी नज़र में




    *गांधी मेरी निगाह में*
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महात्मा गांधी जी का विचार आते ही मन श्रद्धा से भर जाता है।
केवल गांधीजी ही हैं, जो राम,कृष्ण, बुद्ध के पश्चात समस्त मानवीय गुणों से परिपूर्ण थे।
आजादी के दिनों में कई नेता ऐसे भी थे जिनके विचार गांधीजी से नहीं मिलते थे परंतु इसके बावजूद भी वे गांधीजी का सम्मान करते थे।
उनकी आत्मिक शक्ति के बल पर ही गांधीजी विश्व पटल पर छाए रहे। वे एक उच्च सिद्धांत वादी नेता और सत्य के अनुयायी थे। मेरी निगाह में वह ऐसे नेता थे जिन्होंने जन-जन के मन को छुआ था।
                🙏🏻
*श्रीमती प्रमिला सक्सेना*
*ब्यावरा, जिला : राजगढ़ (म.प्र)*

गांधी मेरी नज़र में



गांधीजी की १५० वी जयंति पर सभी को शुभकामनाएँ । मेरी नज़र में गांधी वो अजूबा शख़्सियत है जो कल्पना से परे और अविश्वसनीय होते हुए भी मौजूद है। कैसे कोई सीधा- सादा सा इंसान जिसके पास हथियार के नाम पर बस सत्याग्रह और अहिंसा थे, वह मज़बूत  अंग्रेज़ी सरकार और उसके सिस्टम से टकरा जाता है। न बंदूक़ , न तलवार, न अस्त्र, न शस्त्र पर फिर भी जिसका लोहा अंग्रेज़ मान चुके थे। उनकी हर एक गतिविधि से वे थरथरा जाते थे। २०० सालों तक भारत पर अपना क़ब्ज़ा जमाए रखने वाले निरंकुश, अन्यायी और आततायी ब्रिटिश साम्राज्य का तख्ता हमारे गांधी ने हिला कर रख दिया था।
हिंसा से त्रस्त इस दुनिया में आज हर कोई गांधी की ओर निहार रहा है। वे न केवल भारत के लिए वरन पूरे विश्व के लिए अपरिहार्य बन गए हैं। मेरी नज़र में उनके द्वारा किए गए सत्य- सत्याग्रह - अहिंसा के प्रयोग आज भी उतने ही महत्वपूर्ण और विचारणीय हैं। अगर हमने उनके सिद्धांतों को नहीं अपनाया तो विश्व निश्चित रूप से मौत की कगार पर खड़ा होगा और भावी पीढ़ी को शायद ही विश्वास हो पाएगा कि काया से दुर्बल दिखने वाला पर विचारों में सख़्त और अहिंसा एवम् सत्याग्रह की सहायता से देश को आज़ादी की ओर ले जाने वाला हाड़- माँस से बना ऐसा कोई इंसान भी इस धरती पर पैदा हुआ था।
इसलिए चाहे चार सौ साल बीत जाए पर गांधी अपनी ख़ूबियों के कारण हमेशा अजर- अमर रहेंगे। ख़ुद पर विश्वास, अपनी क्षमता को पहचानना, अपनी ज़िम्मेदारी को निभाना, विरोध को सहन करना, सत्य- अहिंसा का दामन न छोड़ना और ये यक़ीन ख़ुद पर हो कि एक अकेला भी क्रांति ला सकता है- ये ख़ूबियाँ हमें भी अपनाना चाहिए तभी गांधी का नज़रिया साकार हो पाएगा।
उषा गुप्ता
इंदौर

