छुक छुक करती आती रेल
छुक छुक करती जाती रेल
दूर पास सभी को ले जाती
बड़े काम है आती रेल ...
शान बड़ी निराली इसकी
चाल बड़ी मतवाली इसकी
चलती ज्यों करती हो खेल .....
नर हो या हो फिर नारी
सभी करें इसकी सवारी
मचती रहती है रेलमपेल .....
मर्जी हो जहां तुम जाओ
मर्जी हो वहां से आओ
चाहे दिसपुर हो या परेल .....
हिन्दू ,मुस्लिम, सिख्ख ,ईसाई
करे सफ़र जैसे हों भाई
सभी धर्म का कराती मेल .......
चेन्नई से इडली ले जाती
कश्मीर से केशर ले आती
और मुंबई से लाती है भेल ....
हल्का हो या भारी माल
चाहे पीला हो या लाल
सबको लाती ले जाती रेल ......
तुमको चाहे कहीं भी जाना
टिकट कटाना भूल न जाना
वरना जुर्माने संग होगी जैल ....
-----मधु सक्सेना

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