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रिमझिम रिमझिम वर्षा का शुभसंकल्प समूह आनलाईन कार्यक्रम का आयोजन
रिमझिम रिमझिम वर्षा का शुभसंकल्प समूह आनलाईन कार्यक्रम का आयोजन
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शुभसंकल्प समूह के सदस्यो ने वर्षा ऋतु के आगमन में इंद्र देवता को ंंनमन करते हुए अपना कार्यक्रम आयोजित किया।
गर्मी की तपन में कविता,रचनाओं द्वारा वर्षा के स्वागत में एक आन्लाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया ,कार्यक्रम निर्देशक डा सुनीता श्रीवास्तव ने बताया की इस कार्यक्रम में 28 प्रतिभागियो ने भाग लिया ,कार्यक्रम सयोजकसँकल्प ,चिन्मय थे।
इस कार्यक्रम मे लता प्रसार,सविता ठ।कुर,हेमलता शर्मा ,मीना जैन,पूनम शर्मा ,मित्रा शर्मा ,मंजिरी ,वंदना दुबे,अच्ला गुप्ता,स्वाति वाड़गे,निधी,सुनीता अग्रवाल,सुषमा अग्रवाल,उषा गुप्ता,राजू चौरसिया,प्रभा जैन,स्मिता जैन सरला मेहता,नवनीत जैन,अमिता मराठे,माया बदेका,नीति अग्निहोत्री,मनोरमा जोशी ,अंजुल कंसल ,शुभा शुक्ला,सुनीता सक्सेना ,पायल परदेशी,साधना श्रीवास्तव ,डा विजय चौरे ,सुरेखा भारती ने भाग लिया।
रचनाकारों की
सहमा है समॉं
जिंदगी को मिटते देख
आइए ऐसे में
कुछ पल मुस्कुरा लें!
*लता प्रासर*
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प्रकृति की सुंदर घटा छाई,
मनोरम दृश्य है देखो भाई।।
कागज की तुम नाव बनाओ,
पानी में इसे खूब चलाओ।।
पहली बारीश का स्नान ,
दिलाए चर्म रोग से निदान।।
भीग गया तन और मन,
पानी ने एसी लगाई अगन।।
आओ उठाए मौसम का आनन्द,
भर लें मन में रोमांच और उमंग।।
*सविता ठाकुर
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सखियों का साथ अनूठा ।
तन-मन चंचल हो भीगा ।।
नैना भी चंचल हो आएं ।
रिमझिम रिमझिम वर्षा ऋतु आए ।।
*सुश्री हेमलता शर्मा
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रिमझिम बारिश और पुरानी यादों के पन्ने
उन्हें देख पढ़ रही हूँ पुरानी जिंदगी को समझ रही हूँ।मेरी
नई डायरी अपने आप को उपेक्षित अनुभव कर रही है।
मेरी भावों की कलम पुराने पन्नों पर फिर कुछ नया लिखने का सोच रही है । रिमझिम बारिश में धरती नूतन हो जाती है, मेरा भी यहीं समय है जो फिर से नूतन हो रहा है। फिर इस रिमझिम बारिश में लेख ,कविता,फैशन शो ,शुभ -संकल्प के ब्लाक आदि के माध्यम से पुनः आनन्द पा रही हूँ और अपनी डायरी में स्थान दे रही हूँ।समय तो परिवर्तित होता है पुराने को सहेजकर नया अपना रही हूँ।
*मीना जैन
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बचपन के दिन कितने प्यारे थे दामन में खुशियों के ख़ज़ाने थे
बचपन के दिन लौट आए मै अपने पापा की गोद में खेंलू
छोटे छोटे कंकड़ों को अपनी दौलत बना लूं
बचपन की बारिश में सभी गम धूल जाएं
ऐसी सुहानी बारिश का चाहत है मुझे
पूनम शर्मा
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हिलोरे मारकर बहे नाला नदी
पल्लवित हो रही है हरियाली
पत्ते , पत्ते डाली, डाली
ले रही है अंगड़ाई ।
*मित्रा शर्मा
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तुम हो बरखा सुहानी
तुम ही हो रस की रानी
तुम झूमने का मौका देतीं
नई उमंगों को मन में भरतीं
भीग गये सब गर्मी के मारे
स्वच्छ हुए हैं आज सारे
*मंजिरी पुणताम्बेकर
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बूँदों की थिरकन पर
आली, बावली-सी
गाए मल्हार के स्वर
हरियाली की चूनर
धरती नवेली ने
*वंदना दुबे*
