Monday, March 16, 2020

भारत -नेपाल मेत्री  में  शुभसंकल्प  समूह का एक प्रयास
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भारत -नेपाल मेत्री  में  सदभावना  के बीज अंकुरित करने  में  शुभसंकल्प  समूह ने अपना एक प्रयास  किया है।
शुभसंकल्प समूह की निर्देशक  डा  सुनीता श्रीवास्तव के साथ 23 लेखक ,लेखिकाओ ने एक दिवसीय  हिंदी  संगोष्ठी  आयोजित  कर यह साबित  कर  दिया कि  सरहद की  दीवारें  भाईचारे  को कम  नही कर  सकती।
शुभसंकल्प समूह का यह आयोजन काठमांडू  में  आयोजित किया गया  जिसका  शुभारंभ  डा  जगमान गुरुड न(उपकुलपति) ने किया।
इस अवसर पर  नेपाल के 20 साहित्यकारों  को शुभसंकल्प समूह  द्वारा सम्मानित  कर भारतीय नेपाली  मेत्री  साहित्य के द्वार  पर  दस्तक देते हुये  दोनो देशो ने अपना साक्ष्य प्रस्तुत  किया।
"भारत -नेपाल  " साझा  संकलन का विमोचन भी किया गया।
दोनो देशो के राष्ट्रीय  गीतो के साथ नेपाली  मंच ने भारतीय लेखकों  का अभिवादन  किया।
इस  अवसर पर  भारत  से आये शुभसंकल्प  समूह के मेहमानों  का नेपाल के साहित्य  मंच से सम्मान  भी किया गया  जिसमेँ  डा सुनीता श्रीवास्तव, डा  अल्पना आर्या,डा  स्वाति सिंग,डा  संगीता भारुका,डा  विजिया त्रिवेदी,डा  महिमा दुबे,डा ,अमरजीत कौर ,डा  मेघना  राय, डा  अर्चना  श्रीवास्तव,श्रीमती मनोरमा जोशी,संकल्प  श्रीवास्तव ,चिन्मय  श्रीवास्तव  को प्रमुख रुप से सम्मानित  किया गया।

Saturday, March 14, 2020

होली
तुम संग प्रीत  की होली,
रंगों से भीगी हमजोली,

महका गुलाल  लालम लाल,
मदन गोपाल नाचे ग्वाल बाल,

ढोलक की थाप, मृदंग ताल,
बाजत मुरलिया,स्वरताल,

ब्रजनारी भीगी कंचुकी सारी,
केसरिया रंग मारी पिचकारी,

चंदन वदन महका तनमन,
सुध-बुध बिसारी मनमोहन,

श्याम रंग रंगी मैं श्यामा,
फागुन में मन भीगा कान्हा,

मन उमंग चढ़ा प्रीति रंग,
फागुन में रंगाई कृष्ण संग,

मैं तेरी होली और तू मेरा,
रंग बासंती चहुंओर बिखेरा,

तन मन भीगा प्रेमरंग,
जनम मरण सब तुमसंग।।

ममता कानुनगो इंदौर

Friday, March 13, 2020

समीक्षा ३८
डॉक्टर सुषमा रावत की एक कविता: "मेरा जीवन"

डॉक्टर सुषमा रावत शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और अपना निजी अस्पताल चाइल्ड केयर हॉस्पिटल के नाम से है जिसे स्वयं संचालित करती हैं। इनकी अभिरुचि शोध कार्य, विटामिन डी एवं दिनचर्या, संगीत, गायन, लेखन है। इनकी प्रकाशित कृति है "फ्रीडम फॉर एपिलेप्सी"।


"मेरा जीवन"

पता नहीं, कितनी कीमत है,
कितनी इज्जत है मेरी,
पर अहंकार को डिब्बी में बंद कर
सागर तले रख दिया है
हाँ, कठपुतली हूं मैं,
जिसकी एक डोर
स्वयं श्रीकृष्ण के हाथ में,
और दूसरी स्नेही जनों के,
मेरा जीवन-नृत्य उँगलियों से है,
इसी बीच ढूँढती हूँ जीवन का मकसद,
कैसे याद किया जाएगा मुझे मेरे बाद?
क्या एक वृक्ष की तरह?
जिसकी जड़ें ज्ञान अर्जन कर
परिवर्तित करती रही
ऐसे फल में जो अब सबका जीवन अमृत है,
उस समय, दूसरों का तो फिर भी पता नहीं,
पर मेरी नजरों में मेरी
कीमत और इज्जत जरूर होगी।

डॉ सुषमा रावत

🌷🌹🌷🌹🌷🌹

मेरी नजर में...

