मेरी माँ सत्यम् में कन्या , शिवम् में माँ और माँ के रूप में सुंदरम् में विराजमान है . अगर विश्व की कोई अद्वितीय सकती है तो वह मेरी माँ . उसके आगे जग के अन्य रिश्ते तौले तो माँ का पलड़ा भारी रहेगा . मेरी माँ मेरी प्रारंभिक पाठशाला है जो शिक्षिका बन देश भक्ति , सद्संस्कारों , वेद- पुराण और नैतिक मूल्यों की रामायण - महाभारत सी शिक्षा दे मेरे भविष्य का निर्माण करती है . आज उन्हीं के योगदान से मैं फिजियोथेरेपिस्ट हूँ .
माँ के प्यार की बात ही अलग है . जब मैं मुसीबत में होती हूँ तब माँ शब्द ही निकलता है . बीमारी में नर्स बन वह मेरी देखभाल - सेवा में रात - दिन एक
कर देती है . जीवन की समस्याओं को सुलझा देती है . मैं अपनी माँ के अतुलनीय योगदान की ऋणी हूँ . मेरे लिए हर दिन ' मातृ दिवस ' है . माँ से बड़ी दुनिया की कोई दौलत नहीं है .
मंजु गुप्ता
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