Friday, July 31, 2020

S

शुभ संकल्प समूह
त्योहार  मंगलमय  हो 












रक्षासूत्र भैया को बांधकर ,
बहना तिलक लगाती हैं।
मुँह मीठा कर ,आरती कर ,
वचन रक्षा का पाती है।
उपहारों का मोल न जाने,
बहन और भाई का प्यार।
परवाह ,प्यार और सर पर 
भाई का हाथ ही ह

*अचला गुप्ता


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:
राखी
राखी  बहना के मन भाई
भाई का रास्ता देख रही खडी है द्वार पर ।
भाई की कलाई सुनी ना रहे
बहन ने बनाई मोली से प्यारी सी राखी
एक डोर मे कितना पवित्र रिश्ता है भाई बहन का
*चारूमित्रा
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रक्षा का कवच है यह बंधन 
जीवन का आधार है यह बंधन 
भाई की कलाई पर बांधकर  बंधन
*मित्रा शर्मा 





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पावन सावनी पूर्णिमा का मान,
अटूट अनुरागी बंधन का आन।
रोली मोली तिलक से सजेगा थाल,
यूं ही दमकता रहे मेरे भाई का भाल।
     🌹मधु वैष्णव "मान्या"🌹




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रेशम की डोरी से बंधा 
ये बंधन है नेह का
भाई और बहन के 
पावन प्रेम का
एक दूसरे की रक्षा 
और सम्मान काll
            *नंदिनी जोशी
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रक्षा बंधन का पर्व मनायें 
रोली अक्षत थाल सजायें 
भई बहन का प्यार अमर है 
हर कोई यह है जाने , माने 
माँ देती खूब दुआऐ ,
सब की लेती है बलाऐ।
भाई छोटा हो या बड़ा 
बहन रक्षा का वचन है लेती 


जीवन की हर कठिन डगर पर साथ कभी न छूटे 




*डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई
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 भावभरा रक्षाबंधन
इस बरस ना मेहंदी,ना साज सिंगार
सूना सूना है वीरान ये राखी का त्यौंहार
सजल है बहनों के भाई के लिए आतूर नयन
पलकों पर भाई के, बहना ‌के आने का इंतजार
लेकिन ओ बहना आंखों से ना अश्रुधार बहाओ
अधरों पर मुस्कान लिए आशा का एक दीप जलाओ
जितना भी हो मलाल दिल में
मन में एक संकल्प जगाओ भावनाओं की डोरी से इस बरस
भाई की कलाई पर राखी सजाओ
दूर रहकर भाई तुम, बहन की रक्षा करने का फर्ज निभाओ
*-प्रिती धीरज जैन 
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: पहले दोस्त पक्का बना लिया,
फिर तस्वीर सेधक्का लगा दिया।
हम भी बड़े ढीठ नही जाने वाले है,
फ़ोटो में न सही लिस्ट में आने वाले है।
मेहंदी कुछ इस तरह  गुनगुना जाएंगे,
सिर्फ फोटो नही आपके दिलो पे  छप जाएंगे।

*कविता सक्सेना शुजालपुर
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 रे बदरा 
तुझको मैंने राखी बांधी 
तुझको मित्र बनाया 
तेरे रहते इस सावन में 
गीत प्यार का गाया 
सुनीता जी को धन्यवाद 
आपने चित्र लगाया 
*सीमा जोशी
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Y
बिहार: प्रीत के धागों के बंधन में
स्नेह कि उमड़ रहा संसार
सारे जग को सबसे सच्चा
होता भाई-बहन कि प्यार

*डॉ मीना 
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ये राखी हैं अनमोल
  न हीरे जड़ी न मोती सजी
न सोने की न चाँदी की 
 ये तो भैय्या मोली की
कच्चे धागे की
जिसमें हैं प्यार का बंधन
कच्चे धागों का पक्का बंधन
  हमारा प्यार हैं अनमोल

     
       *   शालिनी खरे ,भोपाल     








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 *अनूठे रिश्ते की बुनियाद है राखी*
*भाई बहन के प्रेम की सौगात है राखी*
*स्नेह,प्रेम  की डोर का प्रतीक है राखी*
*शुभ संकल्प भरा  संरक्षण त्यौहार है राखी*
*भाई बहन के अटूट संबंध से जुड़ी है राखी*

