"
बचपन ,जिन्दगी की सुबह ही है,जो ऊर्जा से भरी ,खुशियों के रंग मे रंगी होती है,फिर दोपहर की तपन,वीतरागी सांझ,और अन्त रात्रि "
"क्या बात है,आज बहुत साहित्यिक हो रही हो सुधा"अमर जी ने कहा।
"हां जी ,मै पुराना अलबम देख रही हूँ ।मै 5th मे थी ।क्लास की लड़कियो के साथ फोटो है,साथ मे मेरी क्लास टीचर जौहरी बहिन जी है।बहुत अनुशासन प्रिय थी।सभी लड़कियाँ डरती थी इनसे"
"अच्छा,तुम भी डरती थी?"
"बहोत,मै सामने की बैंच मे बैठती थी,ठीक उनके सामने।वो चेयर पर बैठती,और अपना एक पैर मेरी बैंच पर टिका देती,हाथ मे स्केल एक फुट का।"
"फिर"
"फिर क्या,अंग्रेजी की टीचर थी।आवाज लगाती "राम बाई खड़ी हो,ए,बी,सी,डी बोलो । वो डरते-डरते शुरु करती"ए,बी,--सी--डी--ई,फ---जी---का सही क्रम लेते हुए आगे--यम,यन-ओ।"इतना सुनते ही बहिन जी का पारा गरम।"इधर आओ ,तुम्हारा यम यन निकाले हम "।
वो स्केल फटकारती।हम सबकी सिट्टी पिट्टी गुम"
"फिर मारा होगा उसे"
"नही,वो उसकी हथेली पकड़ कर खोलती,स्केल ऊपर उठाती,राम बाई की आँखे बंद,हम सब डरे,अब पड़ी की तब पड़ी-----सबकी प्रतिक्रिया देख वो जोर से हँस पड़ी।उसका हाथ सहलाते बोली-तुम ज़हीन हो।बस अन्ग्रेजी के अक्षर( लेटर )सही ढंग से बोलना सीखो,उन्होने हमारी उस सहेली पर विशेष ध्यान दिया।यही नही,सभी बच्चो पर,कभी डांट कर,कभी हँस कर और कभी मार कर ,
अन्ग्रेजी की अधार शिला मजबूत की"
"हाँ सुधा,जिन्दगी की सुबह मे कुछ सूरज ऐसे होते है जो हमारे जीवन मे ताऊम्र रोशनी देते है"
सुनीता मिश्रा
मौलिक

Nice🎉🎉
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