माँ '
बचपन में तूने प्यार से गूँथी , मेरी दो चोटियां ।
आ आज तेरे सफेद बालो को, में संवार दू माँ ............
बचपन में खिलाई तूने मुझे, तेरे हाथो से रोटियां।
आ तुझे दो कौर आज, में ख़िला दू माँ ...........
बचपन में थपकी दे मुझे, तूने सुनाई लोरियां ।
आ आज मधुर सा भजन तुझे, सुना दू माँ ....................
बचपन में अंगुली थाम बोली, चल पैय्या पैय्या ।
आ आज तू टिक कर बैठ, में तुझे सहारा दू माँ ....................
बचपन में तूने मेरे लिए, फैलाई मन्नत की झोलियां।
आ आज तेरी छत्र छाया की, मांग लू में भी एक दुआ माँ.....................
बेटे ही नही माँ पिता के रक्षक ,फर्ज पूरे कर सकती है बेटियां।
बेटे ही नही बेटिया भी, नौ महीने उसी कोख में रहती है माँ
बेटे से मुक्ति,गति होती, यह सब है किवदन्तियां।
बेटी हूँ तो क्या हुआ, में भी तेरे वंश अंश का वजूद हूँ'माँ'-----
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🌹 मां🌹
मां
तेरी
महक
पसरी है
जीवन दात्री
जीवन दायिनी
कोख का तेरा कर्ज
कब चुका सका कोई
तू जागी रात मे, में सोई
घना अंधकार जीवन मे
सदा प्रकाश पुंज बन आई
गोदी तेरी अद्भुत देव समाई
विलग नही होती बेटियां कभी मां
अंतर्मन छबी बसी जननी की
नदी की कलकल ध्वनि माता
झरनों का मधुर संगीत
मन के सुमधुर गीत
ईश्वर का उपहार
सृष्टि का है आधार
जननी नमन
करूं वंदन
चरणों में
प्रणाम
तुझे
मां।
🙏💐माया मालवेन्द्र बदेका
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
१२__५__२०१९

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