*पूनम शर्मा*
*इंदौर*





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 ये राखी भावनाओं का त्यौहार हैं।
ये राखी भाई बहन के प्यार का इजहार हैं।
ये राखी अपने मायके के प्रति अपनत्व का करार हैं।
ये राखी सिर्फ फूल या गुलदस्ता ही नही बल्कि सुंदर बहार हैं।

*पायल परदेशी
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इस राखी पर, खूब सारी शुभकामनाओं के साथ, खास भाभियों के लिये यह रचना! 🙏🙏

नई मिट्टी में अपनी जड़े जमाकर, स्नेह के धागे से रक्षा पर्व बुनती है 
बंधन तो भाई की कलाई पर होता है, भाभी गांठ की मजबूती बनती है

बहनों का बचपना ज़िंदा रखती है, घर में प्रेम के झूले बांधती हैं
तिलक तो भाई के माथे पर होता है, भाभी उसकी लालिमा बनती है

अपनों सी मुस्कान ले आती है, मायके का उजास बन जाती है
मिठाई तो भाई के मुंह में जाती है, भाभी उसकी मिठास बनती है

परंपरा के धागों से जोड़े रखती है, वह दो घरों का सेतु होती है
अक्षत तो भाई पर वारे जाते हैं, भाभी उसका आशीर्वाद बनती है

अपनी खुशियों से ऊपर वह रिश्ते की गरिमा का प्रकाश रखती है
दीपक तो भाई के सामने होता है, भाभी उसकी दीपशिखा बनती है

जीवन की थाली का मीठा सा रिश्ता, भाभी उसका ज़ायका बनती है
उपहार तो भाई से मिल जाता है, भाभी उसके साथ अनकहा मायका बनती 
*सुशीला कोठारी

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 राखी नहीं  बहना ने भाई की कलाई पर अपना
पावन प्रेम बडे मन से बांधा है।
 राखी के हर धागे में गुंथी है 
मधुर रिश्ते की अनमोल बहारें।
 भाई ने बदले में दिया ये उपहार
 तेरी सुरक्षा की बहना जिम्मेदारी मेरी।
 आसमां और जमीन का कहना है यही
 सबसे प्यारी मेरी बहना है लाखों में।
 *नीति अग्निहोत्री
 ५७सांई विहार इन्दौर मप्र
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राखी भाई बहना का प्यार,
पवित्र रिश्तों का त्योहार,
जन्म ,जन्म से रेशमी डोर,
थामे रखे एक दूजे से परिवार,

बहना तुम मिल जाना हर बार,
नहीं तो सूना रह जावे त्योहार,
बांट जोह रहा मैं  घर द्वार,
कब आओगी करोगी दुलार।
*प्रभा जैन,इंदौर
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मनहरण घनाक्षरी


