Monday, October 21, 2019

बचपन की यादे

🧡🧡🧡🧡माँ की वो रसोई🧡🧡🧡🧡 मेरी माँ की वो रसोई.. जिसको हम किचन नहीं चौका कहते थे माँ बनाती थी खाना और हम उसके आस पास रहते थे माँ ने उस 4x4 के कोने को बड़े सलिखे से सजाया था कुछ पत्थर और कुछ तख्ते जुगाड़ कर एक मॉडुलर किचेन बनाया था माँ की उस रसोई में खाने के साथ प्यार भी पकता था कोई नहीं जाता था दर से खाली वो चूल्हा सबका पेट भरता था
 माँ कभी भी बिन नहाये रसोई में ना जाती थी कितनी भी सर्दी हो गहरी माँ सबसे पहले उठ जाती थी जो भी पकता था रसोई में माँ भगवान् का भोग लगाती थी फिर कही जाकर हमारी बारी आती थी उस सादे खाने में प्रसाद सा स्वाद होता था पकता था जो भी बहुत ज्यादा, उसमें प्यार होता था पहली रोटी गाय की दूसरी कुत्ते के नाम की बनती थी कंही कोई औचक आ गया द्वारे ये सोच कुछ रोटियाँ बेनाम भी पकतीं थीं रसोई के उन चद डिब्बोँ और थैलों में ना जाने कितनी जगह होती थी भरे रहते थे सारे डिब्बे चाहे कोई भी मंदी होती थी कुछ डिब्बे चौके के महमानों के आने पर ही खुलते थे और हम सारे के सारे रोज उन डिब्बों के इर्द गिर्द ही मिलते थे हर त्यौहार करता था इन्तेजार 
हर बात कुछ ख़ास होती थी कभी मठ्ठी कभी गुंजिया कभी घेबर की मिठास होती थी माँ सबको गर्म गर्म खिलाकर खुद सारा काम कर आखिर में अक्सर खाती थी सबको परोसती थी ताज़ा खाना वो उसके हिस्से अक्सर बासी रोटी ही आती थी बहुत कुछ बदला माँ के उस चौके में चूल्हा स्टोव और फिर गैस आ गयी ढिबरी लालटेन हट गयीं सारी और फिर रोशन करने वाली टूब लाइट आ गयी #नहीं बदला तो माँ के हाथों का वो
अनमोल स्वाद जो अब भी उतना ही बेहिसाब होता है कोई नहीं दूर तक मुकाबले में उस स्वाद के वो संसार में सबसे अनोखा और लाजवाब होता है अब भी अक्सर माँ का वो पुराना चौका बहुत याद आता है
अजीब सा सुकूं भरा एहसास होता है मुँह और आँख दोनों में पानी आ जाता है!! मेरी माँ की वो रसोई.. जिसको हम किचन नहीं चौका कहते थे माँ बनाती थी खाना और हम उसके आस पास रहते थे.
उषा  गुप्ता


रोशनी

लक्ष्मी महारानी " पिताजी , मेरे दोस्तों के घर दिवाली पर चाइनीज बल्बों की लड़ियाँ और प्लास्टिक की कंदीलों से जगमगा रहे हैं ।
हमारा घर कब जगमाएगा ? " " हाँ , बेटे उमेश ! विदेशी चीज चाइनीज लड़ियों के बदले हम आज ही घर को स्वदेशी इको फ्रेंडली मिट्टी के दीपक और कंदील से रोशन करेंगे , क्योंकि मिट्टी के दीये कुम्हार की कमाई और जीवनयापन का साधन है ।उसे हम रोजगार देंगे ।
पर्यावरण संरक्षण करेंगे और हमारी सरकार ने देश को प्लास्टिक से मुक्त करना ।" " ठीक है पिताजी । यह कदम हमें खुद ही उठाना । जब हम बदलेंगे तभी समाज बदलेगा ।" " चलो हम परंपारिक रंग - बिरंगी पतंगी कागजों , बांस की खपंचियो से कंदील बनाते हैं ।
 यह हुनर मैंने तुम्हारे दादा जी से सीखा था और अब तुम .. । " बातों ही बातों में कितनी बड़ी सुंदर कंदील बना दी ।" " चलो , इसे हम बॉलकोनी में टाँग के दीपक जलाएँ ।
" अरे वाह पिताजी ! ,घोर काली अमा की रात दीपक , कंदीलों की रोशनी से महारानी लग रही है । ऐसा लग रहा है आसमान के तारे जमीन पर उतर आए हो । " " हाँ बेटे , दीपक अँधेरे को दूर भगाता है । इसलिए कहीं भी अँधेरा नहीं रहना चाहिए । लक्ष्मी भी उसी घर आती है ।
जहाँ स्वच्छता , प्रेम , मैत्री का उजास होता है । तुम्हारी बहन , दादी और माँ ने तो सारे दीपक जलाके सारा घर रोशन कर दिया ।
" डॉ . मंजु गुप्ता वाशी , नवी मुंबई ।

Sunday, October 20, 2019

कराओके क्लब द्वारा गीत -संगीत का आयोजन संपन्न

कराओके क्लब   द्वारा स्वर लहरी
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कल रिमझिम  बरसती बारिश के साथ केरयो  संगीत  क्लब  के सभी साथियों  ने अपने अन्तर्मन के गायक  को मंच पर लाकर क्ष्रोताओ को देर रात तक बाधे  रखा ।

