Sunday, May 12, 2019

सत्यम शिवम सुंदरम सी मेरी माँ


मेरी माँ  सत्यम् में कन्या , शिवम् में माँ  और माँ के रूप में सुंदरम् में विराजमान है . अगर विश्व की कोई अद्वितीय सकती है तो वह मेरी माँ . उसके आगे जग के अन्य रिश्ते  तौले तो माँ का  पलड़ा भारी  रहेगा  . मेरी माँ मेरी प्रारंभिक पाठशाला है जो शिक्षिका बन देश भक्ति , सद्संस्कारों , वेद- पुराण और नैतिक मूल्यों की रामायण - महाभारत   सी शिक्षा  दे मेरे भविष्य का  निर्माण करती है .  आज उन्हीं के योगदान से मैं फिजियोथेरेपिस्ट हूँ .
 माँ के प्यार की बात ही अलग है .  जब मैं मुसीबत में होती हूँ तब माँ शब्द ही निकलता है . बीमारी में नर्स बन वह मेरी  देखभाल - सेवा में रात - दिन एक
कर देती है . जीवन की समस्याओं को सुलझा देती है . मैं अपनी माँ के अतुलनीय योगदान की ऋणी हूँ . मेरे लिए  हर दिन  ' मातृ दिवस '  है . माँ से बड़ी दुनिया की कोई दौलत नहीं है .
मंजु गुप्ता

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