=====
शुध्दविकल्प
सकल
जल नभ भूतल
शुभ है फल
धरती माई
हो स्वच्छता सफाई
होगी भलाई
धरा वीरान
बनाया कूड़ादान
ढूंढो निदान
हर्षित मन
सुरभित चमन
सुखागमन
पर्यावरण
सम्पूर्ण शुद्धिकरण
वृक्षारोपण
जल अवश्य
प्रदूषण नगण्य
बदला दृश्य
हे जगदीश
सबको दो आशीष
नत हैं शीश
शुभ संकल्प
नहीं कोई विकल्प
हमें है दर्प
आधार शिला
न शिकवा न गिला
पाए ये सिला
नव योजना
पूर्ण परिकल्पना
यही प्रार्थना
*सरला मेहता
==================================================================================
=================================================================================
--------
प्रदूषण का रण
------------
करो हरण
प्रदूषण का रण
जिंदगी हँसे
हँसे नयन
हरा पर्यावरण
रखें ये प्रण
पर्यावरण
नहीं हो प्रदूषण
हो निवारण
ले ले शरण
बचा पर्यावरण
धरा सृजन
पर्यावरण
न बढ़े प्रदूषण
कोई कारण
पानी सहेजो
करना संरक्षण
पर्यावरण
पर्यावरण
जीवन को बचाएँ
पेड़ लगाएँ
*उषा गुप्ता
==================================================================================
-----------
शब्द चंचल
मन की है वेदना
कही न जाये
कोरा कागज
सूख गई स्याही
आँसू छलके
मनवा डोले
लिख लिख के पाती
पिया नादान
सुन्दर नारी
सजने को आतुर
याद में खोई
बंजारे शब्द
उलझा हे जीवन
बना फसाना
क्या लिखू मैं
दिल में नही धीर
मन उदास
मेह बरसा
मनवा है तरसा
पिया विदेश
बदली छाई
अवनी मुसकाई
प्यास है बुझी
नैनो में नीर
बिरहन की पीर
कोई न जाने
बादल छाया
मनको नही भाया
तन अधीर
*मधु टाक
================================================================================
-------
आकाश गंगा
इन्द्रधनुषी रंग
भीगा चमन।
छंटे बादल
बरसे बदरिया
भीगे चमन।
कोयल की कूक
गुजंता है कानो में
घुलता रस।
नीला आकाश
चमन उजियारा
धरती का गोद।
प्रकृति मां की
मत करो दोहन
मन ब्यथित
संवारना है
ईश्वर की देन को
पर्यावरण को।
🌺🌺
अपनी माटी
वीरों का बलिदान
देश की शान ।।
गली कूचे में
तैनात है जवान
सुरक्षा ध्यान ।।
लाज बचाने
उठो धारण करो
चोला महान ।।
सपूत बन
देना उदहारण
वीर जवान ।।
करो उत्थान
शूरवीर महान
जगाओ जहां ।।
*मित्रा शर्मा
==============================================================================
______
पर्यावरण
देते हैं शुद्ध वायु
देते जीवन
है हरियाली
खुशबू है महके
उपवन में
स्वस्थ रखते
देते हैं खुशहाली
निरोगी काया
पवन चले
महके पुरवैया
फैली खुशबू
कोयल कूके
होकर मतवाली
डाली से डाली
वृक्ष लगाएं
जीवन को बचाएं
अन्न ,जल से
*श्रीमती शोभा रानी तिवारी
===================================================================================
------
अपना देश
सबसे प्यारा है
देश की धरती
सीमा पर है
हर दम पहरा
जान की बाजी
हुए हैं वीर
शहीद धरा पर
क्या दोगे तुम ह़ो
उनके खुन
की कीमत क्या है
ये क्या समझो
*चारूमित्रा
===================================================================================
------
मोह गागर
प्रेम बिपाशा चाह
बहती रहे।
मन सरगम
बनी प्रीत की डोर
निभाते रहें।
नेह के मोती
छलका दो आंगन
निः शब्द रहें।
कोयल बोल
गूंज रहे कानन
सुनते रहें।
मधुमास सा
है पावन उद्गार
क
*मधु वैष्णव "मान्या"
===================================================================================
------
प्रदूषण - कोढ़
वृक्ष लगाके मिटा
हे धरा पुत्र ।
भू , आँगन को
हरा - भरा रखते
पेड़ों का जग ।
वन काट के
बुलाता प्रलय को
नर जग में ।
पेड़ लगाके
ग्लोबल वार्मिंग से
धरा बचाओ ।
आबादी बढ़ी
प्रकृति का दोहन
इंसान करे ।
सिसका वन
समुद्र , नदी सिकुड़ी
घायल धरा ।
स्वार्थी लालसा
नभ पर गढ़ती
हीरे की राह ।
जिस वृक्ष की
छाँह में नर बैठे
उसी को काटा ।
वृक्ष प्रजाति
अजायबघर में
देखेगा जग ।
विषैला धुआँ
साँसें घोट के छीने
जीवन प्यारा ।
कान का पर्दा
लाउडस्पीकर का
शोर है फाड़े ।
ओजोन पर्त
प्रदूषण से जख्मी
ताप बढ़ाए ।
भू -जल - नभ
गंदा कर बुलाता
दैवीय कोपल
प्रकृति हुयी
लॉकडाउन में
पुनर्जीवित ।
कोरोना से
बुरा , विषैला नर
वायरस है ।
*डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई ।
=================================================================================
जीवन धन
_________
तुतली बोली
आँखों में शरारत
बुद्धि भोली
घर मिट्टी का
सारा जहान हुआ
पुलकित हुए
पत्तों में खाना
अंजुरी पानी पीना
प्रमुदित हैं
फूलों के सिक्के
अख़बार के नोट
अमीर हुए
नन्हों संग
है आल्हादित मन
जीवन धन !!!!