सर्वप्रथम  ब्रजेश-रश्मि  श्रीवास्तव  ने कार्यक्रम  का श्रीगणेश कर  गायकी  के चेह्तो को मंच देने का सुखद अवसर दिया
इस अवसर पर  प्रथम जी सुजाता जी रीटा  जी,अर्चना जी,प्रभाजी,डा  राजेन्द्र जी,डा  अमित जी,सुयेश जी,डा पूनम,लावण्या जी,दिव्या जी,संजय जी ,डा प्रदीप जी,संजय जी ,ब्रजेश जी प्राणम जीआर्यन ,उपेन्दर जीआदी सभी गायको  ने मधुर धुनो को छेड़ वातावरण  को संगीतमय  आनन्द मे तरंगित होने के लिय मजबूर  कर  दिया।
सबसे बड़ी खूबी कार्यक्रम  की यह थी की हर गायक  मंच पर  अपनी प्रस्तुति  देते समय गायन में  आत्मसात  हो जाता था जहा स्वर उतार चढ़व,गले की मीठास गौण  हो जाती हैं  और खुदबखुद  पब्लिक  थिरकने  लगती हैं ।
आशा की जाती है  कि  यही प्रयास  रहा तो गायकी के  क्षेत्र  के कराओके क्लब हुनरस  को  कामयाबी दिलाने मे मील  का पत्थर साबित होगा।
" मुनिया का जवाब नहीं " परिवार की सबसे छोटी लाड़ली बेटी नीरजा का जन्मदिन आनेवाला है,,,घर में जोर शोर से तैयारियों का दौर चल रहा है।
आवश्यक सामान की सूची बनाने बैठी माँ अनुभा एक एक वस्तु का नाम गिना रही है ताकि कुछ छूट ना जाए, " मोमबत्तियां गुब्बारे डिस्पोजेबल प्लेट्स,,," नीरजा बीच में ही टोक देती है, " ना बाबा ना,हम ऐसे गिलास व प्लेट्स नहीं लाएंगे,हमारी मेंम कहती हैं ,ये पर्यावरण को नुक्सान पंहुचाते हैं।
"अनुभा हाथ जोड़ते हुए समझाती है," अच्छा बेबी,हमारे स्टील वाले ,,अब तो ठीक।" नीरजा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "और हां पानी भी बर्बाद नहीं करेंगे,पीने को आधा ग्लास ही भरेंगे।
वो नीना मेरी फ्रेंड अपना आरो वाला पानी साथ लाती है।मम्मा हमारा तो फिल्टर ही ठीक है।
मेम कहती है आरो से पानी बर्बाद होता है। चलो पार्टी भी छत पर ही करेंगे,मेरी कई फ्रेंड्स को ए सी की आदत है।
भैया ए सी तो खराब गैस छोड़ता है,पापा कह रहे था ना ।
" इसी बीच दादी ने खांसते हुए याद दिलाया," और मुनिया रानी,रिटर्न गिफ्ट में क्या दोगी? " पोती झट से बोल पड़ी,"आपके वो नन्हें नन्हें पौधे किस दिन काम आएँगे? पता भी है आपको पेड़ों का महत्व। जितने ज्यादा पेड़ उतनी ही बारिश ,ऐसा ही हमारी बुक में लिखा है ।
यह कहते हुए मुनिया चहक उठी," फिर तो नाना के गांव वाली नदी लबालब भर जाएगी।छुट्टियों में खूब छपाके मारेंगे,मामा से तैरना भी सीख जाएगें।" दादी ने शाबाशी दी," अरे वाह, मेरी मुनिया रानी का तो कोई जवाब नहीं।"
सरला मेहता मौलिक

दीपलक्ष्मी

आज का विषय लघुकथा शीर्षक
 *दीपलक्षमी* 
 शगुन पर शगुन आ रहे थे। मिठाई के अम्बार लग गये। 
क़जरदोजी जरी रेशम की साड़ी में समधन समाहित हो गई। रिश्तेदारी में डंका बजा,बहू बहुत बड़े घर से आई है। बहू के पिता की बहुत आन बान शान है।
 हमारा बेटा कुछ ऐसा ही है जो पसंद करता है,वह नगीना ही होता है।
-- प्रशंसा के खूब कशीदे कढ़े गये।
 आओ बहू आज पहला दीप तुम धरो,तुम घर की लक्षमी हो। इस घर की कुलवधु लक्षमी हो। पूजन करने के लिए बैठने का रिवाज है,बहू कहां यह सब करती। हाथ में सुनहरी बटुआ झुलाते हुए बोली__ अम्माजी यह सब आपका काम है,आज तो दीपावली की रात है हमारे दोस्त प्रतिक्षा कर रहे हैं,आज तो सारी रात हम बाहर रहेंगे। 'दीपक की लौ सदा धीरे धीरे जलती रहती है। 
बिजली अक्सर गुल हो जाया करती है'। अम्मा को पता चल गया था कि ______ 'चमक दमक की लक्षमी से लक्षमी प्रसन्न नहीं होगी'। 'मां लक्षमी को दीपक की मंद लौ ही भाती है"।और अम्मा ने सारे दीप प्रज्जवलित कर दिये।
 प्रस्तुति__ 🙏माया बदेका १९--१०--२०१०