विषय:- रक्षाबंधन

बहन सूरत प्यारी
जहान सबसे न्यारी
जतन करती खूब
होती  प्रेम धार है।

राखी वो सजाती थाल
तिलक लगाती माथ
रक्षाबंधन है आया
बाँधे रक्षा तार है।

मधुर मुस्कान लिए
हाथ  में मधुर लिए
खिलाती है भैया मुख
 दे स्नेह अपार है।

बंधन है अनमोल
निकले मधुर बोल
तत्पर रहती सदा
 हो सुख हजार है।

        *  रीतु प्रज्ञा
      दरभंगा, बिहार
   स्वरचित एवं मौलिक
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इस बरस ना मेहंदी,ना साज सिंगार
सूना सूना है वीरान ये राखी का त्यौंहार
सजल है बहनों के भाई के लिए आतूर नयन
पलकों पर भाई के, बहना ‌के आने का इंतजार
लेकिन ओ बहना आंखों से ना अश्रुधार बहाओ
अधरों पर मुस्कान लिए आशा का एक दीप जलाओ
जितना भी हो मलाल दिल में
मन में एक संकल्प जगाओ भावनाओं की डोरी से इस बरस
भाई की कलाई पर राखी सजाओ
दूर रहकर भाई तुम, बहन की रक्षा करने का फर्ज निभाओ
*(रचनाकार-प्रिती धीरज जैन )
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 बहनों के पवित्र प्रेम का भी है ये राखी का त्योहार,,,,,
बहुत बेसब्री से रहता है इंतजार,
कब आएगा ये राखी का त्योहार,
हमेशा पूज्य मम्मी का मिलता था,
इस दिन आशीष भरा प्यार,
परंतु प्यारी मम्मी  बहुत याद आएगी इस बार,
कौन कहता है केवल भाई बहन का पवित्र है ये त्योहार,
हम सब बहनों के अमर प्रेम का है,ये त्योहार,
भाई के न होते हुए भी हम बहनों का दिल रहता बेकरार,
बहने एक दूसरे की कलाई पर राखी बांध करती है इजहार,
सबके जीवन में ला देता है बहार,
मिल जाती खुशियां अपरम्पार,
Korona के चलते न मना पाएंगे, व्हाट्स एप ज़ूम पर ही मना लेंगे इस बार,
पर कभी कम न होगा हम बहनों का प्यार,
बहनों के अमर प्रेम का भी है ये त्योहार,,,,,,,,,,
                      नवनीत जैन
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जिस बहना संग पले बढ़े हम।
जिस बहना संग खेले लड़े हम।।
वह बहना जब दूजे घर जाती
राखी उसकी याद दिलाती।।
भाई नहीं यह धागा कच्चा
भाई बहन का प्यार यह पक्का
बहना राखी है अनमोल
नहीं लगाना इसका मोल
भाई बहन का रिश्ता पावन।
रक्षाबंधन लाता सावन ।।

*स्मिता जैन रांची

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रिश्तो की मजबूत डोर से,
बना रक्षा का बंधन है, राखी
भाई बहन की नोकझोंक से, 
सजा अनोखा यह बंधन, 
यह वादा है भाई का, बहन से,
सदा करूंगा रक्षा, 
ऐसे ही सदा बना रहे, 
भाई बहन का यह  बंधन.....

 रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
 डॉ. कीर्ति यादव
कस्तूरबाग्राम, इंदौर
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: राखी आई राखी आई खुशियां लाई खुशियां लाई बहन आज फूली न समाई राखी रोली और मिठाई इन सब से थाली खूब सजाई राखी आई राखी आई बांधे भाई की कलाई पर धागा भाई से यह करती है वादा राखी की लाज भैया निभाना बहना को कभी भूल न जाना भाई देता बहन को वचन दुख उसके सब हरण भाई बहन को प्यारा है राखी का त्यौहार सबसे निराला है
*मंगला सरोश 
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वीरा राखड़ीपे पीयर बुला जो
इनी बेन्या के भुली मत जाजो

नी चइए म्हारे सुन्ना का बाला
ढेर पड्या हे घाघरा ने लुगड़ा

लई मेल्या हे रेसम का पुमड़ा
भाभी भतीजाके कपड़ा लत्ता

नारेल बतासा ने लाड़ू पेड़ा
थारा सरु वीरा मफ़लर टोपा

अई नी सके तो खबर  दीजे
अई जउगा थारा जीजा साते

*सरला मेहता

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वह अमवा की डाली वह गौरी का झूमना झूम झूम गाती है पिया से मिल ना💐

आओ सखी री
 मंगल गीत गाओ सावन के महीने में भोले को मनाओ🌷

कृष्णा की मुरली पर राधा दौड़ी आई वृंदादावन की गलियों में  लीला रचाa🙏

भोली भाली गोपियां दौड़ी दौड़ी आए जमुना के तीरे वह वस्त्र चुराए🙏

राधाकिशन  भी नाच नचाए🌷 ता ता थैया करके गीत मधुर गाए। मोरनी मयूरी झूम झूम जाए💐 चंदा की चांदनी में रास
 रचाए💐


*सुषमा शुक्ला स्वरचित गीत
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रक्षाबंधन हर्ष प्रेम से
    भरा पुनीत पर्व
  भावनात्मक  संबंधों 
  का प्रतीक पर्व
 भाई-बहन के अटूट
 रिश्ते का त्यौहार
  स्नेह शांति सुरक्षा 
 विश्वास का त्यौहार
  सावन की पूर्णमासी 
  का पावन उत्सव
  राखी बांधती बहनों
  का  अद्भुत उत्सव
  
