हे राम !
क्यों भाई ? बड़ी विचित्र बात है न कि आश्चर्य हुआ तो हे राम , दुःख विपत्ति से उबरना हो तो हे राम ,यही नहीं ...सहानुभूति प्रगट करना है तो राम राम ...अभिवादन करना है तो राम राम , अंतिम यात्रा में राम नाम ...., यानि जीवन के विविध प्रसंगों में राम समाहित है । हिन्दू धर्म में 33 कोटि क्षमा करें कोटि का अर्थ करोड़ नहीं है , कोटि यानि प्रकार ..खैर आगे बढे ...इतने देवी , देवताओं के होते राम ही हमारे जीवन में इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं ?
मुझे याद है जब छठवीं कक्षा में संस्कृत पढ़ना शुरू किये थे तो व्याकरण पढ़ते समय कक्षा में राम की कारक रचना लिखवाये थे , जो बिल्कुल भी रोचक नहीं थी, यही नहीं पानी पी पी कर रटने पर भी याद नहीं हुआ था तब छोटे काका जी ने एक श्लोक लिखवाया था हिदायत थी कि रविवार छुट्टी है याद करके शाम की पारिवारिक गोष्ठी में सुनाना है जिसे सबसे पहले याद हो जायेगा उसे इकन्नी ईनाम में मिलेगी ...धुर बचपन में ये उपरी आमदनी निहायत कम तो नहीं थी ...आनन्द , आशुतोष और मैं ..लग पड़े राम के पीछे ....चलिये उस प्रलोभनकारी श्लोक को बता ही देती हूं .....
" रामो राजमणि: सदा विजयते , रामम् रमेशं भजे ,
रामेणाभि हता निशाचर चमू , रामाय तस्मै नमः ।
रामान नास्ति परायणम् परतरम् , रामस्य दासोसम्यह्म ,
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे , हे राम ! मामुद्धर...। "
सम्भव है आज कोई शब्द गलत लिख गई होऊं ...मुख्य बात यह कि इकन्नी तो तब मिल गई थी राम शब्द की पुनरावृत्ति का रहस्य काका जी ने समझाया था कि इस श्लोक में राम की प्रथमा से सम्बोधन तक यानि आठों कारक विभक्तियों का प्रयोग है । आज समझ में आया कि शिक्षा प्राप्त करने के लिये भी राम नाम की शरण में जाना पड़ता है । वाकई इस श्लोक को समझने के बाद अन्य शब्दों की कारक रचना याद करने में बड़ी आसानी हुई ।
बड़ी बुआ सोने से पहले कॉपी में राम , राम लिखती थी , कार्तिक महीने में हम लड़कियों को सूर्योदय से पहले नहा कर तुलसी पत्ते पर चंदन या गोरोचन से राम लिखकर शालिग्राम में चढ़ाना पड़ता था अब सोचकर हंसी आती है छोटी दादी की धमकी ..." राम लिखा तुलसीपत्र नहीं चढ़ाने पर अच्छा वर नहीं मिलेगा , बूढे वर से गठबन्धन हो जायेगा । "
छोटी थी तो सोचती थी ये कैसे राम भगवान हैं भाई हर जगह हाज़िर हो जाते हैं , इनको कोई काम धाम नहीं है क्या ? बाक़ी भगवान लोग तो तीज त्यौहार में ही पूजे जाते हैं , काम पड़ने पर उन्हें याद करके हाथ जोड़ लिए छुट्टी पटी ...हे राम ! कैसे भगवान हैं आप? मित्रों ! आज भी मेरा प्रश्न अनुत्तरित ही है । ऐसा करते हैं हम सब मिलकर उत्तर खोजते हैं डरिये नहीं ...एक ही दिन में उत्तर न भी मिले तो कोई बात नहीं , प्रतिदिन प्रयास करेंगे , किसी को तो सटीक उत्तर सूझेगा , लाभ तो सबको मिलेगा ..।
चलिये मिलकर सोचते हैं ...