Saturday, October 19, 2019

बीता बचपन

*" बीता बचपन आ गया पचपन "*
बगीचे में बैठे ठंडी हवाओं का झोंका लेते हुए,
गुनगुनी धूप में बचपन का पिटारा निकाला था।
सुहानी यादों को संजोये तस्वीरों को सांझा करते हुए,
फिर से निहारते नई पीढ़ी में समेटे उकेर लिया था।
खट्टी मीठी बातों के संग गुदगुदाती यादें ताजा करते हुए,
भाई बहनों संग दिन महीनों सालों तक सम्हालते हुए गुजारा था।
शिकवे शिकायतों का दौर गुनगुनाते हुए,
बीते हुए लम्हों में रंगीन पड़ावों का सफर सुहाना था।
सुनहरी यादों के सहारे हसीन लम्हों को लिए हुए,
ना जाने क्यों बचपन के खेल खिलौनें घरौंदे अच्छे लगते थे।
अब परिपक्व हो दोस्ती यारी सुहाने पलों का तराना लिए हुए,
बीता बचपन आ गया पचपन पाँव जरा सा लड़खड़ाया था।
यादें ताजा सुहानी लड़कपन की फरियाद करते हुए,
काश.! फिर से लौट आये बचपन जैसे अभी पचपन में बच्चों का जमाना था।
तू - तू ,मैं -मैं हो जाती कुछ पलों में अलग होते हुए,
फिर मम्मी पापा ने आकर प्रेम से समझाया करते थे।
होली ,दीवाली, रक्षाबन्धन पर भाई बहनों के संग लिए हुए,
भले ही गिनती में एक या दो नही पाँच भाई बहनों का संग निराला था।
कमी किसी चीजों की नहीं भरपूर आनंद सहयोग लिए हुए,
आदर्श परिवार पूरा परिवार भंडार गृह का खजाना था।
बचपन की वो सुहानी यादें ताजा आधी उम्र लिए हुए,
काश...! अब फिर से लौट आये बचपन जैसे पचपन से बचपन की ओर चले थे ..
   *शशिकला व्यास*
अचला  गुप्ता
करवाचौथ लाल रंग में सजी सुहागन ,
तन पर जेवर खूब सजे।
आभा चेहरे की दमके और मन मे प्रीत मृदंग बजे।
निर्जल व्रत कर सात जन्म का साथ मांगती माता से।
छलनी से हर जन्म उन्हें ही देखूं ,कहे विधाता से। बहुरानी पर प्यार उमड़ता , सासूमाँ मुस्काती है।
पुत्रवधु की छवि देख वह वारी वारी जाती है।
पूजा की थाली ,सजाती गीत मधुर सब गातीं है। यही संस्कृति हर रिश्ते की महत्ता हमे बताती है।
 सदा सुहागिन रहे तू नारी सिंदूर सजा हो माथे पर । चौथ माता से यही प्रार्थना करते हैं सब झुका के सर।
 अचला गुप्ता इन्दौर
सुधा चोहान 
करवा चौथ प्रीत का पुनि प्यार का पुनि नेह का आधार हो *। प्यार हो बस प्यार हो बस तुम ही मेरा प्यार हो । करवा चौथ पर तुम नेह की मूरत लगे। राह तकती चाॅद का खुद चाॅद सी सूरत लगे अन्न जल का त्याग कर मैं तुझमें बस खो गयी। भूलकर सारा जहाँ बस तेरी ही हो गई । सच कहूँ तो खुद से ज्यादा तुम मेरी दरकार हो । प्यार हो बस प्यार हो बस तुम ही मेरा प्यार हो । हो सुखी मेरे ही सुख से और दुख से हो दुखी । चाॅद से ज्यादा सलोने तुम मेरे सरताज हो तुम ही साॅसे तुम ही धडकन तुम ही मेरे प्राण हो । तुम प्रणय सात्विक हो मेरे तुम मेरा निर्वाण हो । तुम समर्पण त्याग का तुम सत्य सा संसार हो । प्यार हो बस प्यार हो "राज"तुम ही मेरा प्यार हो ।
 डॉ सुधा चौहान "राज"
शशिकला व्यास
"राधिका सी प्रतिबिंब लगत चाँद" 🌙🌕🌙🌕🌙🌕🌙🌕ये चाँद जरा ठहर जा तेरा मुखड़ा निहार लेती हूँ शरद पूनम की चाँदनी में स्वप्न लोक की दुनिया बना लेती हूँ। चंचल मन सा प्रतिबिंब बनाकर कुछ पल यूँ ही गुजार लेती हूँ। प्रकृति में सुगंधित फूलों से मकरंद चुरा लेती हूं। चन्द्र किरण से उजली शीतलता लिए मृगतृष्णा में खो जाती हूँ। ममता की तरुण लपेटे चाँदनी में बहती नदियों सा बह जाती हूँ।
अमृत कलश के समान बूंदो की धारा में निर्मल हो जाती हूँ। मोती सी चमक ज्योति प्रकाश लिए मल्लिका बन जाती हूँ। दर्पण में प्रतिबिंब बन चाँदनी सी निखर जाती हूँ। प्रकृति का यह रूप मनोहारी प्रभु मूरत में बस जाती हूँ। प्यारी सी राधिका कृष्ण की मूरत संग छबि में ही खो जाती हूँ। *शशिकला व्यास* 🌙🌕🌙🌕🌙🌕🌙🌕
कुसुम सोगनी 
हमें न चांद की परवाह थी
 ना चाँदनी की बात की - अमृत जो छलका होगा चखने की सौगात थी 
ऐ चाँद तुम इतराओ न तुमसे ज़्यादा ख़ूबसूरत मिलन की कायनात सी एक न बीते सी घड़ी थी
 लूट लेने का सबब था -मरने जीने की किसको पड़ी थी होश था बैखौफ सा वो आयी न फिर ऐसी रात थी अब याद करके होगा क्या चाँद तुमको दी मात थी..
*कुसुम सोगानी*
मंगला  श्रीवास्तव 
☀ 👩👸👩👸👩 ☀ " सुहागन दे करवा , ,...... सुहागन ले करवा.........." सुबह सवेरे उठ के....... करवा माता धयाये....... नहा धो कर वसत्र पहन ले..... जो पिया को भाये....... सुहागन ले करवा..... सुहागन दे करवा...... चूड़ी बिंदी लिपस्टिक लगा कर... हो जाऔ तैयार..... करवाचौथ मनाऔ......... और पाऔ पति का प्यार........ सुहागन दे करवा......... सुहागन ले करवा........ सोने का तेरा दीवला...... चाँदी की तेरी बाती..... सौभाग्य तू पाये......... प्यार बढ़े दिन राती........ सुहागन दे करवा....... सुहागन ले करवा....... व्रत रख के कहानी सुनके... चाँद को देवे अरक....... करवा माता कृपा करे..... करदे घर को स्वरग............ सुहागन दे करवा....... सुहागन ले करवा.......,, ☀ 👩👸👩👸👩 ☀ इस गीत को हर सुहागन से शेयर करें और सौ गुना फ़ल पायें .... धन्यवाद....
मंगला  श्रीवास्तव 
चाँद पर नहीं करता है कोई विवाद न हिन्दू कहे है यह मेरा चाँदवाद नहीं लड़े अब कोई भी मुसलमान है देख इसे ईद पूजे कहीं चौथ चाँद। ऐसे ही दिलों में समा लेते राम नहीं होता बाबरी बखान का नाम न होती जिरही संवादी तारीखें अयोध्या है भगवान राम का धाम ।
डॉ मंजु गुप्ता
चारुमित्रा नागर 
प्यार भरा करवाचौथ मेरा b p बहुत कम हो जाता हैं । करवाचौथ पर तो पानी भी नही पीना हाथ पैर जैसे हडताल कर रहे थे । चक्कर आने लगे मे खाना बना रही थी , बाटी ओवन मे डाल कर मे लेट गई भुख प्यास के कारण नींद लग गई भुल गई कि बाटी ओवन मे रखी है । पति जी ने जूस बनाया मुझे जगाया मे घबरा कर उठ बैठी अरे बाटी रखी थी इन्होंने मुझे मजबूर करके जूस पिलाया किचन मे जाकर देखा बाटी सब डिब्बे मे रख दी किचन साफ मेने पूछा आपने ये सब किया मुझे उठा देते इनका जवाब था ।की तुम मेरी उम्र के लिए भुखी प्यासी रह सकती हो तो मे इतना तो कर सकता हूँ मेरे लिए करवा चौथ का सबसे अच्छा तोफा था ये
चारूमित्रा नागर

