Monday, September 28, 2020

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार



एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है, कितनी भी पुरानी हो जाए,
फिर भी शब्द नहीं बदलते,
रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए,
लेकिन संकल्प एक ही काफ़ी है,
मंज़िल तक जाने के लिए,
इन्दौर लेखिका संघ ने हिंदी पखवाड़े पर एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया जिसका विषय था कि "लेखिकाओं की  पसंदीदा पुस्तक" के बारे में बताएं। कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम में 35 लेखिकाओं ने भाग लेकर अपने पसंदीदा पुस्तकों के बारे में विचार व्यक्त कर अनमोल रत्न बिखेर कर कार्यक्रम को बहुत ही रोचक बना दिया । सर्वप्रथम विनीता तिवारी ने अमृता प्रीतम द्वारा लिखित पिंजर उपन्यास पर अपने विचार व्यक्त किए और कहा "इसमें भारत और पाकिस्तान दोनों की मोहब्बत है "।स्वाति तिवारी जी ने पसंदीदा उपन्यास मन्नू भंडारी अत्यंत चर्चित उपन्यास "आपका बंटी  "पर अपने विचार  व्यक्त  करते हुये कहा कि है  यह उपन्यास हिंदी उपन्यासों के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाने वाली कृति है।   शोभा रानी के बारे में  प्रेमचंद की गोदान सुनीता श्रीवास्तव ने जयशंकर प्रसाद की कामायनी ,सुषमा व्यास ने  शिवाजी सावंत द्वारा रचित मृत्युंजय अपनी पसंदीदा पुस्तकें बताई। मीना गोदरे ने डॉ जयकुमार जलज की "महावीर का बुनियादी चिंतन " और संध्या राय चौधरी ने  शिवानी की "चौदह फेरे "मंजुला भूतडा ने मैथिली शरण गुप्त की "पंचवटी" ,रिचा बियाणी ने साकेत और ममता तिवारी ने शरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित" ग्रामीण समाज एवं काशीनाथ "पसन्दीदा पुस्तक पर अपने विचार प्रस्तुत किए ।
आशा जाकड़ ने लेखिका संघ की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ पुष्पा रानी गर्ग की पुस्तक रामचरितमानस में प्रबंधन पर विचार और अंजुल कंसल ने हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला पर कविता प्रस्तुत की ।हेमलता शर्मा ने अपने पसंदीदा पुस्तक जीप पर सवार इल्लियां,प्रेरणा जी ने श्रीमद्वभागवत ,कुसुम सोगानी ने "गुनाहों का देवता" माया कॉल ने "चंद्रकांता संतति ',डॉ सुधा चौहान ने रामचरितमानस ,वंदिता श्रीवास्तव ने शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की "दत्ता"और मुन्नी गर्ग ने पसंदीदा कहानी "गूंगा" पर विचार व्यक्त किए ।
मधुलिका सक्सेना ने कविता सुनाई, वंदना पुणे ने प्रेमचंद जी की शिक्षाप्रद कहानियाँ,,  सुरेखा भारती ने दुष्यंत कुमार जी की" साए में धूप" और चेतना जी ने  अ अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ विष्णु प्रभाकर  की "आवारा मसीहा "पढ़कर  शरद जी के संपूर्ण प्रमाणित जीवन चरित्र दर्शाया । ऊषा गौर ,मनीषा व्यास और सरिता काला,ज्योति सिंह आदि ने पसंदीदा पुस्तक पढ़ कर खुशी जाहिर की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वाति तिवारी जी ने की और कार्यक्रम के बीच बीच में बहुत ही अद्भुत चीजें दिखाकर जैसे मिट्टी की किताबें वाटर लाइब्रेरी और पुराने मित्र चित्र इमारतें आदि दिखाकर कार्यक्रम को और भी मनमोहक बना दिया। संचालन डॉक्टर अंजुल कंसल ने किया और  सचिव विनीता तिवारी ने आभार  माना।


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