![]() |
| साधना श्रीवास्तव |
झल के आओ ,ऐ चांद तुम अपनी शीतल चांदनी के रस बिन्दु बरसा जाओ ऐ जाओ ,मेरी लेखनी की शुभकामनाए सबको देकर आओ, मेरे देश को झुलसती गर्मी से बचाओ ,ऐ जाओ सर्द हवाओं तुम फिर से लौट आओ 🙏🏻
-----–------------------------------------------
![]() |
| सुनीता मिश्रा |
--------------
तपन धूप की,
शीत की सिहरन
तन मन भिगा गया
बारिश का मौसम
झेल रहा है मेरा जीवन
मज़दूर दिवस पर ,
हम सभी मज़दूर है।
अपने अपने कर्म पर डटे हुए
जीते है जिन्दगी को
सांस देते हुए।।
सुनीता मिश्रा
---–------
-मजदूर दिवस की की हार्दिक शुभकामनाएं ।
![]() |
| मनोरमा जोशी |
चल देते है भर दुफहरी शीश पर तगारी श्रम का अथाह बोझा ढोते वह कर्मठ श्रिमिक कहाते
गर्मी सर्दी बारिश की परवाह बस पेट की दो रोटी कमाने के खातिर
गोद के बच्चे को पीठ पर लाद फटी साड़ी की गोदडी़ बना कर नीम तले झूला डाल बच्चे को निहारती समयानुसार उसे चलते चलते स्तनपान कराती इतनी मुशकिलों के बावजूद वह मस्त मस्त
रहती ।भूख लगी तब कोरी रोटी कांदा फोड़ साथ मे लसन की चटनी से खाकर फिर तगारी उठा काम मे जुट जाते लेश मात्र गम नहीं बस दो रोटी अपने परिवार को पालना यही उद्देश्य लेकर जीवन यापन करते है ।
सांझ ढले फिर वहीं चूलहा जलाते थक कर सो जाते फिर भी खुशहाल जीवन बिताते ।
धन्य हे उनके जजबे को सलाम ।--------------



No comments:
Post a Comment