राधिका सी प्रतिबिंब लगता चांद

शशिकला  व्यास 
"राधिका सी प्रतिबिंब लगत चाँद"
🌙🌕🌙🌕🌙🌕🌙🌕ये चाँद जरा ठहर जा तेरा मुखड़ा निहार लेती हूँ शरद पूनम की चाँदनी में स्वप्न लोक की दुनिया बना लेती हूँ। चंचल मन सा प्रतिबिंब बनाकर कुछ पल यूँ ही गुजार लेती हूँ। प्रकृति में सुगंधित फूलों से मकरंद चुरा लेती हूं। चन्द्र किरण से उजली शीतलता लिए मृगतृष्णा में खो जाती हूँ। ममता की तरुण लपेटे चाँदनी में बहती नदियों सा बह जाती हूँ। अमृत कलश के समान बूंदो की धारा में निर्मल हो जाती हूँ। मोती सी चमक ज्योति प्रकाश लिए मल्लिका बन जाती हूँ। दर्पण में प्रतिबिंब बन चाँदनी सी निखर जाती हूँ। प्रकृति का यह रूप मनोहारी प्रभु मूरत में बस जाती हूँ। प्यारी सी राधिका कृष्ण की मूरत संग छबि में ही खो जाती हूँ।
*शशिकला व्यास* 🌙🌕🌙🌕🌙🌕🌙🌕
आदिती भदोरिया
नीले नीले आकाश से , सपनों की इक बूँद गिरी । सपनों की इस बूँद ने, दिल को यूँ आनन्दित किया। आनन्द के अहसास को , मैंने 'अमित'है नाम दिया। नाम नहीं जीवन का सत्य है यह, जो कुछ है, बस यही है यह। आओ,ओर अनुभव करो, धड़कन की थिरकती आवाज़ो को। जिसके अभिभूत घन- घन से, मैंने जीवन के सरगम का गान किया। पुलकित हुई इस छुअन से मैं, और आँखों का है, साथ लिया। नीर बरसती आँखों से, मैंने इस आनन्द को जीया। बस जाओ मेरी इन आँखों में, मैंने तो बस तुम्हें है जीया। हाँ तुम थे, तुम हो ओर तुम रहोगे सदा, इस विश्वास को कुमकुम से सीया। माथे पर बनी लकीरों को, लाल रंग से यूँ है सिया। तेरे विश्वास को कंगन सा पहने, मैंने 'अमित'है है नाम दिया।
 स्वरचित, अदिति सिंह भदौरिया।
करवा चौथ का चाँद "चन्दा की शादी है,चांदी की रातें हैं तुमसे कुछ कहने को अधरों पर बातें हैं।" आज कई अधर आतुर हैं, अपने चाँद से कुछ कहने के लिए। आज कई चौदहवीं के चाँद निर्जल व्रत कर सुदूर चाँद से मांगती हैं कि उनके जीवन का चाँद बीती शरद पूर्णिमा के पूर्ण चंद्र के मानिंद ताउम्र प्रेम की अमृतवर्षा सतत करता रहे। यूँ तो समस्त चांदों की चाँदनियों अपने अपने चादों की करीब हैं। परंतु उनका क्या जिनके चाँद सरहद पर तैनात हो दूज का चाँद बने हुए हैं। हे आसमानी चाँद , वहां जाना और पंहुचाना संदेश उन समस्त प्रियतमाओं का जो तस्वीर देख या मोबाइल पर चैट कर जल ग्रहण करेगीं। हे , करवा माता,,,गौरा माता, रक्षा करना उन सभी जांबाजों की ,,,कि अगली करवा चौथ वे अपने चांदों के साथ मना सके।
सरला मेहता
करवाचौथ लाल रंग में सजी सुहागन , तन पर जेवर खूब सजे। आभा चेहरे की दमके और मन मे प्रीत मृदंग बजे। निर्जल व्रत कर सात जन्म का साथ मांगती माता से। छलनी से हर जन्म उन्हें ही देखूं ,कहे विधाता से। बहुरानी पर प्यार उमड़ता , सासूमाँ मुस्काती है। पुत्रवधु की छवि देख वह वारी वारी जाती है। पूजा की थाली ,सजाती गीत मधुर सब गातीं है। यही संस्कृति हर रिश्ते की महत्ता हमे बताती है। सदा सुहागिन रहे तू नारी सिंदूर सजा हो माथे पर । चौथ माता से यही प्रार्थना करते हैं सब झुका के सर।
 अचला गुप्ता इन्दौर

