विधा कविता ।
पिता हमारी पहचान हैं ,
उनसे रोशन सारा जहाँन है ।
पिता माँ का श्रृंगार है ,
पिता उज्जवल भविष्य,
का हकदार है ।
पिता का दिल सागर समान है ।
पिता जीवन ,संबल शक्ति है ।
पिता खट्टा मीठा खारा है ,
पिता मेरा अभिमान है ।
पिता प्यार का अनुशासन है ,
पिता जन्म और दुनिया
दिखाने का एहसास है ।
पिता रक्त के दिये ,
संस्कारों की मूरत है ।
पिता रोटी कपड़ा और मकान है ।
पिता छोटे से बड़े परिन्दों
का आसमान है ।
सब यात्रा व्यर्थ है यदि
बच्चों के होते पिता अस्मर्थ है ।
खुशनसीब है जो माँ पिता
के साथ है ,
कभी न आती आँच है ,
मिलता आशीर्वाद है
जीवन होता आबाद है ।
मनोरमा जोशी ।
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