Sunday, May 19, 2019

फुलपात्र

एक सामयिक चर्चा..........महाराष्ट्र में पानी पीने के लिए एक बर्तन का उपयोग किया जाता है, उसे मराठी में "फुलपात्र" कहते हैं... साईज़ में यह सामान्य कटोरी से थोड़ा ऊँचा, लेकिन गिलास से आधा होता है. मराठियों के घरों में पानी पीने के लिए उपयोग होते इसे सामान्य रूप से देखा जा सकता है.

फिलहाल इंदौर शहर में "पानी बचाओ मुहिम" के अंतर्गत "आधा ग्लास पानी अभियान" चल रहा है, जो एक सराहनीय कदम है. यह आधा ग्लास पानी की प्रथा महाराष्ट्रीयन परिवारों में कई वर्षों से निभाई जा रही है, चित्र में दिखाए गए "फुलपात्र" में ही अतिथि और घर के सदस्यों को पानी दिया जाता है.

मूलतः महाराष्ट्रीयन परिवार मितव्ययी और किसी भी कार्य को योजनाबद्ध करने में विश्वास रखते हैं, हालाँकि "कंजूस" और "कढियल" कहकर इन्हें गैर-मराठी भाषियों के ताने उलाहने, और खिल्ली सहनी पड़ती है. परन्तु अनादिकाल से ही महाराष्ट्रीयन परिवार प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी रहे चाहे वह स्त्रियों की शिक्षा हो, विधवा विवाह हो, दहेज नहीं लिया-दिया जाना हो, अन्धविश्वास निर्मूलन हो, स्वतंत्रता आंदोलन हो, शस्त्र संचालन हो, प्रशासनिक व्यवस्था हो... मराठी ब्राह्मण घर से लेकर कार्यक्षेत्रों तक सभी क्षेत्रों में अग्रणी रहे है. विवाह समारोह में विद्युत की बचत तथा अतिथियों को दिन का सुस्वादु भोजन परोसने के इरादे से मराठी परिवारों में विवाह भी दिन के समय होते हैं... (हालाँकि अब विद्रूपता और कुप्रथाओं की घुसपैठ के कारण रात के रिसेप्शन आम हो चले हैं).

एक और उत्कृष्ठ उदाहरण है "मुम्बई चा डबेवाला" है, जो निम्न शैक्षणिक योग्यता के उपरांत भी आज MBA के छात्रो के लिये मैनेजमेन्ट का पाठ पढ़ाते है. मूल उद्देश्य यही है कि सीमित संसाधनों से भी महाराष्ट्रीयन उसे पूर्ण करते हैं... आधुनिकता के साथ संस्कारो का संरक्षण भी मराठी परिवारों में आज भी दिखाई देता है... जलसंकट पूरे भारत में पसरता जा रहा है, आप भी अतिथि को आधा गिलास पानी परोसें, फिर लगे तो फिर परोसें... फिर लगे तो फिर से... लेकिन हर बार "फुलपात्र" जितना ही दें, अपव्यय नहीं होगा.

"आधा ग्लास पानी" उन लोगो के लिये एक संदेश है जो महाराष्ट्रीयन परिवारों की मितव्ययिता को हेय और दोयम दर्जे की दृष्टि से देखते हैं... मराठियों की खिल्ली उड़ाने वालों के लिए एक सन्देश है कि, "घमण्ड" चाहे रूप का हो, या धन का, अच्छी बात नहीं है....
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