*मधूलिका सक्सेना*
==================================================
कोरोना/लाकडाउन
-------
सत्य को जान
महामारी का ज्ञान
बचा जीवन
कोरोना डर
हर गांव नगर
बैठे है घर
दर बदर
बेचारे मजदूर
घर से दुर
बगैर मास्क
न निकल बाहर
सजा पाएगा
धैर्य रखना
नव जीवन मन्त्र
सफल होगा
मिल जाएगा
इंतजार तो कर
अपना साथ
मध्यम वर्ग
जीवन का सफर
दर्द ही दर्द
खर्चिली शादी
लाकडाउन दौर
किधर होगी
आज के नेता
बिन पैसे का काम
करते कहाँ
अपार प्यार
संयुक्त परिवार
दुखो से दुर
कन्या का जन्म
लक्ष्मी का अवतार
जीवन धन्य
रचनाकार :-सुरेन्द्र पहारे "सबरस"
खंडवा मध्यप्रदेश मोबाइल
=========================================
माँ-बेटी
-----
बचपन की
सारी यादें दिल में
मेरे समायी ।
बड़े लाड से
पाला कह कर कि
तू पराई है।
संस्कार मुझ
को देकर वो सारे
सिखाया जीना।
जिस आंचल
में बड़े हो आ गया
बिन रहना।
इंतजार में
बीत जाता महीना
गर्मी आने के
तेरे हाथ का
बना है खाना याद
ससुराल में।
जब बिटिया
ससुराल से आती
ख़ुश हो जाती।
बिटिया माँ से
मिलती मायके में
सब भूल के।
*मीना जैन भोपाल (स्वरचित)
======================================================================
कोयल गान
______
१कोयल गाए
अंबुआ की डार पे
बौर हैं आए ।
२ मुस्काते रहो
जीवन अनमोल
व्यर्थ ना बीते।
३ तुम जो मिले
आंखें सब कहतीं
होंठ ना हिले।
४ बासंती हवा
क्यों ऐसे बहकाए
क्यों तडपाए ।
५ नया सवेरा
कही पंछी चहका
ओस का डेरा।
६ पुष्प खिलते
देख मन खिलते
गीत रचते।
७ संगीत बजा
कौन मन के द्वारे
दिल है सजा।
८ सोचे जाने क्या
ये बावरा मन तो
पंख नहीं हैं ।
९छवि नैनों में
बसी प्यारे श्याम की
दिल वहीं है।
१० ॠतु सावन
तरसे विरहन
रहा ना जाए।
११ प्रीत मिलती
मन हरा हो जाता
प्यास बुझती ।
*नीति अग्निहोत्री
५७ साईं विहार
=====================================================
हाइकू
🌺🌺
"संवार लो"
-------
आकाश गंगा
इन्द्रधनुषी रंग
भीगा चमन।
छंटे बादल
बरसे बदरिया
भीगे चमन।
कोयल कि कूक
गुजंता है कानो में
घुलता रस।
नीला आकाश
चमन उजियारा
धरती का गोद।
प्रकृति मां की
मत करो दोहन
मन ब्यथित
संवारना है
ईश्वर की देन को
पर्यावरण को।
🌺🌺
*मित्रा शर्मा
================================================================================
उम्मीद
-----‐
दूरिया सही
सुरक्षा तो रहेगी
फ़िक्र कैसी है?
वक़्त बेवक़्त
इम्तहान लीजिये
याद आते हो।
रब तेरा भी
मेरा भी फरियाद
साथ करेंगे ।
भरोसा रख
तूफान है बेशक
टिकेगा नही।
उम्मीद पर
दुनिया कायम है
उम्मीद रख।
*कविता सक्सेना शुजालपुर
========================================================
परिवार
------
समूह नहीं,
ये तो परिवार है,
सबका साथ।
सुविधा नहीं,
व्यवस्था आधार,
जीना साकार।
नादान नहीं,
समझदार तो हैं,
सुलझे रहें।
दुर्बल नहीं,
भरोसा ही होता है,
संबल बल।
आग्रह नहीं,
आदर दिखलाओ,
अधिकार है।
संपर्क नहीं,
संबंध को निभाओ,
प्रेम बरसे।
अर्पण नहीं,
समर्पण में ही है,
भावना दान।
अहंकारी है,
क्षमा का दान करो,
इंसान बनो।
अंधकार नहीं,
ज्ञान का भंडार,
शिक्षित बनो।
स्वरचित
* सविता ठाकुर
(रघुवंशी)
==============================================================================जंग
जंग जीत
------
जिंदगी ढली
रेत बंद मुट्ठी से
जैसे फिसली
जीवन का
क्षण बहुमूल्य
कीमत समझो
आत्मविश्वास
अपनो का साथ
जंग में जीत
आत्मविश्वास
हौंसलो की उड़ान
हुये सफल
शिकवे न हों
मिलती जींदगी एक
हंसते रहें
प्राप्त हमें
होता वही अपना
बाकी सपना
दिल की नेकी
आंखें कह देती हैं
एक विश्वास
कोरोना रोग
है ऐसा वायरस
नहीं निदान
आपदा आयी
घर में रहना ही
सिर्फ उपाय
संकट भारी
लाईलाज बीमारी
रहें घर में
बदल गया
ज़िंदगी का तरीका
कोरंटाईन
जब भी मिलें
दूरी बनाये रखें
हाथ जोड़ लें
फसल कटी
बिक नहीं रही है
किसान दुखी
संसार दुखी
आयी आपदा ऐसी
जीवन थमा
नवतपा में
सूरज की तपन
