मेरी हर चोट पर जिसने मरहम लगाया
ठोकर खा जब भी गिरा उसने गले लगाया
खुद भूखी रहकर हमें खिलाया
वह मेरी मां है हां वही तो मेरी मां है
मां ,आज तू नहीं पर तेरा एहसास है
चारों ओर खोजती तुझे मेरी आस है
मां तेरे जाने से मेरे सारे सुख चले गए
भीड़ होते हुए भी हम अकेले रह गए
मां अब कोई मेरा सुख दुख नहीं पूछता
बेटा खाना खाया अब कोई नहीं पूछता
देर से घर आने पर कोई नहीं टोकता
ममता का वह स्पर्श दे कोई नहीं जगाता
मां मेरे दर्द को तू बिन बताए समझ जाती थी
मुझे क्या चाहिए वह बिन मांगे दे देती थी
तू पाई पाई जोड़ रकम भी मुझ पर लुटा देती
मेरे सुख की खातिर तू हर दुख सह लेती
मां आज भी तू मेरे आसपास है मेरे साथ है
राज इस बात का मुझे एहसास है
कि तू मेरे साथ है
डॉ सुधा चौहान राज इंदौर

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