इस कविता के मूल में त्रिआयामी तत्व हैं। लोकायतन, रंगायतन और भावायतन।
"लोकायतन" में सांसारिक क्रियाएँ, प्रतिक्रियाएँ और लोकमंगल का विचार है। "रंगायतन" में जीवन का परम उद्देश्य, कर्म की महत्ता, जीने का आनन्द और उसकी प्राप्ति के महीन सूत्र हैं और "भावायतन" में कर्मनिष्ठा, लोककल्याण, भक्तिमय समर्पण, परमार्थ और आत्मबोध के भाव हैं। इन तीनों का यहाँ अद्भुत समन्वय है। यहाँ इसकी त्रिवेणी बहती है।
कर्म, अकर्म और विकर्म के निर्णय में बड़ा प्रचलित वाक्य है- "लोग क्या कहेंगे?" कविता का प्रारंभ भी इसी अदृष्य प्रश्न से होता है। क्या करूँ या क्या न करूँ? यह भ्रम है, यही अनिश्चयता है। श्रीमद्भगवद्गीता का प्रादुर्भाव अर्जुन के भ्रम में पड़ जाने के कारण होता है लेकिन उपसंहार उनके आत्मबोध से होता है। अर्जुन कहते हैं  बीच में भक्ति, कर्म और ज्ञान की त्रिधाराएँ बहती हैं। कविता में गीता के ये तत्वदर्शन समाविष्ट हैं। अहंकार का लौकिक अर्थ घमण्ड है और आध्यात्मिक अर्थ वह तत्व जो भौतिक विषय-सुखों की चाह करने वाला है। कविता कृत संकल्प है कि यह अहंकार त्याग दिया गया है और अर्पिता प्रभु की राजी में अपनी रजा समझती हैं। कविता में कृष्ण की भक्ति है, वृक्ष की तरह का निष्काम कर्मयोग है और स्वयं को पहचानने का आत्मबोध है। जीवन की आस्था स्नेही जनों से बँधी है और विश्वास जगदीश्वर श्री कृष्ण से जुड़ा है। इस तरह आस्था और विश्वास का सुन्दर युग्म है।
"मेरा जीवन-नृत्य" है। नृत्य तो स्वयं एक उत्सव है। इस उत्सव के तार यदि श्री कृष्ण और अपने लोगों से जुड़े हों तो वह रास ही है। इस आनन्दोत्सव के मध्य यदि जीवन जीने का मकसद मिल जाता है तो जीव धन्य हो जाता है। मन का परितोष मिल जाना जीवन में अमृतत्व को उपलब्ध हो जाना है।
कविता आत्मबोध कराती है और भ्रमरहित करती है। "मेरी नजरों में मेरी / कीमत और इज्जत जरूर होगी।" कविता भक्ति, ज्ञान और कर्म का अद्भुत संगम है।

रामनारायण सोनी
भयभीत हूँ मैं

  नहीं बता सकता कितना भयभीत हूँ मैं
        कहीं  कुछ शंकीत भी हूँ मैं
           करोना के नाम से ही
        बहुत ही आतंकित भी हूँ मैं ।

 अपने ही घर में अब कैदी बन बैठा हूँ मैं
    पता नहीं कैसे सम्हल पाऊँगा मैं
    चलेंगे कैसे अब मेरे शतरंजी मोहरे 
  बिन आय.पी.एल.कैसे जी सकता हूँ मैं ।

  खरीददारी भी कब की कर चुका हूँ मैं
     मंडियों में  निलामी करा चुका हूँ मैं 
        अब यह अरबों  का नुकसान
      ए करोना  कैसे उठा सकता हूँ मैं ।

        स्वार्थ की पट्टी संग रहता हूँ मैं
 सब कुछ जानकर भी गांधारी बन बैठा हूँ मैं
   कुछ भी हो जाए चाहे  चली जाए चमडी
      दमडी को कैसे छोड़ सकता हूँ मैं ।

