Sunday, May 19, 2019

मिट्टी की दीवारें




मिट्टी की दीवारें , टूटी छ्त ये कहती है ।
हम हुए पुराने , बच्चों दुनियाँ अब तुम्हारी है ।।

अंबर को छुते घर हों ।
पर गूंज हँसी की बिखेरे रखना ।।

जगमग हो रोशनी से घर सारा ।
पर सुर्य की किरणों के लिये खिड़की रखना ।।

कभी चांदनी रात में  ।
याद बिते पलों की करते रहना ।

जब याद आए वो अपने ।
तो चाँद में उन्हें देखते रहना ।।

रखना याद , बचपन अपना ।
बच्चों को भी ख़ुशियां देते रहना ।।

भीगने देना बारिश में ।
एक नाव कगज़ की बना कर देना ।।

ग़र हो मिलना पड़ोसियों से कभी ।
तो रिश्तों की डोर बांधे रखना ।।

जब मिले फुर्सत कभी ।
तो पिटारा यादों का खोलते रहना ।।

यादों की इस मिठी हलचल से ।
परिवार को संस्कारों में बांधे रखना ।।

उम्र के हर दौर को ,खुशियों से भरते रहना ।
छु लेना अंबर को , पर जड़ों को अपनी मत भूलना ।।

मिट्टी की दीवारें , टूटी छ्त ये कहती है ।
हम हुए पुराने , बच्चों दुनियाँ अब तुम्हारी है ।।

                         "  मीनू मांणक  "

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...