Tuesday, May 21, 2019

गणेशा


बात उन दिनों की है जब हम सब भाई बहनों की शादी नहीं हुई थी सिर्फ बड़ी दीदी, सपना की शादी हुई थी। और वह लोकल शादी थी तो अक्सर सपना दीदी और उसके ससुराल वालों का हमारे यहाँ आना जाना चलता रहता था। एक बार मेरा भाई, गट्टू जो नागपुर से इंजीनियरिंग कर रहा था और छुट्टियों में घर आया था। एक दिन शाम के समय हम सब घर पर नहीं थे सिर्फ मम्मी और गट्टू घर में थे। तभी अम्मा, दीदी की सास, का फोन आया कि हम लोग आ रहे हैं। दीदी ने मम्मी से पूछा 'आप और चाची सब घर पर है कि नहीं?' मम्मी ने कहा 'हाँ ये सब लोग बाज़ार गये हैं आते ही होंगे और हम तो घर पर ही हैं।आप लोग आइये।
मम्मी को उस दिन वैभव लक्ष्मी की पूजा करना था तो मम्मी ने फोन रखते ही निश्चय किया कि पूजा कर लें क्योंकि फिर रात हो जाएगी। तो मम्मी ने गट्टू से कहा कि 'हम पूजा कर रहे हैं और अगर कोई आए तो देख लेना।' गट्टू ने कहा 'ठीक है।' इसी बीच करीब 1 घंटे बाद दीदी की सास और उसके पूरे परिवार वाले हमारे घर आ गए। गट्टू बाहर गेट में हाथ रखकर खड़ा था। जैसे ही अम्मा और सब कार से उतरने लगे तो गट्टू कुछ घबराता हुआ सा बोला कि 'कोई घर पर नहीं है मम्मी चाची सब लोग बाज़ार गये हैं और देर से आयेंगे।' दीदी को बड़ा अजीब सा लगा कि अभी तो मम्मी से बात हुई थी फिर अचानक मम्मी बाज़ार क्यों चली गयीं। पर गट्टू के अजीब सा व्यवहार देख दीदी बात टालते हुए बोली 'ठीक है हम लोग कहीं और जा रहे हैं लौटकर आते हैं।'
यहाँ जब मम्मी की पूजा खत्म हुई तो मम्मी ने गट्टू से कहा कि 'सपना लोग आ रहे थे अभी तक नहीं आये। पता नहीं क्या हुआ।' गट्टू बोला कि 'वो लोग तो आए थे पर आपने कहा न कि किसी को अंदर मत आने देना तो मैंने बहाना बना दिया। इसीलिये वो लोग कहीं और चले गए।' वह आगे बोला 'मुझे लगा आप कुछ ख़ास पूजा कर रहीं हैं।' मम्मी ने कहा कि 'नहीं ऐसा नहीं था। वो तो हमने इसलिये कहा था कि हम जल्दी से उनके आने के पहले पूजा कर लें। 'मम्मी को हँसी भी आयी और ख़राब भी लगा।
फिर देर रात जब दीदी लोग घर पर आये तो मम्मी ने सबसे बहुत माफ़ी माँगी और पूरी बात बताई। तब अम्मा बोलीं  'अरे नहीं नहीं बहन जी आप ऐसा क्यों सोच रही हैं आज तो हमें गणेश जी के दर्शन हो गए जिन्होंने शंकर जी तक को अंदर नहीं आने दिया था। सब खूब हँसे।
यह बात हम सब भाई बहन अक्सर याद करते हैं। पूरा बचपन और वह पूरा समय याद आ जाता है l बहुत मीठी मीठी यादें और बहुत भोली भाली जिंदगी ...
डॉ स्वाति सिंग

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