मेरी नज़र में गांधी



गांधी जी एक सच्चे इंसान थे मूलतः । अंदर - बाहर एक से । बिना किसी दुराव - छिपाव के । जो सोचते थे - बोलते थे उसे करते भी थे । मन - वचन - कर्म से पवित्र - समान ।
गाँधी वाद को यदि हम धैर्य व ध्यान पूर्वक पढ़ें तो अपना जीवन संवार सकते हैं आज भी जबकि वे 150 वर्ष पहले जन्मे थे । फिर भी जो शास्वत सत्य है वह तो रहेगा ही । तभी तो वे कहते थे कि - सत्य ही ईश्वर है ।
नियम - संयम - अनुशासन का ही तो पर्याय था उनका जीवन । जिसकी प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं होगी ।
सदा जीवन , उच्च विचार की प्रतिमूर्ति थे वे ।
हम अपना जीवन सादा कर लें , विचार उच्च हो ही जाएंगे । आज हमने अपना जीवन ही जटिल बना रखा है तो विचार भी उलझे - उलझे - भ्रमित करने वाले हैं जो असमंजस - कन्फ्यूजन पैदा करते हैं ।
इंसान का इंसान बने रहना ही बड़ी बात होती है जो कि मोहनदास करमचंद गांधी , हमारे राष्ट्रपिता , बापू  थे।
*चेतनाभाटी
67 , मधुबन कॉलोनी
इंदौर - 45200

गांधी मेरी नज़र में


*महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं*
150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम ए��          "ॐ"
*महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं*
150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम एक नव भारत का निर्माण अति आसानी से कर सकते हैं। आज के परिपेक्ष्य में युवाओं को गांधी जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार कर सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। गांधी जी के ग्रंथों को पढ़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। आज के माता- पिता अपने बच्चों को थोड़ा तो गांधीवादी जरुर बनाएं।
और एक सबल राष्ट्र बनाने में अपना योगदान अवश्य दे।

       वंदना पुणतांबेकर
               इंदौर

मेरी नज़र में गांधी

गांधी जी मेरी नज़र में-,,
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महात्मा गांधी सिर्फ एक व्यक्ति या इंसान नहीं‌ थे।
  वे तो सत्य अहिंसा सहयोग त्याग और कर्मठता का संगम थे‌।
नहीं थे : यह कहना उचित नहीं होगा क्योंकि वो आज भी हमारे बीच शाश्र्वत हैं अपनी सीख के रूप में, अपने बिचार के रूप में। उनके बिचार आज भी उतने ही सार्थक है जितने उस समय हुआ करते थे।
गांधी जी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे अपितु जीवन जीने की कला में पारंगत,और मुश्किलों को हल करने में निपुण, होने के साथ-साथ वो जीवन का पूरा क पूरा गृंथ एक दर्शन थे।
गांधी जी ने हर समस्या को बहुत ही शांति और धैर्य से सुलझाया था, जो उनके तपस्वी होने को दर्शाता है।
गांधी जी सिर्फ सीख देते नहीं थे बल्कि उसे पहले अपने अंदर आत्मसात करते थे। उनकी इस कला ने उन्हें एक महान व्यक्तित्व का धनी बनाया था। उन्होंने गुस्से- नाराजगी, जुर्म और अन्याय का जवाब हमेशा शांति और सहिष्णुता से दिया। यही कारण था कि अंग्रेज भी उनका आदर करते थे। और यही बात उन्हें बाकियों से भिन्न करती है।
यदि हम आज के नकारात्मक और तनावपूर्ण जीवन में उनके आदर्शों और सीख को अमल करें तो हमारा जीवन  निश्चित रूप से तनाव रहित सकारात्मक
और सुखी होगा। और हम गांधी जी के सपनों का भारत बना सकेंगे।
 राष्ट्र पिता तुम युं ही नहीं कहाते हो।
जीवन की सच्ची सीख हमें दे जाते हो।।
 आजादी तुम हमें दिलाते हो।
गांधी तुम याद बहुत ही आते हो ।।
                *  स्मृति श्रीवास्तव