सरला शर्मा
क्यों भाई ? बड़ी विचित्र बात है न कि आश्चर्य हुआ तो हे राम , दुःख विपत्ति से उबरना हो तो हे राम ,यही नहीं ...सहानुभूति प्रगट करना है तो राम राम ...अभिवादन करना है तो राम राम , अंतिम यात्रा में राम नाम ...., यानि जीवन के विविध प्रसंगों में राम समाहित है । हिन्दू धर्म में 33 कोटि क्षमा करें कोटि का अर्थ करोड़ नहीं है , कोटि यानि प्रकार ..खैर आगे बढे ...इतने देवी , देवताओं के होते राम ही हमारे जीवन में इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं ?
मुझे याद है जब छठवीं कक्षा में संस्कृत पढ़ना शुरू किये थे तो व्याकरण पढ़ते समय कक्षा में राम की कारक रचना लिखवाये थे , जो बिल्कुल भी रोचक नहीं थी, यही नहीं पानी पी पी कर रटने पर भी याद नहीं हुआ था तब छोटे काका जी ने एक श्लोक लिखवाया था हिदायत थी कि रविवार छुट्टी है याद करके शाम की पारिवारिक गोष्ठी में सुनाना है जिसे सबसे पहले याद हो जायेगा उसे इकन्नी ईनाम में मिलेगी ...धुर बचपन में ये उपरी आमदनी निहायत कम तो नहीं थी ...आनन्द , आशुतोष और मैं ..लग पड़े राम के पीछे ....चलिये उस प्रलोभनकारी श्लोक को बता ही देती हूं .....
" रामो राजमणि: सदा विजयते , रामम् रमेशं भजे ,
रामेणाभि हता निशाचर चमू , रामाय तस्मै नमः ।
रामान नास्ति परायणम् परतरम् , रामस्य दासोसम्यह्म ,
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे , हे राम ! मामुद्धर...। "
सम्भव है आज कोई शब्द गलत लिख गई होऊं ...मुख्य बात यह कि इकन्नी तो तब मिल गई थी राम शब्द की पुनरावृत्ति का रहस्य काका जी ने समझाया था कि इस श्लोक में राम की प्रथमा से सम्बोधन तक यानि आठों कारक विभक्तियों का प्रयोग है । आज समझ में आया कि शिक्षा प्राप्त करने के लिये भी राम नाम की शरण में जाना पड़ता है । वाकई इस श्लोक को समझने के बाद अन्य शब्दों की कारक रचना याद करने में बड़ी आसानी हुई ।
बड़ी बुआ सोने से पहले कॉपी में राम , राम लिखती थी , कार्तिक महीने में हम लड़कियों को सूर्योदय से पहले नहा कर तुलसी पत्ते पर चंदन या गोरोचन से राम लिखकर शालिग्राम में चढ़ाना पड़ता था अब सोचकर हंसी आती है छोटी दादी की धमकी ..." राम लिखा तुलसीपत्र नहीं चढ़ाने पर अच्छा वर नहीं मिलेगा , बूढे वर से गठबन्धन हो जायेगा । "
छोटी थी तो सोचती थी ये कैसे राम भगवान हैं भाई हर जगह हाज़िर हो जाते हैं , इनको कोई काम धाम नहीं है क्या ? बाक़ी भगवान लोग तो तीज त्यौहार में ही पूजे जाते हैं , काम पड़ने पर उन्हें याद करके हाथ जोड़ लिए छुट्टी पटी ...हे राम ! कैसे भगवान हैं आप? मित्रों ! आज भी मेरा प्रश्न अनुत्तरित ही है । ऐसा करते हैं हम सब मिलकर उत्तर खोजते हैं डरिये नहीं ...एक ही दिन में उत्तर न भी मिले तो कोई बात नहीं , प्रतिदिन प्रयास करेंगे , किसी को तो सटीक उत्तर सूझेगा , लाभ तो सबको मिलेगा ..।
चलिये मिलकर सोचते हैं ...
सरला शर्मा















