Friday, October 18, 2019

नीले नीले आकाश से , सपनों की इक बूँद गिरी । सपनों की इस बूँद ने, दिल को यूँ आनन्दित किया। आनन्द के अहसास को , मैंने 'अमित'है नाम दिया। नाम नहीं जीवन का सत्य है यह, जो कुछ है, बस यही है यह। आओ,ओर अनुभव करो, धड़कन की थिरकती आवाज़ो को। जिसके अभिभूत घन- घन से, मैंने जीवन के सरगम का गान किया। पुलकित हुई इस छुअन से मैं, और आँखों का है, साथ लिया। नीर बरसती आँखों से, मैंने इस आनन्द को जीया। बस जाओ मेरी इन आँखों में, मैंने तो बस तुम्हें है जीया। हाँ तुम थे, तुम हो ओर तुम रहोगे सदा, इस विश्वास को कुमकुम से सीया। माथे पर बनी लकीरों को, लाल रंग से यूँ है सिया। तेरे विश्वास को कंगन सा पहने, मैंने 'अमित'है है नाम दिया। स्वरचित, अदिति सिंह भदौरिया। [18/10, 11:46] Sushma Viyas: कान्हा-राधिका की करवाचौथ---- राधिका तुम कौन भाग लेकर आई कान्हा ने कर कमलों से प्रेम अमृत पिवाई तुम बड़भाग ज्यों श्यामरस अधर लगाई सांवरे के मन मंदिर में तुम ही तुम हो समाई ज्यों ही तो ब्रह्माण्ड़ में चहूं ओर राधे श्याम राधे श्याम की गूंज दे सुनाई 
 सुष'राजनिधि'

सजना और करवा चौथ


करवा चौथ, चाँद सा सजना मेरा ,जिसकी आभा से मैं चांदनी चमकी शीतल शीतल प्यार की किरणें प्रस्फुटित होती ,जिसके दिख जाने से मेरा रोम रोम खिल जाता,, पिया तुम जग में रहो सदा ,इस चंदा की तरह चमकते और मेरी मांग का सिंदूर रहे सदा दमकते। आज के करवा चौथ पर शुभ भावना मैं भाती हम तुम दोनों जन्मों जन्म मिलते रहे हर दम चाहे चंदा बादलों में छिप जाए,चाहे दिख जाए तुम तो हर दम रहो मेरे आँचल में छिप छिप के।
* प्रभा जैनकरवा चौथ, चाँद सा सजना मेरा ,जिसकी आभा से मैं चांदनी चमकी शीतल शीतल प्यार की किरणें प्रस्फुटित होती ,जिसके दिख जाने से मेरा रोम रोम खिल जाता,, पिया तुम जग में रहो सदा ,इस चंदा की तरह चमकते और मेरी मांग का सिंदूर रहे सदा दमकते। आज के करवा चौथ पर शुभ भावना मैं भाती हम तुम दोनों जन्मों जन्म मिलते रहे हर दम चाहे चंदाकरवा चौथ, चाँद सा सजना मेरा ,जिसकी आभा से मैं चांदनी चमकी शीतल शीतल प्यार की किरणें प्रस्फुटित होती ,जिसके दिख जाने से मेरा रोम रोम खिल जाता,, पिया तुम जग में रहो सदा ,इस चंदा की तरह चमकते और मेरी मांग का सिंदूर रहे सदा दमकते। आज के करवा चौथ पर शुभ भावना मैं भाती हम तुम दोनों जन्मों जन्म मिलते रहे हर दम चाहे चंदा बादलों में छिप जाए,चाहे दिख जाए तुम तो हर दम रहो मेरे आँचल में छिप छिप के। प्रभा जैन बादलों में छिप जाए,चाहे दिख जाए तुम तो हर दम रहो मेरे आँचल में छिप छिप के।
*प्रभा जैन

