*मेरे बालनाटक संग्रह रंग मंच के नन्हे तारे से एक नाटक*
*उम्र* 7,8 साल
*गणपति बप्पा मोरया*
पात्र परिचय
( देवू शेखर पूजा पिंकी कॉलोनी में रहने वाले 8 9 साल के बच्चे अभि भैया)
पहला दृश्य.
(गणेश उत्सव का समय है बच्चों ने मिल जुल कर जोर शोर से सजावट की है। कॉलोनी में एक और टेबल को सजाकर छोटा सा स्टेज बनाया है।फूल माला आरती नारियल सब थाली में सजा हुआ रखा है।
बच्चे गणेश जी बैठा रहे हैं कंधे पर गणपति बप्पा को जय कारे के साथ लेकर आते हैं)
देवू--- (कांधे पर गणपति जी की मूर्ति रखे हुए हैं)
गणपति बप्पा
बच्चे -------मोरया ....।
देवू--------अगले बरस तू
बच्चे------ जल्दी आ।
शेखर------जय ..गणेश ...
बच्चे -------जय गणेश।
पूजा------ 1234
बच्चे --------गणेश जी की जय जयकार
पिंकी ------;गणपति बप्पा
बच्चे --------मोरिया।
अभि भैया----(स्टेज के पास खड़े हैं)
लाओ लाओ यहां रखो गणपति जी को. पहले इनकी पूजा करेंगे फिर स्थापना करेंगे।
बच्चे ---------खुशी से जय गणेश जय गणेश
अभि भैया----- आओ पिंकी यह लो तुम आरती करो।
शेखर --------नहीं भैया मैं आरती करूंगा।
अभिभैया------अच्छा आओ (आरती की थाली उठाकर शेखर आरती करता है। सब आरती गाते हैं जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा)
अभि भैया-------हां तो दोस्तों आज से 10 दिनों तक गणपति जी हमारे मेहमान हैं हमें इनकी सेवा स्वागत-सत्कार अच्छी तरह करना है।
पूजा -------अरे भैया भोग तो लगाइए।देखो मैंने मोदक ला कर रखे हैं उधर कटोरी में
देवू--------ललचाते हुए वाह मोदक।
पूजा ---------गणपति जी के लिए है तुम्हारे लिए नहीं (
सब हंसते हैं)
देवू--------- प्रसाद तो मिलेगा ना
अभिभैया------हां मिलेगा। और जिम्मेदारी भी ।रोज तिलक करना,पूजा करना, माला फूल लेकर आना , रात को गणपति जी को सुलाना।
शेखर ---------अरे भैया यह सब काम मैं करुंगा ।
पिंकी ----------भैया म्यूजिक सिस्टम लगाइए न।
अभिभैया ---------शाम को लगा दूंगा गणपति जी को उनके ही भजन सुनायेंगे।
पूजा ----------(हंसते हुए) कितना अच्छा लग रहा है कितनी रौनक है कितनी सुंदर सजावट है. देखो लग ही नहीं रहा कि यह सब हमने किया है ।
अभि भैया------ चलो चलो यह प्रसाद लो। एक बार जोर का जयकारा लगाओ, और घर चलो शाम को मिलते हैं।
दूसरा दृश्य
(शाम का समय है बच्चे गणपति जी के पास हंस गा रहे हैं म्यूजिक सिस्टम लग चुका है गणपति जी के गाने बज रहे हैं चारों तरफ रोशनी झिलमिल आ रही है)
देवू--------(गाने के साथ साथ गुन गुनाता है) देवा हो देवा गणपति देवा ।
पूजा ----------तुमसे बढ़कर कौन तुमसे बढ़कर कौन..
पिंकी---------- और तुम्हारे भक्तजनों में ....
शेखर –--------हमसे बढ़कर कौन।
( सबखिलखिलाते हैं)
अभि भैया---------- क्यों कैसा रहा
बच्चे --------------मजा आ गया भैया।
अभि भैया-------- चलो आरती का समय हो गया है।
शेखर -----------भैया मैं करूंगा।
पिंकी----------- नही। तूने सुबह की थी अब देवू करेगा।
देवू------------हां मैं करूंगा आरती।
अभि भैया ----------अच्छा तो कर ले आजा जल्दी ।यह आरती जला।
शेखर ------------मैंने कहा ना मैं ही करुंगा आरती।
पूजा ---------नहीं शेखर देवू करेगा
देवू----------यह तो गलत है शेखर । तू ही आरती करे तू ही माला पहनाए तू ही प्रसाद बांटे।
शेखर ----------हां मैं ही करूंगा यह सब क्या तुम जानते नहीं गणेश जी पर मेरा अधिकार सबसे ज्यादा है।
अभिभैया ---------यह कैसी बातें कर रहे हो शेखर
शेखर---------तो पूछ लो इन्हीं लोगों से आज मुझ पर गुस्सा दिखा रहे हैं ,गणेश जी खरीदते समय कैसे विनती कर रहे थे ,भूल गए क्या।
अभिभैया--------- विनती.... मतलब ।
पिंकी ----------- वह क्या है भैया गणपति जी की मूर्तियां बड़ी महंगी-महंगी थी और हमारा चंदा कम हुआ था।
पूजा ------------तो शेखर ने ज्यादा पैसे मिला दिए थे।
देवू-----------तब हमें क्या पता था कि यह ऐसा करेगा।
शेखर---------ए देवू । यह मत भूल अगर मैं पैसे नहीं मिलाता तो तुम लोग गणपति जी भी नहीं रख पाते।
देवू---------चल जा जा उलझ मत मुझसे ।
अभि भैया--------एक मिनिट । बंद करो यह फालतू बातें और शेखर तुम यह क्या कर रहे हो?