*ममता तिवारी इंदौर

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सावन पर नहीं बुलाया।
फ़ोटो में भी नहीं सजाया।
आप करो इनायत।
कैसे करूँ शिकायत?
***मीना जैन
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 मैंने क्या जुर्म किया 
तस्वीर हटा दी मेरी 
तस्वीर मेरी भी थी 
गैर की तो नहीं चाही थी ।


*राधिका 










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[माना तस्वीर में मौजूद चेहरे बेहद हसीन है 


पर ऐसे बुरे तो हम भी नहीं... 
किसी कोने में हमे भी पटक देते.... 


ज्यादा जगह भी नहीं घेरते हम तो .......
*अनीता शाह









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रंगों कि इस colour palette 

में हैं कुछ रंगों कि कमी 
,वह रंग इसमें शामिल होते
 तो संकल्प कि छटा होती और भी निराली
*स्वाति  वाडगे
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फोटो मे नजर से ओझल हुऐ कोई बड़ी बात नही ,
मुकद्दर की बात है।
हम तो आपके दिल में
आप हमारे दिल मे अमिट छाप है ।हर्ष की हरियाली
बनी रहें इसकी मुझे आस है ।
आपकी अपनी 
*मनोरमा जोशी 
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 मुझे क्यों मझधार में छोड़ दिया
अभी नई हूँ,क्या इसलिए मुझे घुड़क दिया
या कि सिर्फ सुंदर चेहरे आपकी शान है
ब्लैक ब्यूटी हूँ तो क्या,मेरी अपनी भी आन है
मुझमें यदि कमी है तो निसंकोच बताइए
नाराज़गी किस बात की है, वज़ह तो बताइए
रिश्ते में कहीं दूर की बहना ही बना लीजिए
पर इस तरह तनहा छोड़ कर मत जाइए।
आपकी दूर की बहना
*उषा गुप्ता

Thursday, July 23, 2020

सावन भोजपुरी गीत

आईल सावन सखी भोजपुरी गीत प्यार के पातर पगडंडी पर , 

आईल ऋतु फिर सावन के ।।

 बदरी घेरलस काला -काला , 

देख के मन में परल छाला बरसी बरखा के फुहार जब मन परेला मोर साजन के ।। 

आईल ऋतु फिर सावन के ।।

 दादुर के पी -पी के शोर , खींचे मोहे सजन के ओर, सपना तब देखेला अँखियाँ ,

 मोर प्रियतम के आवन के ।। 

आईल ऋतु फिर सावन के ।। 

 कर गोरी सोलह श्रृंगार , आवत होईहे पियवा तोहार, 

लागल बा मिलन के प्यास , 

आश लागल मनभावन के ।।

 आईल ऋतु फिर सावन के ।। 

 पड़ल झूला बा बागन में , 

कौवा उचरत बा आँगन में ,

 प्रेम के हिरनी मन में कुदे राह निहारे मन साजन के ।

 आईल ऋतु फिर सावन के ।। 

*डॉ मंजु गुप्ता

सावन आया

 "सावन आया"
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 सावन के दिन आये सखी री सावन के दिन आये।

 तन हुलसाया मन सरसाया अंखियन में प्रीतम है 

समाया नैनन नींद न आये सखी री सावन के दिन आये।

 उमड़-घुमड़ बदरा हैं आवैं बरस-बरस मोरे तन को भिगावैं 

याद पिया की आये सखी री सावन के दिन आये।

 पुरवा संग आंचल लहराया मांग सिंदूर टीका गहराया 

हिवड़े हूक उठत मोरे सखी री सावन के दिन आये।

 घर आंगन हरियाली छाई फूल-फूल डाली महकाई

 मोहे कछु न भावे सखी री सावन के दिन आये।

 मंद समीर की भीनी सन-सन रिमझिम में पायल सी छन-छन 

सोलह श्रंगार न भाये सखी री सावन के दिन आये। 

मेघ मल्हार पंचम स्वर गावत बूंद-बूंद जल तरंग 

बजावत मुझ विरहन को सताये सखी री।

 सावन के दिन आये।

* लीला कृपलानी, जोधपुर

अमृत रस

अमृत रस 
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खुद को खुद ही बचा लो भाई