Sunday, October 13, 2019

शब्द और राग समूह🙏🌹🌹🙏 दिनांक 12/10/19 वार शनिवार चित्र आधारित रचना🙏🌹🌹🙏 वो प्रथम स्पर्श था माँ का जब हाथों में मुझको लिया होगा। प्यार से मुझको जब उन्होंने छुआ होगा। सहलाया होगा मेरे गालों को जब माँ ने हाथों से हौले से झुलाया भी होगा माँ ने। आँचल में अपने छुपा कर रखा होगा मुझे सीने से लगाकर दूध पिलाया होगा मुझे। पैरों पर लिटाकर मुझको अपने नर्म हाथों से की होगी मालिश जो मेरी थपकियां देकर फिर सुलाया होगा मुझे। ओ प्यारी माँ तेरे उस निश्छल प्यार का कोई मोल नही जो में चुका पाऊँगी कभी। आज मैं भी बनी हूँ माँ तब जाना कितना कष्ट होता है माँ बनने में। माँ बनना कोई आंसन बात नही कितनी बार मैने जाने अनजाने में दिल दुखया है तेरा । पर अब वापस तो आओ माँ फिर कभी तुम्हारा दिल नही दुखाउंगी। करुँगी मैं सेवा तुम्हारी अपने हाथों से तुम्हारें प्यार का थोड़ा सा तो कर्ज चुकाउंगी। मैं भी करुँगी मालिश तुम्हारी जैसे बचपन में तुमने की थी मेरी में भी तुमको अपने हाथों से सहलाउंगी। कितना थक जाती होगी तुम हमको सम्हालतें सम्हालतें । एक बार फिर आ जाओ माँ अब में तुमको समहलूंगी।🙏🌹🌹🙏 मंगला श्रीवास्तव इंदौर स्वरचित मौलिक रचना। 🙏🙏🌹🌹🙏🙏

Wednesday, October 2, 2019

Writer Club 
गांधी का परिणाम गांधीजी आते थे बच्चों से प्यार करते थे दुनिया को आजादी देने में कामयाब थे गांधी जी का आज एक सपना पूरा हो गया है स्वच्छता अभियान को भारत में लाने का भारत में गांधीजी कहते थे बुरा मत सुनो बुरा मत सुनो बुरा मत सुनो का अर्थ होता है कि अगर आपको कहे कोई आपको कहे तुम बुरा बनो तो उससे बिल्कुल मत सुनो इसी का अर्थ होता है बुरा मत सुनो अब बुरा मत देखो का अर्थ होता है कि जैसे कमल में जैसे मतलब कमल में नहीं आपने देखा होगा आज कल कितनी बारिश हो रही है बारिश के कारण की चर्बी हो जाता है उसकी जड़ में कमल खिलता है नीचे से ऊपर वह कमल खिलता है तो हमें नीचे से ऊपर होना चाहिए इसका अर्थ होता है बुरा मत देखो तुलसी का अर्थ होता है पूरा मत बोलो