स्मृति फार्मा कालेज में कार्यशाला सम्पन्न


शिक्षा जगत एवं उद्धयोग के परस्पर सहयोग से न्यूनतम मूल्य पर नवीनतम औषधी के निर्माण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया I
स्मृति कॉलेज ऑफ़  फार्मास्यूटिकल एजुकेशन , इंदौर मे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)  एवं प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (NSTMIS) द्वारा SPAICS (स्टेकहोल्डर कार्यशाला ) का आयोजन २८ सितम्बर २०१९ को किया गया I
-डा नीलेश मालवीय-
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इस कार्यशाला में अतिथीगड़ डॉक्टर सरनजीत सिंह (प्रोफेसर एवं हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एनालिसिस ,पंजाब ),डॉक्टर  डी. के. जैन (डायरेक्टर, कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी , आई. पी. एश.अकेडमी, इंदौर ), डॉक्टर संजय  कुमार जैन (प्रोफेसर एंड हेड ऑफ़ डिपार्मेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, डॉक्टर एच .ऐश. गौर विश्वविद्यालय सागर) डॉक्टर पी. के. दुबे (प्रिंसिपल ,स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी ,इंदौर) डॉ. एस. बी. रिजवानी (मैनेजिंग डायरेक्टर,प्रोमेड लैबोरेट्रीज, प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर),श्रीमान सुधीर वोरा (मैनेजिंग डायरेक्टर,ज़ेस्ट फार्मसूटिकट ,इंदौर) डॉक्टर अमित जैन (प्रिंसिपल बी.र. नाहटा कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, मंदसौर),श्रीमान संजय ज्ञानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अल्केमी केमिकल्स, उज्जैन) ने इस कार्यशाला में अपनी  शिरकत किया Iअतिथिगनो का सम्मान कॉलेज के  प्रिंसिपल डॉ. नीलेश मालवीय द्वारा किया गया I और इन्होने इस कार्यशाला को करवाने के उद्देश्य को विस्तार पूर्वक बताया और ये आश्वासन दिया की आगे भी कॉलेज इसी तरह अपने निरंतर प्रयासों द्वारा फार्मा से जुड़े शिक्षकगणों एवं फार्मा उद्योग के मध्य सहजीवी भूमिका निभाता रहेगा I इस कार्यशाला में पधारे अतिथि डॉ सरनजीत सिंह (प्रोफेसर एवं हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एनालिसिस ,पंजाब ) ने उद्भोदित किया की  शिक्षकगणों एवं फार्मा उद्योग अपने परस्पर समन्वय से उच्चकोटि के उत्पाद शामिल हों I वार्ता को आगे बढ़ाते हुए डॉ संजय कुमार जैन (प्रोफेसर एंड हेड ऑफ़ डिपार्मेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, डॉक्टर एच . एस.  गौर विश्वविद्यालय सागर)ने बताया जिसमे फार्मा क्षेत्र से शिक्षगण एवं फार्मा उधयोगपतियो ने आपस में अपने विचार विमर्श किया जिसमे उन्होने यह बताया  की फार्मा शिक्षा प्रणाली कुछ इस तरह हो जिसमे छात्रों का सर्वांगिक व्यावहारिक कौशल विकसित  हो एवं छात्र अपना अधिकतम ज्ञान नए-नए उत्पादों को विकसित  करने में उपयोग लाय जिससे फार्मा उद्योग को नवीनतम ऊचाइयों पर ले जा सके I डॉ संजय ज्ञानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अल्केमी केमिकल्स,, उज्जैन) ने बताया की हम छात्रों को इस प्रकार शिक्षित करे की जब वे उद्योग में जाये तो जल्द ही अपने आप को उसके अनुरूप ढाल ले और अपने नए विचारो से उच्चतम कोटि की उत्पाद उत्पन्न कर सके  I इस कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रदेश जैसे गुजरात, महाराष्ट्र ,विहार ,तमिलनाडु , कर्नाटक , मध्यप्रदेश आदि से ४०० से ज्यादा प्रख्यात अकडमीशन प्रतिभागी कार्यशाला में शामिल हुए I यह कार्यशाला चार चरणों में संपन्न की जाएगी I प्रथम चरण में आमंत्रित वार्ता के द्वारा चर्चा किये गये उद्देश्य निश्चित रूप से एकेडेमिया उद्धयोग सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रासंगिक दिशा प्रदान करेगा I
द्वितीय चरण में विशेषण वार्ता हुई, जिसमे विशेषज्ञों ने एकेडेमिक इंडस्ट्री सहयोग पर उभरती प्रवृतियों पर चर्चा की और यह भी उद्बोधित किया की कैसे एकेडेमिआ उद्योग सहयोग को मजबूती प्रदान करे की जिससे दोनों के आपसी फायदे हो सके , और साथ ही आर एन्ड डी (R&D) तथा परामर्श को उद्योग तथा शैक्षणिक संसथान के बीच प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाये I विशेषज्ञों ने देश में अब तक हुई उद्योग एकेडेमिआ की सफलतम कहानियो का वर्णन किया गया जिसमें आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए शैक्षिक पुरुस्कार संरचना को उन्नयन करने पर विचार किया गया I तृतीय चरण में समिति चर्चा की गयी, जिसमे कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा विचार विमर्श किया गया I  किस प्रकार  शिक्षा एवं उद्योग एक दूसरे  की सहायता से अपने उद्देश्यों को नवीनतम विचारो और नवोन्मेष में रूपांतरित करे? सभी सहभागी स्वयं को उद्योग से जोड़ने के लिए आतुर रहते है अतः हमे यह जानना होगा की उद्योगों की क्या आशाए है I जिससे की शिक्षा जगत की ऍफ़ एन्ड डी इकाई फार्मा उद्योग की आर एन्ड डी इकाई से जुड सके I साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया की यह कार्यशाला नवीनतम नवाणु के अविष्कार में प्रभावी होगी I एवं चतुर्थ चरण में वैज्ञानिक सूत्र होगा जिसमे प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़ कर नयी अविष्कार से सम्बंधित अपने शोधो को पोस्टर के माध्यम से व्यक्त किया I इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को फैकल्टी फेलिसिटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया I एवं युवा अनुसन्धान पुरुस्कार फार्मास्युटिक्स, फार्मासूटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोग्नॉसी एवं फार्माकोलॉजी के क्षेत्र में प्रथम एवं द्वितीय पुरुस्कार दिए जाएंगे I और कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगाI कार्यशाला के अंत में डॉ नीलेश मालवीय द्वारा आभार प्रकट किया गया जिसमे उन्होंने आए हुऐ सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद् देते हुऐ यह आश्वासन दिया की आगे भी SCOPE इसी तरह अकेडीमिआ इंडस्ट्री सहयोग के निरंतर अवसर प्रदान करता रहेगा जिससे उभरते हुऐ अविष्कारों को एक नयी दिशा मिलेगी और फार्मा उद्योग का नित नविन विकास होता रहेगा I इसी के साथ एक दिवसीय स्टेकहोल्डर कार्यशाला का उचित उद्देश्यों के साथ सफलता पूर्वक समापन हुआ I कॉलेज के प्रबंधन श्री राहुल  

