एक छोटा सा शब्द है 'माँ' ,
जिसमे ब्रह्मांड समाया है।
ममता के इस सागर में
सिर्फ प्यार ही सबने पाया है।
माँ की लोरी ,माँ की रोटी
में ही दुनिया बसती है।
रसोई में सौंधी खुशबू संग
चूड़ियां माँ की खनकती हैं।
सबसे ज्यादा प्यार वो करती
नौ महीने ज्यादा सबसे।
हर एक सांस में माँ है मेरी,
दुनिया मे आयी जबसे।
अचला गुप्ता
स्वरचित
जिसमे ब्रह्मांड समाया है।
ममता के इस सागर में
सिर्फ प्यार ही सबने पाया है।
माँ की लोरी ,माँ की रोटी
में ही दुनिया बसती है।
रसोई में सौंधी खुशबू संग
चूड़ियां माँ की खनकती हैं।
सबसे ज्यादा प्यार वो करती
नौ महीने ज्यादा सबसे।
हर एक सांस में माँ है मेरी,
दुनिया मे आयी जबसे।
अचला गुप्ता
स्वरचित

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