Aryan shrivastava 
"ॐ" *महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं* 150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम ए�� "ॐ" *महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं* 150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम एक नव भारत का निर्माण अति आसानी से कर सकते हैं। आज के परिपेक्ष्य में युवाओं को गांधी जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार कर सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। गांधी जी के ग्रंथों को पढ़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। आज के माता- पिता अपने बच्चों को थोड़ा तो गांधीवादी जरुर बनाएं। और एक सबल राष्ट्र बनाने में अपना योगदान अवश्य दे।
 वंदना पुणतांबेकर इंदौर
गाँधी जी मेरे लिए हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को केवल भारत मे ही नहीं पूरी दुनिया मे , परिचय की जरुरत नहीं लगभग सभी उनके बारे मे जानते है । व एक एसे इन्सान थे , जिन्होंने बिना हथ्यार उठाये अँग्रेज़ो को हरा कर भारत को आजादी दिलाई थी । महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर काठियावाड़ गुजरात मे हुआ था ।जो भारत के पहले राष्ट्रपिता चुने गए थे , उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को आज भी मनाया जाता हैं । महात्मा गांधी जी के बारे मे बताना चाहूंगी जो आपकी मदद जरूर करें गे और जिससे आप का जीवन सफल बन सकता हैं । उन्होंने सदा अहिंसा और सत्य का पालन किया था । महात्मा गांधी का पुरा जीवन हमारे लिए यादगार है, जिन्दगी तो सबको मिलती हैं ,और एक दिन सब को मरना हैं भी है। लेकिन आपसे कहुगी की अगर हमें जिन्दगी मिलती हैं ।तो उसे एसे जियो जिससे आपके मरने पर आपको सारी दुनिया याद करें ,कुछ ऐसा करके मरो जिससे आपका नाम सब याद करें । आपको ये जिंदगी अपने परिवार के लिए या खुद के लिए मेहनत करने के लिए नहीं मिली हैं ।इसे यू ही बर्बाद मत करो इसमें आपको सब से अलग करना पडेगा ,जिससे दुनिया बापू की तरह याद करें जो आदमी समय बजाता हैं वह उसमे धन बचाता हैं आदमी की पहचान उसके पहननवे और कपडों से नहीं उसके गुण और चरित्र से होती हैं प्रसन्नता ही एक मात्र एऐसी चीज हैं जिसे आप ओरो मे बाटेंगे तो उसका कुछ हिस्सा तो आपके हिस्से मे जरूर आये गा सच एक पेंड हैं । और हमे हमेशा सच बोलना और सच के पथ पर चलना चाहिए बापू यही सिखा गये
 चारूमित्रा नागर
गाँधी जी मेरी नजर में सात्विक पवित्र और आत्मिक शुध्दता के प्रतीक हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को जानना हमारे लिए बहुत ही सरल होते हुए भी उनके आचरण को अपने जीवन में उतारना उतना ही कठिन है। गाँधी जी के सत्याग्रह और आन्दोलन उनके जीवन में किये गये प्रयोग थे। जन जन का भरोसा दिखावे से नही जीता जा सकता। उसके लिए जीवन में सत्य , अहिंसा और सदाचार के आचरण की जरुरत होती है। जिधर चल पडे दो पग उधर चल पडे हजारों डग। ये उस सादगी के साथ खडे जन थे। जिनका विश्वास गाँधी जी के विचारों में शामिल था। अहिंसक महात्मा के विचार ही सबके लिए प्रेरणा थे। ब्रिटिश हुकुमत उनकी सात्विक विचारों की ताकत को कुचल पाने में असफल रही। उनकी आजादी वर्ग जाति सम्प्रदाय धर्म से बहुत बहुत ऊपर थी। व्यक्तिगत लाभ लोभ उनकी राष्ट्रीयता के बोध को कभी अपने जाल में नही फंसा सके। इसी कारण गाँधी जी सर्वमान्य राष्ट्र पिता बने रहेंगे। पद और राजनीतिक लोकप्रिय छवि की तुच्छता उन्हें कभी मोहित नही कर सके।
 डा.विनीता रघुवंशी प्राध्यापक हिन्दी शासकीय महाविद्यालय, टिमरनी (जिला हरदा)
भारत सरकार , राज्य  और गांधीवादी संस्थाएँ  गांधी जी की १५०  वीं जयंती जोर  - शोर से मना रही हैं ।जो देश - विश्व में पूरे साल गांधी से संबंधित  विविध कार्यक्रम आयोजित  कर रही हैं  . राष्ट्रपति महात्मा  गांधी का चरित्र राष्ट्र चरित्र  है .   गांधी एक विचार नहीं है . बल्कि गतिशील संस्था , एक संस्कृति है . एक विश्वास , संकल्प है . मानवता  का विश्वविद्यालय है . नैतिक , मानवीय मूल्यों से इंसान का निर्माण नहीं हुआ तो वह देश कभी भी उन्नति , विकास नहीं कर सकता है . गांधी की राजनीति आध्यात्म से जुड़ी थी . जो पारदर्शी थी . आज की राजनीति ठीक  इसके विपरीत भ्रष्टाचार , झूठ , दागी मंत्रियों से लिप्त है .    गांधी जी के व्यक्तित्व , आदर्शों का प्रभाव भारतीयों के साथ विदेशियों पर  भी पड़ा था  .  गांधी जी के दर्शन , अहिंसावादी नीतियों , प्रवृतियों , शिक्षा , सामूहिकता का गवाह साबरमती का आश्रम है .  जहाँ भारतीय संस्कृति बसी  और गांधी मूल्यों की रूह भी बसी है  . जहाँ स्वाबलंबन के संग चरखा संस्कृति को बढ़ावा दिया . जो खादी तक ही सीमित नहीं था  बल्कि दिनचर्या में आने वाली स्वदेशी वस्तुओं का उत्पाद किया जाता था . उस जमाने में छुआछूत को हेय  से देखा जाता था . गांधी जी ने छुआछूत   मिटाने का काम इसी आश्रम से शुरू किया . गांधी जी  की बहन ने अस्पृश्यता का  विरोध किया तो उसी को वहाँ से निकाल दिया .
डॉ मंजु गुप्ता वाशी 