बरसे आग
चलते रहे
प्यास बुझती रही
प्याऊ जो मिले
* कुमुद दुबे
इन्दौर (म०प्र०)
==========================================================================
भौर वंदना
---------
शुभ भोर का
करते है वंदन,
हो अभिनन्दन
नई सुबह
संदेशा ले आई,
उमंग भरी।
खुशियां लाई,
झूम उठा गगन,
नाचे है मोर,
खुशबू फैली
कलियां खिल उठी
लालिमा छाई,
डोले मनवा,
झूम उठी बगिया
मन हर्षाए,
सुप्रभात का
करते है स्वागत
कोटि नमन,,,,,,,,,,,,,,,
* नवनीत जैन
===========================================================================मैं हूँ समय
समय
-------
मैं हूँ समय
आदित्य बारह है
बारह बजे है।
मैं हूँ समय
ब्रह्म तो एक ही है
एक बजे है।
मैं हूँ समय
अश्विनकुमार हूँ
दो बजे है।
मैं हूँ समय
सतो रजो तमो है
तीन बजे है।
मैं हूँ समय
चतुर्वेद हूँ मैं
चार बजे है।
मैं हूँ समय
पंचप्राणा प्राण हूँ
पाँच बजे है।
मैं हूँ समय
षड्स रस हूँ मैं
छह बजे हैं।
मैं हूँ समय
सप्तर्षि हम सब
सात बजे है।
मैं हूँ समय
अष्टसिद्धियाँ हूँ मैं
आठ बजे है।
मैं हूँ समय
नव निधियाँ हूँ मैं
नो बजे हैं ।
मैं हूँ समय
दशदिशाएँ हूँ मैं
दश बजे है।
मैं हूँ समय
रुद्रा हम ग्यारह
ग्यारह बजे।
*मीना जैन भोपाल (स्वरचित)
=============================================================
गुरु
---------
गुरु के बिना
ज्ञान का महत्व
फिर भटको ।
दुनिया से जो
अच्छा इंसान हमे
धक्के खाओ ।
नही आसान
कमियों को बताना
तो पछताओ ।
हीरे तराश
इंसानियत सिखाता
ठोकरे खाता ।
धनवान है
जिसके पास गुरु
अच्छा इंसान ।
सच्चा मार्ग
मुश्किलों से लड़कर
आगे बढ़ जा ।
*स्वरचित द्वारा*⤵️
*संजय कुमार मालवी (आदर्श)*
============================================================================सच
सच्चा मोती
-------
फ़िज़ा रंगीन
बहारों का मौसम
क्यों ग़मगीन ?
महका गजरा
रुख़ पर बिखरीं
ज़ुल्फ़ें बदरा
सच्चा मोती है
ममता की मूरत
माता होती है
प्यारे सपने
साथ में हरपल
देखे हमने
था इंतजार
बाद पतझड़ के
आई बहार
नम है नैन
बिन दिलबर के
रूह बेचैन
खोखले रिश्ते
ज़ख़्म ही हरदम
दिल को देते
◆ रश्मि सक्सेना ◆
इंदौर
==================================================================
नेत्र दान
---------
नेत्र दान से
अमर दान कर
उजाला बनें
भाव भरें हैं
स्नेह सुकून नैन
समझे मोल
नेत्र सुरक्षा
जीते जी हर पल
नेत्र दान हेतु
अंधेरे नैन
को ज्योति दान कर
उजाला बनें
अमर दान
नेत्र दान का प्रण
बांटे खुशियां👀👁️
*प्रभा जैन
============================================================================/
जीवन
-----------
जीवन जीना
सिखाया प्रकृति ने
हरियाली ने
निर्मल जल
स्वच्छ और शीतल
नैसर्गिक है
वायु है प्राण
कण-कण समाई
तभी है श्वांस
ओढ़ दुशाला
नीले आसमान का
सितारों भरा
न रहे कोई
भूखा व निराश्रित
धरती संग
अग्नि प्रकाश
उजास जग सारा
उपयोगी है
*श्रुति चौधरी 'सृजन'
==============================================================================
*मां तुम मेरी:**
--------------
मां तुम मेरी,
आंचल से बिखेरे,
छांव घनेरी।
हे अनमोल,
मां ममत्व तुम्हारा,
सबसे प्यारा।
थका में आता,
तेरी गोदी में सोता,
स्वप्न में खोता।
मुझे जो भाता,
बस वही बनाती,
मुझे खिलाती।
नखरे मेरे,
सर आंखों पे लेती,
पूरे करती।
ओ मां कहता,
ठोकर जब खाता,
तुझे बुलाता।
लोरी सुनाती,
खुशबू आंचल की,
मुझे सुलाती।
छाया उसकी,
मैं उसकी दुनिया,
यह कहती।
भूल भुलाती,
नजर उतारती,
लगती देवी।
गुस्सा हो जाती,
झूठ मुठ डांटती,
दवा लगाती।
सरस्वती सी,
देती अक्षर ज्ञान,
पाता सम्मान।
तुझसे रिश्ता,
हर जन्म में पाऊं,
साथ निभाऊं।
तू ही ईश्वर,
चरणों में वंदन,
अभिनंदन।
**डॉ विजय आर चौरे, प्राध्यापक*
==============================================================
दर्द गुबार
----------
न कुरेद
ये जख्म यूं,
तेरा अक्श
नज़र आ जाएगा।