Monday, September 9, 2019

स्मृति कालेज आफ फार्मासूटिकल में मेकलाइड का ओपन केम्पस

स्मृति कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल इंदौर में 2 दिवसीय मेकलाइड के ओपन केम्पस का आयोजन किया गया।

स्मृति कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल इंदौर में 9 सितंबर और 10 सितंबर तक मेकलाइड के ऑपन केम्पस का आयोजन किया गया l  जिसमे बी.फार्म , एम फार्म , आई . टी. आई . , डिप्लोमा इन फार्मेसी. , पॉलीटेक्निक, बी . एस. सी., एवं एम.एस. सी. के लगभग 1246  छात्र -छात्राओं ने भाग लिया!
इसमे मेकलाइड के अधिकारी कंर्नर रिटायर्ड आर. के. चंदा  H.R इंदौर प्लांट हेड, श्री मान तुषार पगार ( डिप्टी मैनेजर  प्रॉडक्शन हेड,  श्री मान पुरन जैन चौधरी मैनेजर क्यू. ए., श्री मान दिवेश मिस्त्री , सीनियर ऑफिसर  H.R , श्री मान अभिलाष स्वैन ऑफिसर H.R , श्री मान करन शर्मा , ऑफिसर H.R आये। इनका सम्मान कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ . नीलेश मालवीय दवारा किया गया I स्मृति कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल इंदौर एवं विहार नहाटा कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर तथा TPO इंचार्ज डॉ ताहिर निज़ामी एवं डॉ विशाल सोनी विशेष रूप से उपस्थित थेमेकलाइड   की चयन प्रकिया विभिन्न चरणों में पूरी की गयी । और अंत में चयनित प्रतिभागीयो के नाम घोषित किये गये।

