मां तुम सोचती हो ,
मैं बड़ा हो गया हूं ।
जिंदगी का बोझ,
स्वयं हो रहा हूं ।
धूप छांव में
जीने का अभ्यस्त हो गया हूं।
जिंदगी का निर्णय.
लेने में परिपक्व हो गया हूं ।
मां मैं केवल बड़ा हुआ हूं ,
पर तुम्हारे सम्मुख बच्चा हूं ।
जीवन की आपाधापी में घबरा जाता हूं।
जब अपने सामने संकटों का.
पहाड़ देखता हूं काम पूरा करने में थक जाता हूं
निर्णय लेने में असमर्थ होता हूं।
अपने आप को जब अकेला पाता हूं .।
तो दौड़कर तुम्हारी गोद में
सर रख देता हूं ,
और तुम्हारे आंचल से ,
मुंह ढक लेता हूं,
मेरे विचारों की को तुम जान लेती हो।
मन के अंतर्द्वंद को
पहचान लेती हो।
फिर जब अपने हाथ से ,
सर सहलाती हो।
कुछ देर बाद मैं ,
अपने आपको,
ऊर्जावान पाता हूं
माँ काआशीष का पाकर ,
भाग्य बदल जाएगा ।
मां है तो जीवन में
सब कुछ मिल जाएगा ।
श्रीमती शोभा रानी तिवारी
619 अक्षत अपार्टमेंट
खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 89894 09210

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