जो दबा रखा था
मैंने,
आंसू का कतरा
नज़र आ जाएगा।
जी लेता हूं
तेरी यादों की गर्मी में,
अन्दर झांका जो तूने
दर्द का गुबार
नज़र आ जाएगा।
आजाद कर दिया था तुझे
मेरे एहसासों की
कब्र से,
न खोद ज़मीन को अब
मेरी मोहब्बत का
मकबरा नज़र आ जाएगा।
अभी तो
चलती हैं सांसें
जानें किस ख्याल में,
तूने जो
उधेड़ी परतें तो
कब्र गाह
नज़र आ जाएगा।
मिटा चुका हूं
तेरी जुश्त जुं,
तेरी तकरीर को,
न पलट पन्ने तू
लफ्जों का
कफ़न
नज़र आ जाएगा।
अब तो छूट जाने दे
जिन्दगी का दामन,
कुछ देर
और जिया तो
दफ़न
तेरी मूरत का
टुकड़ा
नज़र आ जाएगा।
*अजय "आवारा"
==========================================================================
हरियाली न हरो
-----
----------
1) सजने दो फुलवारियाँ
महकतीं हवाएं
नैसर्ग को बचाएं
2) रोको ये चलन
वृक्ष दहन
छा जाएगा अमन
3)हरियाली ना हरो
नीले तले
धरती बने बंजर
4)धरा हमारी माता
हमारा इससे नाता
दूजा ना कोई भाता
5)सुंदर वन उपवन
लिपटी लताकुंज
विचरती स्वछंद
6)पृथ्वी का आवरण
ना करो हरण
करो वृक्षा रोपण
*मंजिरी पुणताम्बेकर
=======================================================================इंद्रधनुष इन्द्रधनुष
.इन्द्रधनुष
---------
बौराया आम
कुहुकती कोयल
ताप विराम।
इन्द्रधनुष
रिमझिम सावन
खिला जीवन
बेला फूला
महकी रातरानी
पानी रे पानी।
मुक्त गगन
बहती पुरवाई
धरा नमन
दादुर बोले
भरे ताल तलैया
बरखा डोले।
हरित भूमि
झूमा मन आँगन
धन्य गगन।
नीम निंबौरी
जामुन संग फूली
भेद सखी री।
तपते मन
निर्माही ये अगन
प्रकृति संग।
*डाॅ संगीता पाठक 'सहज'
==============================================================
पेड़ लगाओ
--------
बदरा आते
रिमझिम बरसे
शोर मचाए।।
कोयल गाए
सावन मन भाए
बीरन आए।।
लाक डाउन
पर्यावरण साफ
लगाओ मास्क।।
पेड़ लगाओ
हरियाली बचाओ
अमृत बांटो।।
*डॉ सुधा चौहान राज
==============================================================================
बादल
------
काले बादल
उमड़ घुमड़ के
बरसा पानी ।
ताल तलैया
छलके भर भर
याद तुम्हारी ।
भीगा मौसम
लहर उठ रही
सूने नयना ।
बिजली कौंधी
कूप लबालब
नाच मयूरा ।
दूर पिया से
वन वन फिरती
भीगे नयना ।
बाग बगीचा
हरियाली चूनर
धरा सुहानी।
*रचना:-श्रीमती प्रमिला सक्सेना*
=================================================================फ़
फरमाईश
------
माँ सरस्वती
सदा कर वास
तू मेरे निवासl
फरमाइश
हमेशा बुरी हो ही
जरूरी नहीं ।
ह्रदय हीन
मानव का समाज
जंगलराज।
बात ही नहीं
काम भी दमदार
होना चाहिए ।
दुर्वा सी तुम
दबती हो कल भी
और आज भीl
ना काटो वृक्ष
बेरहमी रुख से
देंगे जीवनl
माया तुम्हारे
कितने रूप रंग
एक से नहींl
चारों तरफ
फैली है महामारी
विपदा भारीl
घर में रहो
कोरोना का कहर
फैला जहरl
*डा. नंदिनी जोशी
==============================================================================
*"मेरी बहना"*
मेरी बहना,
संग में ही रहना ,
माने कहना।
छोटी बहना,
सुख दुःख दोनों में ,
संग रहना ।
चुलबुली सी ,
कभी रूठ जाती है,
कभी लुभाती।
बिछड़े हम ,
वो ससुराल चली ,
गांव में बसी।
छुटा बंधन ,
परछाई है मेरी ,
सबकी प्यारी।
मिल जाने से,
खुशियाँ है मिलती ,
देती है साथ।
माया मोह में ,
विदाई के बाद में ,
उदास मन।
*शशिकला व्यास*
===================================================================================
जीवन
-----
जीवन पथ
बड़ा मुश्किल
बेखबर है।
चारों ओर है
असमंजस भरा
वातावरण ।
मंदिर बंद
ईश्वर रूठा
बदला माहौल।
अन्याय बड़ा
पाप का बोझ बड़ा
सोच बदल ।
समय पलटा
शान्ति भरपूर
और सुकून ।।
*प्रेरणा सेन्द्रे (म. प्र. )
===================================================================================
नव पल्लव
-------
1- कूकने लगी
रसाल तरु पर
कोयल फिर
2- मेहित हुआ
अपने नृत्य पर
मोर पागल
3- नव पल्लव
ललछौंहे कोमल