Sunday, September 8, 2019

विमुन प्रेस क्लब द्वारा सकरात्मक पहल



विमून प्रेस क्लब द्वारा सकारात्मक दिशा में पहल
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विमून प्रेस क्लब द्वारा पुनः समाज को जागरूकता  की मिसाल को जलाने का प्रयास किया गया जिसका क्षेर शीतल रॉय ,रचना जोहरी , श्र्द्धा  चौबे ,आरती शर्मा तथा विमून प्रेस क्लब की महिलाओं को  प्राप्त होता हैं ।विश्वास छोटा सा शब्द जरूर हैं पर जिसमे सारी सृष्टि का सार समाया है। विश्वास ही पत्थर को भगवान बना देता है इस सार गर्भित  मुद्दे पर विचारविमर्श हुआ। अतिथियों ने अपने अपने विचार रखे वही श्रोताओं ने भी अपनी दलीले प्रस्तुत की।

*विश्वसनीयता के संकट का समाधान सही के साथ खड़ा होना है- *
एसएसपी मिश्र

* हमें समाज में कोई अच्छा कर रहा है तो उसके साथ खड़ा होना चाहिए, हमारे मजाक उड़ाने से विश्वास का संकट खड़ा हो जाता है।*
* इंदौर एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र
 वुमंस प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित का राष्ट्रीय परिसंवाद जो शनिवार,07 सितंबर को शाम 05 बजे सोलारिस रिसोर्ट,राजीव गांधी चौराहे पर आयोजित किया गया
जिसमें बतौर अतिथि व वक्ता इंदौर एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र, भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार रिज़वान अहमद सिद्दीकी, रवींद्र जैन, राजेश सिरोठिया, वुमंस क्रिकेट एमपी की को-चेयरपर्सन सिद्धयानी पाटनी और डॉ. गिनी छाबरिया शामिल हुए।
दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों का स्वागत किया गया इसके उपरांत संस्था की अध्यक्ष शीतल रॉय ने स्वागत उदबोधन दिया। इसके बाद राष्ट्रीय परिसंवाद का विषय 'समाज में विश्वसनीयता का संकट' रहा जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ और अतिथि वक्ता पब्लिक, पॉलिटिक्स, प्रेस और पुलिस में बढ़ रही दूरियां और घट रही विश्वसनीयता पर अपने विचार रखें।
आभार रचना जोहरी ,सुनयना जी ने किया ,विमून प्रेस क्लब की जानकारी  शीतल।राय ने ढ़ी ।

Wednesday, September 4, 2019

शिक्षक दिवस पर विशेष
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समूह सदस्यों के विचार
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ज़िन्दगी के हर मोड़ पर कुछ न कुछ सीखा मैंने उन मिलने वालों से जो कहीं न कहीं मुझे जीवन मे एक शिक्षक एक गुरु के रूप में मिले।शिक्षक शब्द का विश्लेषण करें तो ये भी हो सकता है ,,,शि,,,से जिसने शिक्षा दी , यह अमूल्य जीवन एक बार रत्न की तरह मिला है,कभी भी इसकी आभा कम न होने देना।सदैव अपने कर्तव्यों  के लिए सजग रहकर,अनेको के जीवन पथ में उजाला भरना
क्ष,,,क्ष से सिखाया क्षय करना अपने अंदर की बुराइयों क्रोध, मान, माया,लोभ को जिस से एक बेहतर हीरा बन सको जिसकी आभा चहुं और फैल सके पीढ़ी दर पीढ़ी इंसानियत पूर्ण समाज में
क,, से सिखाया कभी न मानना हार , पुरुषार्थ के बल पर सत्य पर विजय पाना,,,
मैं बहुत भाग्यशाली मानती हूं अपने आपको की,जन्म से लेकर आज तक मुझे ऐसे शिक्षक मिले माता,पिता,दादा,दादी,चाचा,चाची,भाई, बहन,पति ,सास,ससुर,जेठ,जेठानी,बचपन जवानी के संगी साथी,जिनके साथ के कारण ही मैं आज अपने आपको गौरान्वित महसूस करती हूं।क्यों,,,क्योंकि किसी न किसी डगर पर उन्होंने  मेरा हाथ थाम,आचार विचार दिए और मेरे व्यक्तित्व में सहायक बने।हाँ मैं उन सबको नमन करती हूं एक शिक्षक के रूपमें
इससे बढ़कर मैं उन गुरुओं को तो कभी भी नही भूल सकती ,,उनको मेरा शत शत सादर प्रणाम जिन्होंने मुझे गुर दिए लौकिक शिक्षा के,कंटीली राह को सफल और सरल कैसे बनाये,कितनी जी जान लगाएं और सफल हो जाएं।विपरीत परिस्तिथियों को हिम्मत से कैसे गुजार कर ,कंटीली राहों में फूल खिलाएं,,! सचमुच में ऐसे गुर बताने वाले गुरु न मिले होते तो,,,ऐसे गुरुओं को सादर प्रणाम,,,,ज़िंदगी तो चलने का नाम है अभी तो बहुत कुछ बाकी है,,,नित नए पड़ाव पर मुझे ऐसे ही गुर सिखाने वाले गुरु मिले जिससे बाकी ज़िन्दगी खुशहाल रहे।सादर नमन🙏🏻

