Wednesday, May 8, 2019

याद आती है माँ

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है मुझको
चिमटा बासन फुकनी जैसी माँ

बाँट के अपना माथा
चेहरा आँखे
जाने कहाँ गई।
फटे पुराने एक अलबम मे
चंचल लड्की जैसी माँ
निदा फाजली

सुनीता मिश्रा

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