शेखर ----------सच ही कह रहा हूं मैंने ज्यादा पैसे मिलाएं हैं तो हर चीज मैं पहले करूंगा।
देवू--------(गुस्से में) तो तू रख अपने गणपति अपने पास मैं जाता हूं ।वह चला जाता है ।
अभि भैया--------अरे देवू..... । शेखर रोको उसे....।
शेखर --------------मैं क्यों रोकूँ। जाता है तो जाए चलो हम आरती करते हैं।
पिंकी ------------तू ही कर। मैं भी जा रही हूं
पूजा-------( पैर पटकते हुए ) और मैं भी । अब कर अकेले ही सब कुछ।
शेखर ----------अरे जाओ जाओ इतना गुस्सा किसे बताते हो ।
अभि भैया ----------शेखर तुझे तो मैं बाद में देखूंगा पहले उन्हें मनाता हूं।
शेखर ---------मैं अकेला ही अच्छा हूँ।
तीसरा दृश्य
(गणपति जी के पास उदासी छाई है शेखर अकेला बैठा है उसके साथ कोई नहीं है )
शेखर---------(मन ही मन)
जिसे नहीं आना मत आओ मैं तो आरती करूंगा भगवान की आरती की तैयारी करके आरती करता है फिर जोर से जयकारा लगाता है गणपति ....बब्बा ........।
पीछे कोई भी नहीं रहता जो बोले मोरिया ।वह पलट कर देखता है फिर स्वयं ही धीरे से कहता है मोरया।
शेखर --------पता नहीं कब तक गुस्सा रहेंगे यह सब।( चहल कदमी करते हुए)
ऐसे अकेले अकेले तो बिल्कुल भी मजा नहीं आ रहा ।(2 दिन ऐसे ही बीत जाते हैं.)
अभि भैया-------(तीसरे दिन )अरे शेखर क्या हालचाल हैं ।और तुम्हारे गणपति जी इतने उदास क्यों दिख रहे हैं।
शेखर ---------मुझे बुखार है अभि भैया दवाई खा कर आया हूं।
अभि भैया ----------क्या....? बुखार । दिखाना तो अरे हां तुम तो गरम हो। फिर यहां क्यों बैठे हो। आराम करो ।
शेखर ----------गणपति जी को अकेला कैसे छोड़ दूं।
अभि भैया---------अब तुमने ही तो सबसे लड़ाई की है ।
शेखर ----------मैं शर्मिंदा हूं भैया। पर कैसे मनाऊं सबको कोई नहीं मानेगा।
अभिभैया-------तुम्हें गलती का एहसास हुआ यही बहुत है ।चलो रात को आरती हम दोनों साथ में करेंगे।
शेखर ---------(खुश होकर) सच भैया।
अभि भैया---------अभीचलो आराम करो।
चौथा दृश्य
(अभी भैया और शेखर भगवान को फूल माला पहनाते हैं आरती करते हैं शेखर बुझे मनसे आरती करता है फिर धीरे से जयकारा लगाता है बोलो गणपति महाराज की..... )
बच्चे ----------(पीछे आकर खड़े हो जाते हैं और जोर से जोर से चिल्लाते हैं जय......)
शेखर चौंक कर पलटता है। खुशी से उसके आंसू निकल आते हैं पूरी हिम्मत के साथ फिर जयकारा लगाता हैं गणपति बब्बा.......
बच्चे ------------मोरया......।
( शेखर सबसे गले मिलता है )
शेखर -----------तुम लोग.....। तुम्हें भैया लेकर आए ना
पूजा -------------अब तुम बेवकूफ हो तो हम थोड़े ही है ।
पिंकी ------------भइया ने बताया तुम बीमार हो तो हम अपने आप को रोक नहीं पाए।
शेखर------------ सच तुम लोग सच्चे मित्र हो।
देवू-------------और तू तू.. बेवकूफ मित्र। है ना
शेखर--------(उसे गले लगते हुए ) सच।
अभिभैया---------- लो भाई प्रसाद लो सब ।
गणपति बब्बा .........
बच्चे ----------मोरया......।
पूजा -----------एक दो तीन चार
बच्चे----------गणपति जी की जय जयकार।
(तभी गाना बज उठता है देवा हो देवा.......।
बच्चे झूमते हैं)
पर्दा गिरता है।
प्रतिमा अखिलेश