ओ मां किन शब्दों में तेरा गुणगान करू ,क्यों न तुझ पर में अभिमान करू ,जब उंगली पकड़कर तूने मुझको चलना सिखलाया था ,मेरी ही तुतली भाषा में लोरी गाकर मीठी नींद सुलाया था ,बनकर मेरी प्रथम गुरु जब मुझको राह दिखाई थी ,जीवन की इस दुनिया का जब ज्ञान मुझे बतलाया था ,जीवन के हर मोड़ पर संघर्षों से लड़ना सिखलाया था ,मा आज तेरी सारी बाते मानस पटल पर मेरे घिर घिर आती है ,तेरे लाड दुलार की हर एक बाते मेरे नयनों को भीगा जाती हैं ,अक्सर तारो में मा में तुमको देखा करती हूं हा मेरी प्यारी मा में आज भी तुमको बहुत याद में करती हूं ,मा मेर इन स्वरचित पंक्तियों के श्रद्धा सुमन 🌹🌹🌹🌹 में तुमको अर्पित करती हूं ,हर जनम में तुम मेरी मां बनकर आ जाना तुमसे यही अनुरोध मै करती हूं 🙏🏻 मेरी स्वरचित पंक्तियों के साथ सभी को मातृ दिवस की बहुत बहुत शुभ कामनाएं 💐💐💐💐👍🏻
साधना श्रीवास्तव
साधना श्रीवास्तव

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