Wednesday, May 1, 2019

महिला मजदूर का लल्ला


प्यारे लल्ला को,पीठ पर बांधकर
एक हाथ मे सुखी रोटी भाजी
बांधकर
हाथो में लिए हथौड़ा,चली वो
परिवार के पेट के खातिर
धूप की तपन हो,या बरखा की मार
कड़कड़ाती ठंड हो ,या कोई खुशियों का त्योहार
बस मुझे तो चलते जाना,चलते जाना ,कुटुम्ब के बन पालन हार
न आराम है ,न कोई गिला शिकवा,
खुशी है की बेटी को भेजूंगी शाला,मई दिवस पर दाखिल करवादूँगी पाठ शाला
पढ़लिख कर बन जाएगी मास्टर,इजनेर
तो फिर कभी न तोड़ना पड़ेंगे
मुझ जैसे पत्थर।
प्रभा जैन स्वरचित।1 मई 2019

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