आया बसंत
4- भीनी महक
फैली फिर सर्वत्र
करे उन्मत्त
5- बौराये तरु
मन भरमाते हैं
लालसा जगा
6- रसना फिर
माँग रही है वही
अाम चटनी
7- नहातीं फिर
चिड़ियाँ चीं चीं कर
मन लुभातीं
8- मेरे घर में
लहलहाती लता
बाहें पसार
9- ठंडी बयार
बादल घनघोर
आई है वर्षा
10 - यादों की भीड़
पगलाया सा मन
पंख पसार
*डॉ. आभा माथुर*
========================================================================
आ
=============================================================================
*पुस्तकें*
-----------
मार्ग दर्शक
पथ-पथ पर है
ज्ञान भंडार।।
****
गीता की वाणी
ऋषियों की कहानी
हमने जानी।।
****
जगत गुरु
पुस्तकें है हमारी
अनमोल सी।।
***
साथ रहती
वचन निभाकर
राह दिखाती।।
***
पुस्तकें साथ
तो मनका विश्वास
हमेशा साथ।।
***
हम सबके
साथ में रहकर
मित्र हो जाती।।
****
*भारत*
- -------
भारत प्यारा
जय जय का नारा
देश हमारा।।
***
तिरंगा ऊंचा
रहे आसमान में
मस्तक ऊंचा।।
***
विश्व शांति
अमन की ज्योति से
विश्व क्रांति।।
***
मेरा वतन
वीरों का गुलशन
ना हो पतन।।
***
अमर ज्योति
बलिदानों के मोती
अमन शान्ति।।
***
वीरों की धरा
अंबर का उजाला
देश हमारा।।
***
हक अपना
महक आजादी की
सजा सपना।।
***
आंगन होली
माथे पर हैं रोली
सीने में गोली।।
***
देश हमारा
जयघोष का नारा
भारत प्यारा।।
***
आजादी शान
मेरा देश महान
ये हिंदुस्तान।।
*बेटी*
-----------
तुम आंगन
जीवन में उमंग
खिलता मन।।
***
प्रेम अपार
ममता का संसार
घर की बहार।।
***
पिता की आन
ससुराल का मान
बेटी महान।।
***
सुंदर काया
परिवार की छाया
बच्चों की माया।।
***
पीड़ा सहती
मरहम बनती
उम्मीद देती।।
***
प्यारा सागर
सुखों का सरोवर
उसके घर।।
***
कोमल तन
खिलता चितवन
उदार मन।।
***
रूप अनेक
विविधता अनेक
मन की नेक।।
***
बेटी हमारी
खिलती फुलवारी
सबकी प्यारी।।
***
उसके संग
त्योहारों के रंग
खुशियों संग।।
***
मन में पीर
रूढ़ियों की जंजीर
खिलाती खीर।।
***
बेटियां पढ़े
हमेशा आगे बढ़े
समृद्धि पले।।
*कोरोना*
-------------
देश के वीर
सेवा करे अपार
बड़ा आधार।।
ऐसे क्षण में
भगवान रूप में
रण भूमि में।।
हो समर्पित
किया सब अर्पण
जीवन क्षण।।
शत नमन
जननी योगेश्वर
नमन धीर।।
साथ मिलेंगे
प्रजा एकता संग
कोरोना भागे।।
संकल्प करें
मिलकर भगाए
घर में रहें।।
*सुबह*
---------
प्रातः वंदन
खुशियों का प्रारंभ
खिला सुमन।।
***
सूर्य किरण
आशा उमंग प्रेम
जगाए मन।।
***
गीत सुनाते
कलरव गुंजन
पक्षी महके।।
***
आराधना हो
भक्ति पूजा मन
विश्वास रखो।।
***
चलते रहो
संघर्ष ही जीवन
प्रयत्न करो।।
***
जीवन उमंग
खुशियां रहे संग
हंसता मन।।
***
घड़ी चलती
कष्ट वह सहती
आगे बढ़ती।।
***
सांझ की बेला
खुशियों का मौसम
हर आंगन।।
****
*सावन*
----------
शिव का वार
सावन सोमवार
कृपा अपार।।
***
सावन आया
बादल बन छाया
मन हर्षाया।।
***
सावन आते
झूमते उमड़ते
बादल आते।।
***
भाई बहन
प्यार भरा बंधन
रक्षा बंधन।।
***
खुशियां लाया
सावन का त्योहार
फिर से आया।।
***
महकी कली
महका गुलशन
कोयल कूकी।।
***
बरसा पानी
रिमझिम फुहार
बरखा रानी।।
***
ऋतु मिलन
मौसम का आगमन
महका मन।।
***
हुआ श्रंगार
हरी सी वसुंधरा
खिली बहार।।
***
*स्वच्छता*
-----------
मन निर्मल
चितवन निर्मल
घर निर्मल।।
***
प्रयास करें
साफ रहे शहर
कुछ तो करें।।
***
हम हैं शक्ति
संगठन में शक्ति
देश की भक्ति।।
***
गांव शहर
सदा हरा भरा हो
सुख से घर।।
***
द्वेष त्याग दो
अपनापन बांटो
संस्कारी बनो।।
***
सुख समृद्धि
हम फिर से लाए
ज्ञान में वृद्धि।।
***
स्वच्छ बनाएं
स्वदेशी अपनाएं
देश बचाएं।।
***
जय भारत
जय भारत माता
जय भारत।।
***
*वसन्त*
-------
मौसम आया
मन गुनगुनायां
वसंत आया।।
***
मोर नाचता
पंख पसारे आता
बरखा लाता।।
***
कोयल कूकी
लेके मधुर तान
फिजा महकी।।
***
घिरा गगन
मदहोश पवन
खिला चमन।।
***
सांझ की बेला
चह-चहाते पक्षी
हो अलबेला।।
