घटना उस समय की है जब मैं दसवीं कक्षा की छात्रा थी।स्कूल के वार्षिक उत्सव के लिए सचिव चुनी गई थी।हमारे मुख्य अतिथि तत्कालीन शिक्षा मंत्री माननीय बलिराम जी हिरे थे जिनका सम्मान मुझे करना था और स्वागत भाषण के साथ स्कूल की गतिविधियों से उन्हें अवगत कराना था।मैंने दिन रात मेहनत की ।भाषण की तैयारी और जिम्मेदारी के अहसास ने मुझे और अधिक मेहनती बना दिया था।
हमारे कार्यक्रम में मंत्री महोदय पधारे ।मैंने पुष्प गुच्छ से उनका स्वागत किया और जैसे ही भाषण शुरू किया उन्होंने इशारे से रोक दिया।समय उनके पास कम था ,उन्हें और भी कहीं जाना था और मेरी सारी तैयारी धरी रह गयी।उदास मन और भरे गले से मैंने धन्यवाद कहा और स्टेज से नीचे उतर आई।
आज भी वह घटना जब याद आती है तो किशोरावस्था की मासूमियत पर बरबस हंसी आ जाती है।
अचला गुप्ता
इंदौर
हमारे कार्यक्रम में मंत्री महोदय पधारे ।मैंने पुष्प गुच्छ से उनका स्वागत किया और जैसे ही भाषण शुरू किया उन्होंने इशारे से रोक दिया।समय उनके पास कम था ,उन्हें और भी कहीं जाना था और मेरी सारी तैयारी धरी रह गयी।उदास मन और भरे गले से मैंने धन्यवाद कहा और स्टेज से नीचे उतर आई।
आज भी वह घटना जब याद आती है तो किशोरावस्था की मासूमियत पर बरबस हंसी आ जाती है।
अचला गुप्ता
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