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आंगन में झूला लगवा दो ,
गीत तीज के गाऊँगी मैं।
खनकेंगी मेरी हरी चूड़ियाँ ,
लाल चुनरिया भी दमकेगी।
बरस हुए हैं सबको देखे ,
आंखों की ज्योति चमकेगी।
*अचला गुप्ता
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बारिश भी पूरे जोश में थी पहले तो ताईं गुस्से से आग-बबूला हो गई पर जैसे ही उसने अज्जी को नाचते देखा वह भी उनके कमर में हाथ डाल कर नाचने लगी जबतक बारिश कम नहीं हुई वह भी हमारे साथ भीगती रही, जैसे ही बारिश कम हुई हम सब नीचे आ गये ,फटाफट तैयार होकर आंगन में बैठ गये ,आई ने गरमागरम पकौड़े और चाय बनाई ,अज्जी ने आई को बोला"सुनबाई जा रागी के लिए आम भी काटकर ले आ,और अचार कि कैरि उसे रात को खाने में दे देना"रागी ताई अज्जी के गले लग गई"मेरी प्यारी अज्जी तुने मेरे लिए आम बचा के रखें थे thank you "अज्जी बोली"हां,फिर मुझे तेरे मन का भ्रम जो दूर करना था बोल अब भी बोलेगी पहली बारिश अच्छी नहीं होती"रागी ताई बोली"नहीं मेरी प्यारी अज्जी बारिश में तो जादू होता है जादू"
*स्वाति वाड़गे (वनकर)
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'सारी कसर पूरी हो जाए'
रिम -झिम रिम-झिम आकर ओ फुहारों क्यूँ मुह फेर लिती हो!
बरसो बरखा रानी कहि किसान तो कहिं बच्चे आस लगाए बेठे हैं बरस जाना न तरसाना किसी की महामारी में जमिन दाव पर लगी है तो कहि बाल मन ने इस संकट काल में तुम्हे याद कर कर के जाने कितनी नोकाएँ गढ़ी हैं।
बरस जाओ बरस जाओ रिम झिम रिम झिम से धीरे-धीरे झमा झम तक पहुँच जाना जहाँ जितनी कसर हो तूम सारी पूरी कर जाना।
तन -मन -धन सब नये जोश से भर जाएँ जीतनी कसर बाकी हो सारी पूरी हो जाये।
*निधि गिरी
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जीवन में दो हमराज होते हैं
पहला दोस्त दूसरा साजन
मौसम हजार बदलते रहे,
मेरे यारो मेरे हमराज सारे जहां में दोस्ती सदाबहार बनी रहने दो,🌹🌹 उपवन है प्यार, दुलार स्नेह का, इसे गुलमोहर की तरह गुलज़ार रहने दो🌹 उम्र कितनी भी ढल जाए, यह मस्ती ये हसी ठिठोली जवां बने रहने दो,
* सुनीता अग्रवाल इंदौर स्वरचित
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भारत में मानसून का स्वागत खुशी के साथ होता है💐 धूप और उबाऊ मौसम से यह निजात दिलाता है💐💐 बारिश की ठंडी फुहार मनमीत को पुकारे,,, स्वाति पपीहा, कोयल, ठंडी बयार है ,,हर मन को चंचल कर डालें🌹
* सुषमा शुक्ला इंदौर
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गरज गरज कर मेघा गरजे
चमक चमक कर चपला चमके
धड़क धड़क दिल धड़के
रूप तेरा आँखों में चमके।।
टिप टिप करती इन बूंदों से
बनता मेरा भावी पल
तू बरसे तू धरती हरसे
महके मेरा हर दिन हर पल।
*उषा गुप्ता
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अलापों न बेसुर में रागों को राजू ,
सभी स्वर कठिन है लगेंगे न तुमसे ,
बहुत नासमझ तूँ , कसम से तूँ कम है ,
जरा सा है तूँ तो ,जरासा लिखूंगा
*गीतकार कवि राजू चौरसिया इंदौर
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रिमझीम बरसो
बस,इतना ही बरसो
आकर,वो न जाए
बादलों की ओट से
रवि भी झांक के खुश है
ऋतु मिलन रिमझिम
* :प्रभा जैन
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कृष्ण जनम
हर्षित जन मन
रक्षाबंधन।
बारिश आई
हरियाली है छाई
खुशियां लाई
* स्मिता जैन रांची
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ताल नदी झरने सब ही सूने हैं
उदास कश्ती के कानों में
शहनाई लहरों की गूंजे है
छम छमाछम वर्षा की बूंदें हैं