***
नदी हिलोर
कल-कल का शोर
नाचता मोर।।
**
तुम्हारी याद
बिरहन सी होली
जाने के बाद।।
***
तपता मन
सूना-सूना आँगन
अकेला पन।।
***
जीवन त्रास
इंतजार की आस
मन उदास।।
***
दर्द सहते
अकेले ही रहते
रहे मरते।।
***
कब आओगे
पीर उठी मन में
मरा पाओगे।।
***
लहरें उठी
रूह वेग से भरी
कसक उठी।।
***
रूठा अपना
बिखरे अरमान
टूटा सपना।।
***
*होली*
--------
रँगी बहार
खुशीयों की बहार
होली त्योहार।।
***
प्रेम मिलन
स्नेह की फुहार
अबीर लाल।।
***
राधा किशन
सखियों की टोली
आँख मिचौली।।
***
रंगीन हुई
प्रकृति चहुँओर।
छटा निराली।।
***
आकाश नीला
बाजे ढोल मंजीरा
समा रंगीला।।
***
रंगों के संग
पिलो प्रेम की भंग
होके मलन्द।।
***
फागुन संग
जीवन मे उमंग
सपनों संग।।
***
होली है भाई
समरसता के संग
खेलो ये रंग।।
***
*वन्दना पुणतांबेकर
==========================================================================
पाव छाले
----------
पाँव में छाले
पसीना लथपथ
ये मजदूर।
कार में बैठे
एसी की हवा भी है
ये धनवान !
क्यों अंतर
है इंसानों के बीच
है भगवान !
*शेलेष वाणी
================================================================================
कोरोना
---------
प्रकृति हमे
बताना चाहती है
कुछ समझ
अनकही कुछ है
विपरीत है
तेरी मेरी सोच से
सम्हल जा तू
विनाषक, कायर
स्वार्थी हे तू
बदल के रख दे
सारा संसार
जब भी वह चाहे
बदला रूप
खिला खिला स्वरु
×××××××××××××××
1-प्रकृति हमे
बताना चाहती है
कुछ समझ
2- विपरीत है
तेरी मेरी सोच से
विनाषक है
3- विपरीत है
तेरी मेरी सोच से
सम्हल जा तू
4- स्वार्थी हे तू
विनाषक, कायर
अनेक रुप
5- बदला रूप
खिला खिला स्वरूप
सम्हल जा तू
6- सारा संसार
बदल के रख दे
वह चाहे तो
* वसुंधरा पांडे
===================================================================================
[
करोना फैला
फैलते गए हम
अब क्या करें ?
घर में बंद
कदम कम चले
कपडे फंसे ।
खाते रहना
दोपहर का सोना
मोटापा बढ़ा ।
मिलना बंद
टहलना भी बंद
वजन बढ़ा ।
घर में बंद
धूप नहीं मिलती
रंग निखरा ।
दूर ही बैठो
दूरदर्शन देखो
अजीब योग ।
घर चमका
कोई भी नहीं आया
क्या फायदा ?
यहाँ से वहाँ
दिनभर घूमना
अब तो नहीं ।
शाॅपिंग नहीं
किटी पार्टी भी नहीं
अब क्या करें ?
×××××××××××
आया करोना
कहते हैं डरोना
बेंडा करोना ।
उलटे काम
सब है उल्टा पुल्टा
कैसा आराम ।
ठंड में ऊन
लेकर किया काम
गरमी में क्या ?
निकाली ऊन
की थोड़ी सी बुनाई
पसीना आया ।
बोले पगली
यह तू बेवक्त की
रागिनी छोड़ ।
पगला गई
नहीं है तो और क्या
फेंक दो ऊन ।
चश्मा उतार
देखा एक नजर
फिकर दिखी ।
अजी सुनो तो
हूँ बहुत बेजार
पगली नहीं ।
समय कटे
कुछ रचनात्मक
यही वजह ।
आई मुस्कान
ली सुकून की सांस
रौनक लौटी ।
मिली राहत
शक रफू चक्कर
मैं भी प्रसन्न ।
××××××
फैला कोरोना
घर पर रहना
खुश रहना ।
घर हमारा
बना तारण हार
समझ आया ।
दूर रहना
बस एक ही गज
खुद बचना ।
गरम पानी
दिन भर ही पीना
दवा मिलेना ।
घर कवच
खुशियों की बौछार
मिलेना कहीं ।
आरोग्य सेतू
देता रहे खबर
बचे रहना ।
* सौ.राधिका इंगळे
=====================================================================
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
किसान
-----
रोता किसान
दे के उचित मूल्य
बचाये प्राण ।।1।।
बढ़ता पारा
धरती माता रोये
कौन सहारा ? ।।2।।
सूर्य हमारा
फैले जब धरा पे
ढलता तारा ।।3।।
घटाएं छाई
मन मयूर नाचे
धरा मुस्काई ।।4।।
विपदा आई
कॅरोना महामारी
जग पे छाई ।।5।।
लगी है आग
रिमझिम फुहार
बुझाती प्यास ।।6।।
भू का गहना
फल फूल लताएं
मानों कहना ।।7।।
झूठी है आस
भू की रक्षा करेंगे
वृक्ष लिबास ।।8।।
कहना मान
भयावह स्थिति
भूमि वीरान ।।9।।
हर्ष अपार
जब भी खिला गुल
छायी बहार ।।10।।
पन्ना बलम
अहसास की दास्तां
लिखे कलम ।।11।।
मन अर्पण
छाएगा मधुमास
है समर्पण ।।12।।
ये कैसा गम ?
