Sunday, June 21, 2020

पिताश्री और में

लघुकथा

पापा
कोरेना का कहर बढता ही जारहा नीरज मरीजों को  सभाल रहा घर आने तक का टाइम नहीं है। नन्ही शालु रोज दरवाजे पर खडी होकर अपने पापा का रास्ता देखती है आठ दिन हो गये घर आये नीलू भी चिन्ता करती हैं और हो भी क्यों ना सभी लोग अपने घरों मे और उसका पति एसी स्थिति में साथ नहीं तभी फोन बजा की  नीरज ने कहाँ नीलू मे आरहा हू पर 10 मिनट के लिए बस तुम्हें और शालू को देखने गेट की आवाज सुन शालु दौडी पापा आ गये वो पापा की बाहोँ मे जाना चाहती थी पर पापा ने वहीं रोक दिया नहीं बेटा अभी नहीं ,नीलू आँखें भर आई ये कैसा समय आया पास होकर भी दूर शालू पापा के लिए रोती है।शालू दूर खडी अपने पापा को देख रही थीं । मम्मी पापा कब घर आयेगे नीलू के पास कोई जवाब नहीं था।
की वो मासूम को दे सके


*चारूमित्रा नागर

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