        भयभीत हूँ मैं भयासक्त हूँ मैं
  सख्त मिजाज शासक से आतंकित हूँ मैं
       आय.पी. एल. रुक मत जाना
   तेरे रुकने की आशंका से भयभीत हूँ मैं ।

            बी.सी.सी.आय. हूँ मैं
    दौडा लपका के कमाई करता हूँ मैं
       लग जाए चाहे दाग मेरी साख पर
 पर कमाई का धंधा कैसे रोक सकता हूँ मैं ।

      सौ. राधिका इंगळे
           देवास

Tuesday, March 10, 2020

फगुनी रंगो के साथ ,महिला दिवस का सम्मान  करते
  हुये  शुभसंकल्प  समूह का होली का आगाज
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इंदौर  खबर दर्पण
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  पर  होली के रंगो के साथ शुभसंकल्प समूह  ने अपना रचनात्मकता और  सकारात्मकता की दिशा में   एक कदम आगे बढ़ाया। इस अवसर पर  डा  साधना पंडित,डा  अर्चना श्रीवास्तव,डा  अनामिका भागवत,डा  श्वेता  माहेश्वरी,डा  स्नेहलता  श्रीवास्तव,प्रभा जैन ,सरला सामलिया  के आथित्य में  दिपक प्रज्जवलित कर कार्यकम  का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम  संचालक डा  सुनीता श्रीवास्तव ने  कहा कि  इस अवसर पर  50 महिलाओ को मिडिया ,साहित्यक ,सामजिक ,शेक्षणिक  क्षेत्र के कार्यो को लेकर सम्मानित किया गया।
महिलायें  किस तरह से विपरित परिस्थितियों  मे  आगे बड़  सके ,इसके लिय मंथन किया गया।
मिडिया ,पत्रकारिता में  कार्य करने  वाली अकिता जोशी-भास्कर ,राधिका कोडवानी प्रभात किरण ,सुमेधा  पुराणिक जी,हेमा पीपुल्स,ऋचा सोजातिया एन्ं डी ए  ती टी  वी,को पत्रकारिता कार्यो के लिय,सामजिक कार्यो के लिय -सरला समलिया  ,प्रभा जैन,आभा मेहता ,अचला गुप्ता,पूनम शर्मा ,नवनीत,उमा सक्सेना जैन ,किरण जेनति  ,म्रदुला सिन्हा ,मनोरमा  जोशी ,डा  साधना  पंडित ,डा  श्वेता  माहेश्वरी ,साहित्य क्षेत्र में  डा  विजिया त्रिवेदी,डा  अल्पना आर्या,डा  चित्रा  जैन,,वंदना  पुणेतंबेकर,डा  सुषमा दुबे,चारुमित्रा  ,सरला मेहता ,शाल नी रयजादा ,डा  राधिका, डा  सुधा चौहान ,डा  संध्या जैन,डा  हेमलता इंगले ,सुरेखा भारती ,डा  इंदू  जैन ,डा  नंदनी जोशी ,उषा गुप्ता ,आदिति भदौरिया  मधु टाक ,शिक्षा  क्षेत्र में  डा  संगीता भारुका ,डा  अनामिका भागवत, कायस्थ समाज से डा  अर्चना श्रीवास्तव ,प्रतिभा श्रीवास्तव ,डा  स्नेहलता श्रीवास्तव  वंदना  अर्गल  को सम्मानित किया गया।
इस  अवसर पर  प्रतिभागियो ने फगुनी गीत ,गजल ,सुनाकर श्रोताओं को  मंत्रमुग्ध  कर  दिया ,महिला सशक्तिकरण  के लिय महिलाओ ने बेबाकी  वक्तव्य दिया।
आभार प्रदर्शन  डा  सुनीता श्रीवास्तव ने  दिया।
डा  सुधा चौहान ,डा  विजिया त्रिवेदी ने कार्यक्रम  का संचालन किया,कार्यक्रम  आयोजक उपेन्द्र श्रीवास्तव ,चिन्मय  श्रीवास्तव ,संकल्प श्रीवास्तव  ने सभी का स्वागत  किया।

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