Tuesday, May 21, 2019

जन्मदिन



4- 5 साल की एक नन्ही बच्ची अपने बाबूजी को साइकिल पर ऑफिस जाते देखकर मचल गई और बोली मुझे भी आपके साथ चलना है। बाबूजी ने बहुत समझाया लेकिन वह नहीं मानी और जमीन पर धूल में लौटने लगी। अंदर से मां आई उसने भी बच्ची को बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी और तुतलाती बोली में कहने लगी,आज मेरा जन्मदिन है मुझे घूमने जाना है। बाऊजी उसी समय साइकिल टिका कर उसका हाथ पकड़कर अंदर ले गए और उसकी मां से बोले मुझे कुछ पैसे दे दो और इसे तैयार कर दो । मां ने हाथ मुंह धुलवा कर बच्ची को तैयार कर दिया तब तक बाबूजी एक  अर्जी लिख ली, फिर बाबूजी ने उस बच्ची को  साइकिल पर आगे की सीट पर बिठा लिया और अपने एक सहकर्मी के घर जाकर वह अर्जी दे दी और कहा आज मैं स्कूल नहीं आऊंगा। बाबूजी उस स्कूल में हेडमास्टर थे।
फिर बाऊजी उसे अपने मित्र की अपने की दुकान पर ले गए वहां बच्ची फिर मचल गई उसे दो फ्रॉक पसंद आए,बाबूजी का शायद इतना बजट नहीं था। उन्हें बच्ची को मना करने में थोड़ा संकोच हो रहा था तभी उनके मित्र शायद उनकी मजबूरी भांप गए थे वे बोले  ,कोई बात नहीं सर आप ले जाइए दोनों। बच्ची का जन्मदिन है एक फ्रॉक मेरी तरफ से गिफ्ट। बच्ची खुश हो गई और बाबूजी उसे घुमाते फिराते कुछ खाने की चीजें दिलवा कर वापस घर ले आए।
 मां बोली ,अरे दो - दो फ्रॉक क्यों ले आए ,मैंने भी उसके लिए एक फ्रॉक सिला  है। बाबूजी ने बिटिया के सिर पर हाथ रखते हुए कहा कोई बात नहीं बिटिया का जन्मदिन है और एक तो किशन लाल जी ने गिफ्ट कर दिया नहीं तो मैं उधार करके आता, नन्ही सी गौरैया है कुछ दिन हमारे घर रहकर उड़ जाएगी। मां ने लाड करते हुए कहा बहुत जिद्दी है ये लड़की।फिर  बाबूजी ने अपनी झोले में से कुछ खाने की चीजें निकाली बच्चे ने फुर्ती से वह सब चीजें अपने छोटे से फ्रॉक में भर कर छुपा ली  ।उसके बड़े भाई बहन भी तब तक आ चुके थे। मां  प्यार से बोली  मेरी राजा बेटी अकेली खाएगी क्या ? तेरा जन्मदिन है ना चल सब को बिस्किट और टॉफी  बांट उसकी तारीफ करती हुई बोली, अरे हमारी बिटिया तो कितनी समझदार है देखो उसका जन्मदिन है आज वह सब को खिलाएगी। बच्ची ने तुरंत उठकर भाई बहनों से चीजें बाट ली। वो समझदारी और जिद्द का भरपूर सम्मिश्रण थी।कब जिद्दी बन जाए और कब समझदार,वो ही जाने।

निवेदिता ,हां यही नाम था उस बच्ची का प्यारी सी, गोरी चिट्टी घुंघराले बाल ,छम छम पायल पहनने का बहुत शौक । साथ ही जन्मदिन मानने का भी बहुत शौक था उस और वही शौक आज तक जीवित है उसे अपना जन्मदिन साल के 365 दिन में सबसे प्यारा लगता है ।उस समय भी जन्मदिन की तैयारियां बहुत पहले से शुरू हो जाती थी और आज भी वही हाल है यह बच्ची शरीर और मन से तो बड़ी हो गई है लेकिन उसके अंदर आज भी एक छोटी सी बच्ची का दिल मचलता है। वह आज भी अपने जन्मदिन पर इतनी ही खुश होती है और आज भी दो ड्रेसेस एक साथ लाती है......।

# मेरी डायरी " निवेदिता का बचपन" के कुछ अंश
सुषमा दुबे

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