पितृदिवस
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हर पल प्रहर गुजर करके
दिन , महीनें, वर्ष हैं बने
तब पर्वों का पर्व आए
विश्व ' पितृदिवस ' कहलाए .
पितृ दिवस पर होता हर्ष
विश्व पिताओं को देती
अनंत हार्दिक बधाई
मनाते इसको हर वर्ष .
पिता पालक - जनक बनकर
जीवन को जीवन देते
शुभचिंतक , दोस्त , सखा - से
सुखों की बौछार करते .
हैं वात्सल्य स्वरूप की खान
दुखहर्ता - सुखहर्ता है नाम
बन परिवार की रक्षा ढाल
नहीं आने देते आँच .
गुरु , शिक्षक , मार्गदर्शक बन
न्यौछावर रहता तन - मन
जग का हलाहल का करके पान
तोडें दुखों की चट्टान .
दिव्य विचारों - सा सदा उर
नीति की छाया बनकर
हर कदम कर्मभूमि पर
देदीप्यमान - सा जग कर .
परमार्थ - परोपकार - से
करते सामाजिक काम
देश - प्रेम के रंग भरे
रंगते संतति का ज्ञान .
विष बाधाओं का कर संहार
बना के दुःख कंटक हार
करते जीवनक्रम सकाम
ऐसे पिता सदा महान .
मिटाते जीवन की थकान
देते मंजिल को मुकाम
हर धड़कन में उनका वास
करे ' मंजू ' उन्हें प्रणाम .
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई
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