 अभी बाहर जाना टालो भाई मझधार में पड़ी जीवन नैया 

पार इसे खुद ही लगा लो भाई चार दिन की यह बात नहीं है 

काटना है अभी तो सालों भाई गगन मंडल से

 अमृत रस बरसे गर समझ सको तो पा लो 

भाई मन संग इन्द्रियां विषय रस पिए सत्संग

 से मन को सभांलो भाई साथ न जाएगी 

लौकिक माया राम- रतन--धन कमा लो 

भाई तन की सुंदरता मत देख 'परिंदा' 

अन्तर मन को भी सजा लो भाई

* राम शर्मा परिंदा मनावर जिला धार मप्र मो 7869196304 24/07/2020

जागते रहो

हायकू
जागते रहो
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, जागृत रहो, न डरो संघर्ष से ,

 होंगे सफल। कोरोना काल,

 है समय कठिन, धेर्यता रख, रिश्ते का मोल,

 है बहुत कीमती, मानो दिल से,

 निंदा न करो, गुण ग्रहण करो, गुणवान हो,।

 आजादी नहीं, अंकुश भी न रखो, सही क्या देखो। 

 जीने की आशा, जागृत हो दिल में, निराश न हो। 

 सु संस्कार, अपना जीवन में , होगा उद्धार।

 जितना चाहो, जो चाहो जब चाहो , क्या कभी मिला, 

 काटो की राह, डगर है कठिन, चलते चलो

* नवनीत जैन

 

कुछ न कुछ छूटना लाज़मी है* 

 आज यूँही ख्याल आया कि अखबार पढ़ा तो प्राणायाम छूटा प्राणायाम किया 

तो अखबार छूटा दोनों किये तो नाश्ता छूटा सब जल्दी जल्दी निबटाये तो आनंद छूटा मतलब.....

 कुछ ना कुछ छूटना लाज़मी है हेल्दी खाया तो स्वाद छूटा स्वाद का खाया तो हेल्थ छूटी दोनों किये तो.....

 अब इस झंझट में कौन पड़े. मुहब्बत की तो शादी टूटी शादी की तो मुहब्बत छूटी दोनों किये तो वफा छूटी

 अब इस पचड़े में कौन पड़े.. जो पी तो गृहस्थी टूटी जो ना पी तो सुकून छूटा जो दोनों जिये तो.. 

 शायद सच बोलना छूटा आप बेहतर जानते होंगे मैं तो अब पीता नहीं। जो चखी तो स्वाद मुँह को लग गया जो ना चखी


पीने के सुरुर का एहसास छूट गया मतलब..... 

 कुछ ना कुछ छूटना तो लाज़मी है जो जल्दी की तो समान छूट गया जो ना की तो ट्रेन छूट

 गयी जो दोनों ना छूटे तो विदाई के वक़्त गले मिलना छूट गया मतलब... 

 कुछ ना कुछ छूटना तो लाज़मी है औरों का सोचा तो मन का छूटा मन का लिख तो तिस्लिम टूटा खैर हमें क्या..

 खुश हुए तो हँसाई छूटी दुःखी हुए तो रुलायी छूट गयी मतलब... 

 कुछ ना कुछ छूटना लाज़मी है *इस छूटने में ही तो पाने की खुशी है*

 *जिसका कुछ नहीं छूटा* *उसका सब संसार छूटा* 🌹 💕

*ममता बड़जात्या 

पीहर का संदेश

*पीहर का संदेशा* 😘🙏
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 बहन बेटियों का मन बहुत खुश हो जाता है, जब भाई भावज का पीहर से संदेशा आता है!

 उन्हें उपहार,रूपया, और पैसा कुछ नहीं भाता है भाई दो शब्द बोल दे तो दिल भर भर आता है! 

 बाबुल का घर सदा उनके जेहन में ही रहता है! 

 पिता की कुशलता का प्रश्न सदा मन में होता है.. खुद बूढ़ी हो जाये पर दिल तो बच्चा रहता है!

 माँ का आँचल उनके इर्द गिर्द लिपटा रहता है! 

