लघुकथा
इन्सानियत
सेवती दिन भर दुसरो का काम करके, अपने बच्चों को पाल रही थीं पति भी थोडाभोत कमा लेता, आलसी जो ठहरा, बडे बेटे की शादी की , बहु अच्छी मिली दिन भर घर का काम करती सेवती लोगों के लहा, झाड़ू पोछा करके अपना घर चलाती। खुशी का दिन आया बहु को बच्चा होने वाला, अब इतनी कमाई तो नहीं की प्राइवेट डॉक्टर को दिखा दे। सरकारी अस्पताल ले जाकर बहु का इलाज चालु कर दिया। नौवा महीना पूरा हुआ, रानु दर्द में भी दिन भर कामरहती रही। पर सेवती समझ गई थी कि रानु को तकलीफ हैं। सुबह 4 बजे जब दर्द ज्यादा होने लगा, तो उसने सास को आवाज लगाई। सेवती तो जैसे रात भर सोई ही नही थी चिंता के कारण नींद कहा आरही थी। सेवती ने तुरन्त जरूरत का सामान रखा अपने बेटे को आटो लेने भेजा।रानु को बिठाया , और करीब 20 मिनट में अस्पताल पहुंच गये सेवती रानु को हाथ पकड कर अन्दर ले गई। रानु दर्द से तडफ रही थीं सेवती नर्स को बुलाने गई, मेडम जी मे मेरी बहु को देख लो उसे बच्चा होने वाला हैं। और दर्द से तडफ रही हैं । नर्स चिल्ला कर बोली। मेरी डूयूटी खत्म हो गई ,और वैसे भी सन्डे हैं। डॉक्टर नही आयेगे। बहु का दर्द उससे देखा नही जारहा था। वो हाथ जोड कर प्रार्थना कर रही थी । पर नर्स बीना सुने चली गई । अस्पताल में झाड़ू पोछा करने वाली बाई सब सुन रही थीं । तुरन्त उसे ओटी मे ले जाकर लिटाया, और रिशेप्शन पर जाकर डॉक्टर को फोन किया, सारी बात बताई डॉक्टर ने कहाँ आज सन्डे है। मे नही आसकती, इस पर वो बोली ,आप का अपना कोई होता तो । उसनें फोन काट दिया और रानु के पास चली गईं उसे सात्वना देने लगी। 10 मिनट बादडॉक्टर आ गई उसनें तुरंत इलाज चालू किया और सेवती की झोली में वो खुशी या डाल दी , जिसका वो नौ महीनों से इन्तजार कर रही थीं रानु भी बेटे को देख कर ,सार दर्द भुल गई
चारूमित्रा नागर
9826667059
इन्सानियत
सेवती दिन भर दुसरो का काम करके, अपने बच्चों को पाल रही थीं पति भी थोडाभोत कमा लेता, आलसी जो ठहरा, बडे बेटे की शादी की , बहु अच्छी मिली दिन भर घर का काम करती सेवती लोगों के लहा, झाड़ू पोछा करके अपना घर चलाती। खुशी का दिन आया बहु को बच्चा होने वाला, अब इतनी कमाई तो नहीं की प्राइवेट डॉक्टर को दिखा दे। सरकारी अस्पताल ले जाकर बहु का इलाज चालु कर दिया। नौवा महीना पूरा हुआ, रानु दर्द में भी दिन भर कामरहती रही। पर सेवती समझ गई थी कि रानु को तकलीफ हैं। सुबह 4 बजे जब दर्द ज्यादा होने लगा, तो उसने सास को आवाज लगाई। सेवती तो जैसे रात भर सोई ही नही थी चिंता के कारण नींद कहा आरही थी। सेवती ने तुरन्त जरूरत का सामान रखा अपने बेटे को आटो लेने भेजा।रानु को बिठाया , और करीब 20 मिनट में अस्पताल पहुंच गये सेवती रानु को हाथ पकड कर अन्दर ले गई। रानु दर्द से तडफ रही थीं सेवती नर्स को बुलाने गई, मेडम जी मे मेरी बहु को देख लो उसे बच्चा होने वाला हैं। और दर्द से तडफ रही हैं । नर्स चिल्ला कर बोली। मेरी डूयूटी खत्म हो गई ,और वैसे भी सन्डे हैं। डॉक्टर नही आयेगे। बहु का दर्द उससे देखा नही जारहा था। वो हाथ जोड कर प्रार्थना कर रही थी । पर नर्स बीना सुने चली गई । अस्पताल में झाड़ू पोछा करने वाली बाई सब सुन रही थीं । तुरन्त उसे ओटी मे ले जाकर लिटाया, और रिशेप्शन पर जाकर डॉक्टर को फोन किया, सारी बात बताई डॉक्टर ने कहाँ आज सन्डे है। मे नही आसकती, इस पर वो बोली ,आप का अपना कोई होता तो । उसनें फोन काट दिया और रानु के पास चली गईं उसे सात्वना देने लगी। 10 मिनट बादडॉक्टर आ गई उसनें तुरंत इलाज चालू किया और सेवती की झोली में वो खुशी या डाल दी , जिसका वो नौ महीनों से इन्तजार कर रही थीं रानु भी बेटे को देख कर ,सार दर्द भुल गई
चारूमित्रा नागर
9826667059

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