ओ माही अब घर आजा
हर बूंद की सिफारिश है
*सरला मेहता
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मन
झुलो की कतारें लगाई,
झूम झूम के मन को भाई,
घुमड़ घुमड़ के बदली छाई,
जीवन में उमंगे लाई,
प्यारी बरखा रानी आई।
* नवनीत जैन
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जुगनू भी शान से चमके🌏।। *गुरु की महिमा*।। 🌏
गुरु की महिमा अपार है
गुरु ज्ञान का आगार है
गुरु बिन सब अंधकार है
गुरु जीवन का आधार है ।।
गुरु से हमने ज्ञान पाया है
गुरु से संसार का व्यवहार है
गुरु बिन सब शून्य है
गुरु से जीवन में बहार है ।।
मात-पिता से जन्म पाया है
गुरु से जीवन संवर गया है
गुरु बिन सब सूना सूना है
गुरु से ये मधुबन बन गया है ।।
गुरु ने ज्ञान मार्ग दिखाया है
गुरु से ईश्वर एहसास पाया है
गुरु बिन राह भटके हुए थे
गुरु से आज मोक्ष मार्ग पाया है ।।
*डाॅ सुनील कुमार परीट*
बेलगांव कर्नाटक
मो 8867417505
प्रहरी बन ये शशी किरणें
नभ शोभा अनोखी होऐं
सीख है आओ मुस्कराऐं
गीले शिकवे यें धूल जाएं
प्रेम से अबगले मिल जाएं
*अमिता मराठे
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मन की बात, सजन सुन न पाये।
पल पल विरहन, मिलन को तरसे।
सखी की ठीठोली, अगन को बढाये।
कानों में कैसी, किसकी फुसफुसाहट।
बिजली भी ,रह रह कर चमकती
*माया बदेका
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आया मौसम पिया संदेशा ले कर
मन का पत्ता-पत्ता भी हरष रहा
दिलों ने ली एक मीठी अंगड़ाई ।
झूलों ने बतियाँ बनाई हंस ॒हंस कर
ऊंची ॒ऊंची पेंगों का आनंद ले रहे
गोरी की प्यारी सूरत निरख कर
रंगबिरंगी चूड़ियों के स्वर गूंज रहे
नैनों में प्यारे सपने सजा कर
कच् हरा आंचल धरती ने फहराई
* नीति अग्निहोत्री
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दृग मे सजे ,
प्रीत पर छाया मधुमास रे
मन मे उमड़ी आस रे ।
भीगा तन भीगा मन ,
बैठ पिया पास रे ,
रिमझिम फुहार पड़ी ,
अंगना मे आज रे ।
* मनोरमा जोशी ।
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गुलमोहर के झूमर,अमलतास का आंचल
बंसी बजाए कांहा,राधा मुस्काए उपवन
छमछम करके ये,गीत सुना जा रे
बरखा- - -
*डां अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
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गरज गरज के मेघा बरसे पिया मिलन को मन ये तरसे
शीतल ठंडी चले पुरवाई
पिहू पिहू पपीहा गाय ------रिमझिम रिमझी
*शुभा शुक्ला निशा
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पुरानी बचपन कीयादें पानी बाबा आजा ककड़ी भुट्टे लेजा स्कूल जातेथे स्कूल के आगे बेर जामुन भुट्टे इमलीवाली बेढती थीदस पेसे में हम जामुन ख़रीदते थे पानी में जामुन खाने में मज़ा आता थाफिरऐक दिन स्कूल से आतेआते बारीश हुई हम घर आये वबस्ता पट्टीफ़ेक कर उपर छत पर गई भाई बहनो कोआवाज़ दींओरसब हम छत पर रीमझिम बरसात में कूदते कुदते मस्ती करते हुए गाते पानी बाबा आजा ककड़ी भुट्टा लेजा बड़ा मजा आता जब हम ज़ोर ज़ोर सेगाते पानी में नाचते वो बचपन के दिन याद आते हे आज भीयाद हे जब रीम झीम बारसात आती हेक्याबचपन थावो दिन कभी नही भूल सकते हे यह क़हांवत आज भी सबको याद हे की पानी बाबा आजा ककड़ी भुट्टा लेजा
*किरण जिरेती इन्दोर
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हे अंधेरे बहुत तुम सितारा बनो
डूबते के लिए तुम किनारा बनो
इस जमाने में है बेसहारा बहुत
तुम सहारे ना लो बस सहारा
* सुनीता सक्सेना
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