प्रभा जैन
*प्रभा जैन
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      जिंदगी का प्रथम पाठ हर इंसान जब बालक होता है,तब वह अपनी जन्मदाता माँ से सिखता है।माँ ही उसकी प्रथम गुरू होती है।वो ही उसे अच्छे बुरे का ज्ञान कराती है ।जब वह भौतिक दुनिया मे विद्द्यालयरूपी गुरुकुल मे जाता है तो गुरू या शिक्षक ही उसका पथप्रदर्शक,प्रेरणास्त्रोत,छुपी हुई प्रतिभा का परिचय करवानेवाला गुरू ही होता है।गुरू पुस्तकीय ज्ञान,व्यवाहरिक ज्ञान की ज्योति जगाकर अपने शिष्यों में नैतिक मूल्यों का समावेश करता है।शिक्षक ही भावी भविष्य का  निर्माण करता है।शिष्य गुरु की छत्रछाया में अपनी सर्वांगीण प्रतिभा को निखार कर  परिवार,समाज एवं देश की उन्नति में सहभागी बनते हैं।शिक्षक का हमारे सर्वागीण विकास में महत्वपूर्ण स्थान है।सभी को अपने गुरू का सम्मान करना चाहिये।उनके द्वारा दी ग्ई शिक्षा को जीवन में क्रियांन्वितकर  हम सच्चे मन से शिक्षक दिवस सार्थक कर पायेंगे।
हर पल,हर क्षण हम कुछ न कुछ सिखते ही चले जा रहे हैं यह एक सतत प्रकिया है।सभी को अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए।
शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी गुरूजनों को शत शत नमन है।
*वंदना अर्गल
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शिक्षक दिवस
शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी गुरूओं को नमन | विद्यार्थी का यह करतव्य बनता है कि वह राष्ट्रहित का ध्यान रखे राष्ट सुरक्षित होगा तो उसके निवासी भी सुरक्षित होंगे |इसे शिक्षा के साथ साथ ऐसी विद्या भी ग्रहण करना चाहिए जिससे राष्टीय भावना का भी विकास हो |समाज में शिक्षक की भूमिका अति महत्वपूर्ण है |एेसे में नैतिक मूल्यों के उत्थान में शिक्षक की भूमिका बहुत कारगर और
प्रभावी मानी जाती है |अपनी सभ्यता को अपनाने तथा संस्कृति से प्यार करने की शिक्षा भी तो शिक्षक ही देते हैं |
 -*आराधना विसावाडिया
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साधना श्रीवास्तव
अध्यापक की महिमा

अ से अध्यापक है  होता

सृजनाकार - सा स्वर - व्यंजन   सिखाता

ध्या  से ध्यान -  साधना करवाता

धर्म - नैतिकता का पाठ पढ़ाता। 

प से पूर्णता का प्रतीक बन के 

सही दिशा ज्ञान है सिखाता

क से  कर्ता , कर्म , क्रिया , कारक बनके

व्याकरण ज्ञान सिखलाता।

शब्द , व्याकरण के मेल से बनता  वाक्य

सिखा के  बौद्धिक ज्ञान संसार

करे  भविष्य को साकार

अध्यापक की महिमा अपरम्पार

करती  " मंजु " गुरु को कोटी नमस्कार।

मंजू गुप्ता
*डॉ मंजु गुप्ता
वाशी  , नवी मुंबई
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शिक्षक दिवस ।

