Tuesday, May 21, 2019

जन्मदिन





मानसी ने कमरे की सफाई कर और खिड़की  में रखे गमले में उगे पान की बेल को पानी डालती हुयी मुझ   से पूछा , " दीदी  आज  तो आप उदास लग रही हो और दिन तो आप मेरे हाल - चाल व मेरे  परिवार के बारे में कुशल - मंगल पूछती थी ."

    दुखी हो के  मैंने   उसे कोई जवाब नहीं दिया . यूँही चुपचाप उतरा हुआ मुँह लिए गुमसुम बैठी रही .

 मानसी ने मन  ही मन सोचा शायद आज काम करने देर से आयी हूँ . इसी वजह से खामोश और नाराज लगती है . फिर मानसी ने अपना प्यार भरा हाथ मेरी पीठ  पर थपथपाते  रख उदासी का कारण  पूछने लगी .

 मानसी के  प्यार भरे हाथों से  मैं भाव विह्वल हो गयी . सिसकियाँ ले - ले के रोने लगी . उसे ऐसा अनुभव हुआ कि जैसे उसकी अपनी माँ हाल - चाल पूछ रही हो .  मेरे  मस्तिष्क  पटल पर  अतीत में मनाए गए जन्मदिनों के चलचित्र एक के बाद एक चलायमान हो के  मैं मानसी को बताने लगी  .

 "  आज मैं बारह वर्ष की हो गयी हूँ . इससे पहले मेरे माता - पिता ने  मेरा जन्मदिन कभी घर पर तो कभी  मेरी सहेलियों के साथ होटल में मनाया था . जन्मदिन पर अपनी मनपसन्द नयी फ्राक पहनकर , सज - धज के , दोस्तों के साथ पार्सल - पार्सल का खेल खेलकर और चाकलेट केक पर  मोमबत्तियां सजा कर केक  को काट कर बड़े प्यार से सबको खिलाती थी और रिटर्न गिफ्ट भी देती थी . मेरे माता - पिता दोनों ही वन विभाग में नौकरी करते हैं , उन्हें  दो साल के लिए ट्रेनिंग के लिए लंदन जाना पडा है . उन्होंने मेरे लिए  न तो  ग्रीटिंग कार्ड भेजा और न ही कोई  उपहार .  न ही मेरी सहलियों ने  और मेरी रूमेट   ने मुझे शुभकामना दी है .   लगता है मेरी सहेलियों की कोई चाल हो . मन में कड़वड़ाहट लिए तनावयुक्त हो कर अपने भावों में बह रही थी . "

 तभी मानसी ने  मेरे को गले लगाकर प्यार कर ढेर सारी शुभकानाएं दे के खूब खुश रहने का और फलो  - फूलो का आशीर्वाद दिया और जन्मदिन का उपहार देने का वादा कर होस्टल के दूसरे कमरों की सफाई करने में जुट गयी . यह अपनत्व भारी  आशीषें  जैसे   मुझ में नयी ऊर्जा , नयी शक्ति भर रही थी और मंगलमाय भविष्य की कामना भी . जो माता - पिता  के यादों का घना अँधेरे को दूर कर रहा था .

रात घिर आयी थी . जम्हाइयाँ ले मैं सो  गयी . मेज पर रखी घड़ी की सुइयां बारह पर आयी तो  रोज की तरह अलार्म बज उठा . जो उसने पढ़ाई करने के लिए लगाया था . तभी दरवाजे की घंटी बजी . अलसायी हुई आँखों से उठी .ी अलार्म बंद करते हुए दरवाजे को खोला तो उसकी आँखें नींद से जाग गयी .  आश्चर्य से  मेरा मुँह खुले का खुला रह गया . खुशी से उन सब सहेलियों को देखने लगी जिनके हाथों में जन्मदिन का केक , बुके , गुलाब के फूल , बहुत सारे  उपहार  और शुभकामनाओं के कार्ड थे . जिस पर लिखा था -

जीओ हजारों साल ,

जन्मदिन  बने  मिसाल ,

हमें  कभी न भुलाना ,

दोस्ती है बेमिसाल .

सभी सहलियाँ मुस्कुराती  हुई गाने लगी -

जन्मदिन मुबारक है ,

आई शुभ घड़ी है .

 तभी  परिवेश में एक मीठा स्वर और सुनाई दिया -

मंजु  के लिए हेप्पीबर्थ डे का पार्सल लन्दन से उसके माँ - पिता ने भेजा है .

हास्टल की वार्डन ने पार्सल मेरे को थमा दिया . साथ में मैंअपनी तरफ से जन्मदिन की पार्टी के साथ चाकलेट आदि दी  .

    यह सब देख के मेरी खुशी से झूम उठी . सहेलियों के प्रति , माँ - पिता , वार्डन के प्रति प्यार उमड़ आया . सब गले मिले. खुशी के आंसू उसके गालों पर लुढ़क गए  तभी मैंने  वार्डन और सहेलियों का आभार व्यक्त किया . तभी जन्म दिन मुबारक  है कि ध्वनि से स्टीरियो पर गीत बज उठा .  मैंने ऐसा महसूस किया कि जश्न में नयी सुबह शामिल हो गयी हो .

 कुछ समय  मैं अपने आप को अकेला , पराया महसूस कर रही थी . आज का शुभ दिन सबने मिलके बेमिसाल जन्मदिन बना दिया . हास्टिल की सीमाएं होती हैं . जहां खुला खर्च भी नहीं कर सकते हैं . अनुशासन होता है और अपनापन - प्यार भी . जो टूटे हुए दिल को जोड़ रहा था . 

 डा मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुम्बई

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