 खुद की थकान का मायके जाके निदान होता है... दो पल सकून की नींद से मन तारोताजा होता है...


 पीहर में जब सभी बहनो का संग साथ होता है ... दीवारे चहक उठती है जब उनका मिलाप होता है.... भाभी की मनुहार से
 मन पुलकित हो जाता है.... भाईभावज से बाबुल के आँगन पे गर्व होता है ... अन्नपूर्णा का चेहरा परोसी थाली में दिखता

है!.... जब पसंद का भोजन पीहर में तैयार होता है.... पीहर आ के भाई में पिता का रूप दिखता है ....

 भाई बहन की बातों में फिर बचपन चहकता है .... भतीजों में इठलाते गणेशा का चेहरा दिखता है.... सुन्दर भतीजियों में माँ 

शारदे का रूप खिलता है .... सावन के त्यौहारों पर दिल बाग़ बाग़ हो जाता है... भाभी प्यार से बुलाएगी राखी का धागा कहता है... 
 बहन बेटियों का ताउम्र ही पीहर से नाता होता है.... उनकी सांस सांस से दुआ, आशीर्वाद निकलता है.... विदाई में शगुन के 

चावल फेंकने का क्षण आता है.... पीहर मेरा हरा भरा रहे बहन बेटी का मन कहता है.... 
 👍🏼👍🏼💕💕💕💕

*सुशीला कोठारी
पूजा पारवाल
सावन! 
ये वो मौसम है, जिसमें है मस्ती मस्त फुहारों सी। भीगे मन खुशियों की बूंदों से जो होती हैं

, बिंदास बहारों सी।
 प्रकृति करती है सिंगार,गाती है सरगम मत पूछो हाल नदियों का,जो करती हैं छम-छम। 

बरसता है जब मनमौजी सावन मन मयूर करता है नृत्य मनभावन। 
 बागों में झूले पड़ जाते हैं जब ये बदरा उमड़ घुमड़ के आते हैं। 
मंदिरों में ढोल नगाड़े बजते हैं हर गली शिवालय सजते हैं।
 रंग-बिरंगी राखियों से सजते हैं बाजार कहीं मिठाई,
 कहीं चाकलेट और कहीं उपहार। 
मन हो,उपवन हो या हो घर का आंगन हरी भरी हो जाती धरती
जब जब आता है सावन।

 पर ये कैसा सावन है आया? 

हर तरफ है,दहशत का साया कुछ ऐसा हुआ कोरोना का वार फीके हो गये सब त्यौहार वक्त है नाज़ुक मगर, भावनाएं रखनी होंगी
 मजबूत पीना होगा बेबसी का ये कड़वा घूंट। भरोसा है यही कि अपनों के साथ, 
ये विकट समय भी गुजर जाएगा। 
और फिर से खुशरंग सावन अपना असली रंग दिखाएगा।

* स्वरचित कविता पूजा परवाल













Tuesday, July 21, 2020

कजरी

*कजरी*
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हरे रामा पकड़े है जोर कोरोना,यही है रोना रे हारी।

आगे आगे पुलिस चलत है,पीछे जनता भागे रामा,
अरे रामा यहिसे कुछू नही होना,यही है रोना रे हारी।

इधर दुकानें बंद पड़ी है ठेके खुल गए सारे  रामा,
झूमें अद्धाऔर पौना, यही है रोना रे हारी।

ऊपर से आदेश हुआ है,घर से नही निकलना रामा।
फिर भी सड़क पर होना यही है रोना रे हारी।

अस्पताल में भीड़ लगी है,एकौ बेड ना खाली रामा,
पूरे न पड़ते बिछौना,यही है रोना रे हारी।

काढ़ा पियो घरै मा बइठो,थोड़े दिन थमि जाओ रामा,
अरे रामा अपनी जिद्द करोना यही है रोना रे हारी।

जल्दी से वैक्सीन बनाओ ,जग के पालनहारी रामा।
अरे रामाअब तो देर करो ना यही है रोना रे हारी
अरे रामा पकड़े है जोर कोरोना, यही है रोना रे हारी।
@
*डॉ सुषमा
कानपुर
21-7-2020

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हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

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