सर्व प्रथम मे ये मानती हूँ
कि हमारे प्रथम गुरू प्रथम पाठशाला माता पिता है उन्होंने जन्म देकर हमारा लालन पालन कर इस योग्य बनाया ।
परन्तु गुरु का स्थान हमारे
जीवन मे महत्वपूर्ण है।
गुरु ने हमे सही मार्ग पर चलना सिखाया ,जीवन जीने का सलीखा सिखा सत्य मार्ग पर चलनेV के लिए प्रेरित किया ,अतः गूरू हमारे प्रेरक है ।
गुरु शिष्य की परम्परा को कायम रखने के लिए हम
पाँच सितम्बर हम उनका स्मरण कर उनका सम्मान करते है क्योंकि आज हम जो कुछ है उनकी बदोलत है ,गुरु ही शिष्य
के अंदर एक अच्छे चरित्र
का निर्माण करता है अतः
गुरु शिष्य का गहरा संबंध
है ।
शिक्षक दिवस की सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं ।

   *मनोरमा जोशी ।
मनोरमा जोशी
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शिक्षक वह है जो सीखने- सिखाने की प्रक्रिया को सहजता और विशेषज्ञता के साथ करता है। वैसे भी भारतीय संस्कृति के अनुसार गुरू माने पूजनीय या संपूर्ण होता है। शिक्षक हमें शिखर तक ले जाता है। हमारी हर कमजोरी को दूर करने के साथ हमें क्षमा करने की भावना भी रखता है। सच्चा शिक्षक बच्चों को परिवार जैसा वातावरण एवम् स्नेह देता है। वह हमारी योग्यता को पहचान कर हमारे भविष्य की दिशा भी निर्धारित करता है। इसीलिए शिक्षक को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है।
सभी शिक्षकों को शत शत नमन

उषा गुप्ता
*उषा गुप्ता
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शिक्षक दिवस मेरी नज़र में "गुरू गोविन्द दोनों खड़े ,काके लागूं पाय , बलिहारी गुरु ,आपकी ज़िन्दगी गोविन्द दियो बताया "गुरु शब्द में दो अक्षर हैं १गु जिसका अर्थ होता है अन्धकार और२होता है तु जिसका अर्थ होता है प्रकाश अर्थात जो अन्धकार से हमें प्रकाश की ओर ले जाये वो गुरु (शिक्षक )होता है शिक्षक उस दीपक की तरह होता है जो स्वयं जलकर दूसरों का मार्ग रोशन करता है ,वह शिक्षक अपनी मेहनत और लगन से बच्चों का मार्ग प्रशस्त करते हैं , फिर वही बच्चें अपनी योग्यता अनुसार  अधिकारी बनते हैं ,गुरु की महिमा तो गोविन्द से भी बड़ी बतायी गयी है ,और गुरु को साक्षात परब्रह्म की उपमा भी दी गई है उनके लिये जितना भी लिखूं कम है ,उनके (शिक्षक )या गुरु के सम्मान में इतना ही कहती हु कि "गुरुर ब्रम्हा , गुरुर विष्णु , गुरुर देवा महेश्वरा ,गुरुर साक्षात पर ब्रम्ह , तस्मै श्री गुरुवे नम :
🙏🏻*"साधना श्रीवास्तव
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माँ के कोमल हाथो का स्पर्श और स्नेह भरी नजर जीवन मे आते ही।माँ के स्पर्श से पहचाने की कला हर बालक में निहित हैं।वह संवेदनशीलता ओर स्पर्श से माँ के प्यार को अनुभव करता है।और सीखता हैं तब नाही वो बोल पाता है।और नाही वह समझ पाता है।माँ का प्रेमस्पर्श ही उसे अवगत कराता है।कि वह उसकी माँ है।प्रथम पाठ वह अपनी माँ की गोद मे ही सीखता है।और  समय अनुसार उसके गुरु पिता, परिवार के सभी सदस्य होते है। और प्रथम कदम पाठशाला होती हैं।वही उसके सुनहरे भविष्य का पहला कदम होता हैं।समय के साथ उसे हर कदम पर गुरुजनों का ज्ञान और आशीष प्राप्त होता हैं।और वह सीखता है। पुस्तकी विद्या ,ज्ञान देने वाले शिक्षक ओर गुरु तो होते ही है।अपितु हर कदम पर जो हमारा मार्गदर्शन करें वही भी हमारे श्रेष्ठ गुरु होते हैं।
*शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को सादर नमन*
      * वन्दना पुणतांबेकर
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शिक्षक दिवस पर मेरे भाव यह है कि हमारे प्रथम गुरू को सर्वप्रथम याद करें,  जिन्होंने हमारा हाथ पकड़ कर हमें पहला अक्षर (क)  लिखना सिखाया अगर वह तब (क) लिखना नहीं सिखाते तो हम अपने स्वयं का महत्व भी कभी न जान पाते ओर अपनी नवीन पीढ़ी को बताएँ कि शिक्षा का महत्व शिक्षकों के कारण  ही सम्भव है, शिक्षक ही वह जादूगर है जो अपने ज्ञान के जादू से लाखों के जीवन में रोशनी भर सकते है।