धरा की स्थिति देख
आँखे है नम ।।13।।
जाऊं मैं कहाँ
कॅरोना के डर से
जाऊं मैं कहाँ ?
मिलता प्यार
माता पिता का सदा
करो सत्कार ।।15।।
*प्रणिता राकेश सेठिया *परी*
=======================
तम अंधेरा
मिटा दो भगवान
डरते जन।
महामारी ने
निगलता जा रहा
फैला है तम।
छिन रहा है
मजदूर की रोटी
भूखा जहान।
क्रंदन भरा
हतोत्साहित मन
डरता जन ।
आखों में आते
बिना नीद के ख्वाब
आजमाते है।
रकीब बन
सता रहा है हमे
यह समय।
जीवन डोर
छूट जाने का डर
कोरोना काल।
हारेंगे नहीं
लड़ते ही रहेंगे
थमेंगे नहीं।
==*=मित्रा शर्मा
महू
=================================================
वीणापाणि
माॅ सरस्वती
ज्ञान का प्रकाश दो
तम हरलो
____
कमलासना
कलुष मिटा कर
ज्ञान फैलाओ
______
देवी ब्रह्माणी =======
जगत का कल्याण
मित्रा कर उत्थान
______
मन
$$$
हवा से ज्यादा
होती तीव्रता लिए
मन की गति
________
बहके दिल
किसी के प्यार जब
तोड बंधन
_______
कौन रोकता
विचारों का भंडार
मन की गति
______
दिल
$$$$
धडकता है
किसी के लिए दिल
बेकाबू बन
_______
सागर बन
तूफान को समेटे
शांति दर्शाता
________
कितने राज
दिल में छिपाता है
नादान दिल
_______
बेबसी
$$$$$
कह न पाना
सहते रह जाना
जिंदगी भर
__________
पथराई सी
भीगी आवाज वह
हाथ फैलाती
___________
तुम्हारे लिए
जीवन जी लिया है
कुछ न कहा
____________
नारी
$$$$$
तू धरती सी
विशाल ह्रदया है
अडिग सोच
_________
स्वर्ग से ऊंची
ईश का प्रतिबिंब
ममतामयी
__________
वात्सल्य लिए
स्नेह, स्पर्श में तेरे
समाया जग
__________
कोरोना
$$$$$$
हे महामारी
अब चली भी जाओ
ना तडफाओ
___________
दुखी है जग
अपनों से है दूरी
बिछोह, गम
__________
सुरक्षित हैं
घर में हैं जो कैद
कितने दिन
___________
समर्पण
$$$$$$
जान लुटा के
कर रहे हैं सेवा
महामानव
_______
सुरक्षित हैं
तुमसे ही जहान
कर्मवीर हो
________
अर्पण कर
अपनी सांसों को
दे रहे हैं सुख
____________
*श्रीमती शारदा मिश्रा
:
====================================================================
गौरैया-- हाइकु
गौरैया गाती
बगिया में मुस्काती
रे फुदकती
दाना चुगती
फुर्र से उड जाती
हां चहकती
पंख फैलाती
चीं चीं चीं करती है
गौरैया प्यारी
सकोरा पानी
रखा मुंडेर पर
हवा फागुनी
गगन उडे
मेरा घर है सूना
आओ गौरैया
प्रातः सवेरे
खूब कलरव करे
मन को भाये
बाल्कनी में आ
तिनका तिनका ला
घोंसला बना
दूर भागती
शहर कोलाहल
हाय बिचारी
वृक्ष रो रहे
सूनी है मेरी शाखें
आ जा चिरैया
चेतो मानव
प्रकृति का दोहन
कभी न करो
डां अँजुल कंसल"कनुप्रिया
=======================================================[12/06, 00:38] Shalni Khre: हाईकू
सुबह तपे
दोपहर जलाएँ
शाम सुहानी
➿➿➿➿
शिक्षा के बिन
अंधकार जीवन
शिक्षा प्रचार
➿➿➿
घर घर में
ज्ञान ज्योत जले
मिटे अज्ञान
➿➿➿➿
ज्ञान के दीपों
से दूर हो अज्ञान
सभी को भान
➿➿➿➿
सही दिशा में
बढ़े कदम मन
हो विश्वास
➿➿➿➿
हर मुन्नी में
पढऩे की हो चाह
करों जतन
➿➿➿➿
मन तरसें
तुम बिन साजन
आ भी जाओ न
➿➿➿➿
तुम न आएं
तो कुछ कर जाऊं
मानो अरज़
➿➿➿➿
आई लोहड़ी
मिल साथ कर ले
भागड़ा सब
➿➿➿➿
उड़े बादल
उड़ रही पंतग
हवाओं संग
➿➿➿➿
छाया कोहरा
ठिढुरा हैं शहर
सुहानी धूप
➿➿➿
पेड़ लगाओं
यह मानव धर्म
यही हो कर्म
➿➿➿
शालिनी खरे
भोपाल
===============================
*कोरोना संक्रमित सभी भारतवासी के लिए विनम्र सहानुभूति*
----------
धुन सुनो
कोलाहलपूर्ण
धुन सुनो
मूक वाणी
धुन सुनो
आह कराह
धुन सुनो
हंसी-मजाक
धुन सुनो
मंद मंद मुस्कान
धुन सुनो
हंसी ठठ्ठा
धुन सुनो
सुनो ध्यान से सुनो
चुप रहो
कुछ न कहो
धुन सुनो
केवल
धुन सुनो!
