Sunday, May 19, 2019

अटलबिहारी वाजपेयी जी और चुनाव


उन दिनों चुनाव प्रचार बहुत धूमधाम से नहीं होता था। कोई तामझाम नहीं।न शोर शराबा न बड़ी बड़ी रैलियां।
सबसे बड़ी बात बोलने में कटुता नहीं।
पूज्यवर अटल बिहारी जी बाजपेई उस समय जनसंघ के बहुत महत्वपूर्ण और बहुत योग्य व्यक्तित्व के नेता थे।
उनका ह्रदय बहुत विशाल और सरल व्यवहार था। मुझे अपने पूज्य पिताजी के साथ उनके सानिध्य का कई बार अवसर मिला। बहुत सौभाग्य रहा मेरा की जब भी चुनाव प्रचार या राजनीतिक कार्यक्रम में पूज्यवर पधारते तो भोजन का कार्यक्रम हमारे यहां रहता। बहुत छोटी उम्र थी मेरी जब अपने हाथों से बनी रोटी पहली बार उनको परोसी। मुझे याद है उन्होंने कहा था की बिटिया अगर मेरे घर जन्म लेती तुम तो तुम्हारा नाम अन्नपूर्णा रखता।इस बात पर सभी बहुत हंसे।मेरे पिताजी ने बहुत सम्मान पूर्वक कहा कि अटलजी यह आपकी भी बेटी है। ऐसे कई अवसर आये,जब भी पूज्यवर मिलते बहुत आशीर्वाद देते। हमेशा नीचे बैठकर भोजन करना और अपनी थाली या पत्तल स्वयं उठाना। बहुत सादगी थी।
उनका कहना होता की बेटी को  पढ़ाना,खूब प्यार से रखना चाहिए। बेटियां बड़ी कोमल होती है और न जाने कब ये बेटियां जिंदगी में कितने सपने छोड़ देती हैं केवल समाज और दिखावें के लिए।
सचमुच वह पहले का माहौल और वर्तमान में बहुत अंतर है।
पहले के चुनाव प्रचार पैदल, साईकिल से होते थे और फिर भी सरलता से सभी कार्यक्रम होते थे।सभी छोटे बड़े नेता और जनता का आमना-सामना होता था, लेकिन इतने बातों के तीर नहीं चलते थे।
सचमुच पूज्यवर अटल बिहारी बाजपेई जी बहुत ही सरल और सहृदय इंसान थे। इतने विद्वान और निश्छल ह्रदय के आशीर्वाद एक नहीं कई बार मिले।
उनकी एक कविता

आओ मन की गांठे खोलें
यमुना तट, टीले रेतीले,
घास-फूस का घर हांडे पर
गोबर सी लीपे आंगन में
तुलसी का बिरवा, घंटी स्वर
मां के मुंह से रामायण के
दोहे-चौपाई रस घोले
आओ मन की गांठे खोलें।
बाबा की बैठक में बिछी चटाई
बाहर रखे खड़ाऊं
मिलने वाले के मन में असमंजस
जाऊं या ना जाऊं
माथे तिलक नाक पर ऐनक
पोथी खुली स्वयं से बोलें
आओ मन की गांठे खोलें।
सरस्वती की देख साधना
लक्ष्मी ने संबंध न जोड़ा
मिट्टी ने माथे का चंदन
बनने का संकल्प न छोड़ा
नए वर्ष की अगवानी में
टुक रुक लें, कुछ ताजा हो लें
आओ मन की गांठे खोलें।
उनकी एक से बढ़कर एक रचना।
कितने संदेश अनछुपे।

हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा।
यहीं बात,यही संदेश यहीं विचार मनन करते हुए। पूज्यवर अटल बिहारी जी बाजपेई को सादर नमन🙏🙏
प्रस्तुति
माया मालवेन्द्र बदेका

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