अदिति रघुवंनशी
*अदिति सिंह भदौरिया।
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शिक्षक दिवस का संबन्ध है शिक्षकों से।मेरे विचार में शिक्षक वह है जो जौहरी के समान पारखी नजरों से शिष्य में छुपी प्रतिभाओं को पहचान उन्हें निखारता है।शिक्षक वह कुम्हार है जो गीली मिट्टी से मासूम नौनिहालों को प्रखर व्यक्तित्वों में ढालता है।वह एक पथप्रदर्शक है सूर्य के माफिक जो राह दिखा सितारों को चमकाता है। वह अपने लग्न व धैर्य से विद्यार्थियों को कलाम,गांधी,,
विवेकानन्द जैसी विभूतियाँ बनाता है।ऐसे शिक्षकों का एक दिन नहीं वरन प्रतिदिन
सम्मान किया जाना चाहिए।
*सरला मेहता
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शिक्षक दिवस -
शिक्षक समाज के वास्तुकार हैं जिसके बिना समाज की प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती,नेतृत्व के रूप में माता पिता के तुरंत बाद में जो खड़ा होता है वो शिक्षक ही है,प्रतिभा और क्षमताओं के सांचे में ढालने वाला, हमारी जिंदगी में अनिवार्य  हिस्सा शिक्षक ही हैं, भविष्य निर्माण में सभी शिक्षकों की महत्व पूर्ण भूमिका की आभारी हूं।
पूनम शर्मा
*पूनम शर्मा
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जन्म लेते ही मनुष्य सर्वप्रथम अपनी प्रथम शिक्षिका यानी माँ से शिक्षा लेना शुरू कर देता है।उसके पिता और परिवार के सभी सदस्य उसे शिक्षकों की भांति जीवन की सच्चाइयों से अवगत कराते हैं और सुसंस्कृत बनाते हैं।बड़ा होने पर वह पुस्तकों के द्वारा अपने स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन में ज्ञान प्राप्त करता है।कहने का तात्पर्य यह है कि हमे जिनसे भी कोई सीख मिलती है वही हमारे शिक्षक होते है।उनमें मित्र भी सम्मिलित होते हैं जो कदम कदम पर साथ देते हैं।शिक्षक दिवस के अवसर पर उन सभी शिक्षकों को कोटिशः प्रणाम

अचला गुप्ता
*अचला गुप्ता
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"शिक्षक दिवस मेरी नजर फ़में"
शिक्षक दिवस ,हमें हमारे गुरु
 जिन्होंने हमारे जीवन को एक मूर्त्त रूप दिया और जिनके सरल व तीखे वचन जो हमारा मार्गदर्शन करते रहे ,आज हम कला में लेखन में जो कर पा रहे है वो हमारे गुरु का आशीर्वाद है जो सदा हम पर बना रहता है,उनकी सीख हमेशा हमारे साथ रहती है।हम आज अपने जीवन में कोई भी सफलता पाते है वह हमें हमारी गुरु की भक्ति से ही मिलती है।जिनका अदृश्य हाथ हमारे सिर पर हमेशा रहता है।
कल्पना
*कल्पना
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शिक्षक दिवस मेरी सोच
शिक्षक दिवस को हम हम उन गुरु का सम्मान करते जो हमें कच्चे घडे से लेकर उसे मजबूत बनाने में जूटे रहते है । गुरु चाहगे की उसका शिष्य उससे भी आगे  बढ कर खुब नाम कमाये उनका आशिर्वाद रहता है हमारे साथ इसलिए हम काम को आसानी से कर सकते है

*चारुमित्रा नागर
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