माँ तू है जगत जननी
तुझे शत शत नमन है,
तेरे स्नेह से गुलजार
सारा चमन है
मेरी श्रद्धा के सुमन तुझे अर्पन है।
माँ तू प्रेम, दया और ममता की मूरत है,
तेरा ह्रदय है विशाल मोहिनी तेरी सूरत है,
माँ तू जगत जननी
तुझे शत शत नमन है।
माँ वो तुम ही तो थी, जो मेरे लिए
जागी थी सारी रैन,
गीले बिछौनो पर सोई,मीठी लोरी सुनाई
मेरे लिए भूली थी अपना
सारा सुख चैन।
माँ आज मैं बड़ी और सयानी हो चली हूँ लेकिन जब भी तुमहें पाती हुँ अपने सामने,
मैं एक भोली सी नादान मासूम बाला बन जाती हुँ।
माँ सदा तुम ही तो मेरे जीवन पथ की
डगर पर मेरी पथ प्रदर्शक ,मेरी सखी और मागदर्शक बनी हो,
चाहें कठिनाईया कितनी भी आजाये,
कभी ना घबराना ऐसी सीख दे चली हो।
माँ तू जगत जननी तूझे शत शत नमन है़।
स्वरचित -- वंदना अर्गल।

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