*"गांधी जी मेरी नजर में"* 150 वी जयंती पर परम पूज्य बापूजी को शत शत नमन ...! ! ! गांधी जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रथम सूत्रधार है जो कठिन परिश्रम व संघर्षों के बाद हम सभी देशवासियों को गुलामी की बंधन से मुक्त करवाकर आजादी दिलवाई है। सत्याग्रह आंदोलन ,दांडी यात्रा, नमक कानून व्यवस्था में भी एकजुट होकर संपूर्ण विश्व जगत को प्रभावित किया है और इसी आत्मबलिदान से सत्य अहिंसा से आज की युवा पीढ़ियों में भी जागरूकता अभियान पैदा हो गई है जिससे देश में ही नहीं वरन पूरे विश्व में भी संदेशों द्वारा प्रचार प्रसार किया जा रहा है । *"गांधीजी का महामन्त्र'* *"करो या मरो"* इस महामन्त्र से नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी *"स्वच्छ भारत अभियान"* के तहत विभिन्न क्षेत्रों में यह अभियान चलाया गया है और अब 29 अगस्त से *"स्वस्थ भारत अभियान"* लागू किया गया है जिसमें सभी देशवासियों से अपील की गई है कि अपने शरीर को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा। *"अहिंसा परमोधर्मः"* इस सिंद्धांत पर चलना बेहद साहसिक कार्य है उनकी तरह से दृढ़ विश्वास ,आत्मविश्वास, अडिग रहने के लिए बहुत प्रयासों की जरूरत है। गांधी जी की प्रतिमा को देखते हुए मन में ही एक अनोखी छबि बन जाती है गांधीजी के शरीर पर सफेद रंग की धोती, आँखों में गोल चश्मा पहने हुए , कमर में घडी लटकी हुई , एक हाथ में लाठी लिए सरपट तेज रफ्तार गति से चलना ,फर्राटेदार बुलंद आवाज ,अन्य और बहुत सी बातों का हर अंदाज निराला था। गांधी जी का *"सादा जीवन उच्च विचार"* रखते हुए जीवन शैली अपनाते हुए सारी दुनिया से बगावत कर उच्च शिखर की बुलंदियों को छू लिया और आजादी का झंडा फहराने में माहिर हुए देशवासियों को गुलामी के बंधन से आजादी देकर देश को ही नहीं वरन पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया था। वर्तमान स्थिति में सतत उन्नति की ओर अग्रसर देश के युवा पीढ़ियों में भी गांधी जी के सपनों को उजागर करने हेतु योगदान देने का सतत प्रयास जारी है। गांधी जी के संदेशों को अमल करते हुए देशवासियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उन सभी स्वत्रंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत शत नमन ....! ! 🙏🙏जय हिन्द जय भारत वन्देमातरम 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 ***शशिकला व्यास*** भोपाल मध्यप्रदेश
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'भारत' यह नाम मन में आते ही याद आते है ज़हन में आते है संघर्ष के वो दिन जो हमारी पीढ़ी ने देखे तो नहीं पर सुने है अपने दादा जी एवं पिता जी से, सुने ही नमन करने को मन करता है उन महान आत्माओं को जिन्होंने भारत माता के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर दिया । कालांतर से ही ऐसे महान लोगों की लम्बी सूची है जो हमें महसूस कराती है कि हमारी मातृभूमि ने कितने महान सपूत दिए है और ऐसे ही एक महान् सपूत हुए 'गांधी जी' हमारे राष्ट्रपिता जिनका पूरा नाम मोहनदास कर्मचंद गांधी है। भारत की आजादी के लिए जहां कई वीरों ने अपने जीवन का बलिदान किया वहीं गांधी जी ने (अहिंसा) एक नया पाठ पढ़ाया। आज मैं सोचती हूँ कि क्या इतना आसान होता है, हिंसा ओर अन्याय के बीच अपमान का घूँट पीकर मुस्कुराना ओर परायों को भी अपना समझना। हर 2 अक्तूबर को हम उनके जीवन को याद करते है पर उसपर चलते नहीं है, हम उनपर दूसरों के द्वारा लिखे गए कटाक्ष पढ़ते है, जो उनकी कुछ नीतियों से नाराज़ है पर उनकी सही नीतियों को अपनाते नहीं है। हम क्यों यह नहीं सोचते कि आज़ादी के हवन में हमारे वीरों ने जो बलिदान दिया वैसा ही कठिन बलिदान 'गांधी 'जी ने झूठ ओर हिंसा को त्याग करके दिया। मेरी नज़र में 'गांधी जी' एक सोच है बदलाव की ओर ले जाते हुए सही रास्ते की, 'गांधी जी ' एक रास्ते की जो ऐसी मंजिल पर ले जाए, जहाँ पहुँच कर एक ऐसे लोकतंत्र का निर्माण हो जो सर्वधर्म, समानता पूर्ण ,साक्षर राष्ट्र हो ।
( गांधी मेरी निगाहों में) भारत' यह नाम मन में आते ही ज़हन में आते है संघर्ष के वो दिन जो हमारी पीढ़ी ने देखे तो नहीं पर सुने है अपने दादा जी एवं पिता जी से, सुनते ही नमन करने को मन करता है उन महान आत्माओं को जिन्होंने भारत माता के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर दिया । कालांतर से ही ऐसे महान लोगों की लम्बी सूची है जो हमें महसूस कराती है कि हमारी मातृभूमि ने कितने महान सपूत दिए है और ऐसे ही एक महान् सपूत हुए 'गांधी जी' हमारे राष्ट्रपिता जिनका पूरा नाम मोहनदास कर्मचंद गांधी है। भारत की आजादी के लिए जहां कई वीरों ने अपने जीवन का बलिदान किया वहीं गांधी जी ने (अहिंसा) एक नया पाठ पढ़ाया। आज मैं सोचती हूँ कि क्या इतना आसान होता है, हिंसा ओर अन्याय के बीच अपमान का घूँट पीकर मुस्कुराना ओर परायों को भी अपना समझना। हर 2 अक्तूबर को हम उनके जीवन को याद करते है पर उसपर चलते नहीं है, हम उनपर दूसरों के द्वारा लिखे गए कटाक्ष पढ़ते है, जो उनकी कुछ नीतियों से नाराज़ है पर उनकी सही नीतियों को अपनाते नहीं है। हम क्यों यह नहीं सोचते कि आज़ादी के हवन में हमारे वीरों ने जो बलिदान दिया वैसा ही कठिन बलिदान 'गांधी 'जी ने झूठ ओर हिंसा को त्याग करके दिया। मेरी नज़र में 'गांधी जी' एक सोच है बदलाव की ओर ले जाते हुए सही रास्ते की, 'गांधी जी ' एक रास्ते की जो ऐसी मंजिल पर ले जाए, जहाँ पहुँच कर एक ऐसे लोकतंत्र का निर्माण हो जो सर्वधर्म, समानता पूर्ण ,साक्षर राष्ट्र हो ।
 स्वरचित, अदिति सिंह भदौरिया।
महात्मा गांधी ________________
खादी पहन कर दी आजादी, स्वदेशी मंत्र लाया , पहले बापू फिर महात्मा ,राष्ट्रपिता कहलाया । अपना सर्वस्व किया समर्पित , देश के लिए , सत्य अहिंसा के बल पर, देश आजाद करवाया । ऊंच-नीच का भेद मिटाकर, सबको गले लगाया , दया प्रेम अपना कर ,मानवता का पाठ पढ़ाया , वर्ण व्यवस्था तोड़ कर, दी धर्म की परिभाषा , आजादी के दीवानों में विश्वास जगाया । असंख्य वीरों ने दी कुर्बानी तब आजादी पाई , मुफ्त में नहीं मिली ,हमने इसकी कीमत चुकाई, हंसकर फांसी पर झूले ,सीने में गोली खाई , तब तीन रंग की विजय पताका गगन में है लहराई । देश में आतंक मिटा समाजवाद लाएं, सत्य राह पर खुद चलें, औरों को चलना सिखलाएं, विश्व बंधुता के आंगन में , शांति का पैगाम दें, हर हाथों को काम देकर, आत्मनिर्भर बनाएं। गांधी जी के सपनों को साकार करें , आओ नव भारत का निर्माण करें,। श्रीमती शोभा रानी तिवारी , 619 अक्षत अपार्टमेंट , खातीवाला टैंक इंदौर मध्य 

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