*लता प्रासर*=======================================
पर्यावरण ःहाइकु
पेड़ लगाओ
सुन्दरता बढ़ाओ
सुकून पाओ
झुकता पेड़
जिसपे होते फल
सहनशील
मौन से खड़े
गरमी में तपते
छाया भी देते
लाल कमल
तालाब में खिलते
खुशियाँ देते
वृक्ष लगाओ
हरियाली बढ़ाओ
जीवन पाओ
पेड़ों की छाँव
देती मन को सुख
विश्राम पाँव
बहे बयार
पेडों के झुनझुने
बजने. लगे
पेड़ों से हमें
आक्सीजन मिलेगी
चिंता मिटेगी
वनों की शोभा
लाल - लाल पलाश
रक्तिम आभा
पेड़ हमारे
जीवन के रक्षक
उन्हें संवारें
*आशा जाकड
===================================================================
""""""""""''''''''''''"मेरा मन"""''''''""''''''''""""
💐 "हाइकू विधा"💐
खुशी ने छला
गम में सदा हँसा
साहसी मन
क्षणिक दुखा
फिर से खिल उठा
सबल मन
आहुति हुआ
पर कभी न जला
सरल मन
क्रांत-आक्रांत
अद्भुत भूचाल
अब है शांत
हे कर्मरत
चाहे विषम पथ
हो घोर तम
उठा शपथ
स्याह हो मंजर
होगी सहर
मस्कुरा कर
उमंग-उर भर
निर्मल मन
भीड़ के बीच
जब लगे अजन
संबल मन
स्वजन में
जब रहा विजन
एकांत मन
संघर्ष पथ
अविरल-अचल
सदा अकथ
मूक हवन
साहस के क्षण
मेरा मन
मधुरी व्यास"नवपमा"💐
=======================
कुछ हाइकु
01-
कलम चले
सार्थकता जीसकी
आयें नजर।
02-
हाइकु काव्य
हिन्दुस्थान में आज
शिखर पर।
03-
सृजन छोटा
काम पर बढ़ा हैं
हाइकु काव्य।
04-
आज की नारी
पिसाऐं दो पाटो में
घर संसार।
05-
बारम बार
हमारा हैं प्रणाम
जय जवान।
06-
जिसनें कहा
ओम नमः शिवाय
कल्याण हुवा।
07-
स्वर्ग बनायें
ओओ हम सवारें
आर्यवर्त को।
08-
गाँव नगर
दिखायें नेता रंग
चुनावी जंग।
09-
हिंदी के प्रेमी
बनायें जन वाणी
संम्मान यही।
10-
नेता की कुर्सी
अजिब है पहेली
कोई न सुल्झा।
11-
कोरोना वार
हम हैं सब त्यार
जनता कर्फ्यु।
12-
धरती स्वर्ग
भारत स्वाभिमान
मेरा कश्मीर।
एक हाइकु माला (गीत)
♡नाम कमाना♡
लक्क्ष साधना
आगे बढ़ते जाना
नाम कमाना।।
अपनी जड़
मजबुत बनाना
नाम कमाना।।
आगे बढ़ना
पिछे नहीं मुड़ना
नाम कमाना।।
सेवा संस्कार
आदर्शों सिद्धांतो से
नाम करना।।
जमाना देखे
किसी से नही कम
नाम अमर।।
कौशिस रख
ज्ञान रूपी प्रकाश
सर्वत्र फैले।।
कुन्दन पाटिल ,
जीवन परिचय
*कुन्दन पाटिल
===========================
कोरोना की पृष्ठभूमि में संघर्ष की एक झांकी
------------
1-नहीं संघर्ष
आया ऐसा वर्ष
घर में हर्ष!
2-सीखा संघर्ष
बदले हैं हालात
पाया है हर्ष।
3-करें संघर्ष
घर पर रहते
न सहमते ।
4-हैं विपरीत
परिस्थितियां सारी
संघर्ष जारी।
5-कहते गुरु
कभी न घबराना
संघर्ष शुरू ।
6-किताबें पढ़ें
बच्चों के साथ खेलें
कहानी गढ़ें।
7-हाथ बटाएं
पत्नी को देंआराम
खुशी बढ़ाएं।
8-आकर बैठें
बुजुर्गों के समीप
लें कुछ सीख।
9-करें नमस्ते
रहें सदा हँसते
भूलने रास्ते ।
10-दूरी बनाएं
हाथों को रहें धोते
मास्क लगाएं ।
11-मुस्कुराकर
करना है संघर्ष
पाना है हर्ष।
12-कैसा संघर्ष
हैं हालात से राजी
खोजते हर्ष।
13-क्यों परेशान
संघर्ष का सामना
बढ़ाए शान।
15-कोरोना भूत
जो गये सब जाग
जाएगा भाग।
डाॅ0सुषमा सिंह
=========================
नया जमाना
----------------
नया जमाना
आया अब देखो ये
हम सबका
पुरानी यादों
को समेटे हुए ये
आया जमाना
हर वाहन
थम गया,देखो ये
बैलगाड़ी है
अब चलो ना
उस राह पर जो
पूर्वजों से है
वक़्त आया
अब हमारा फिर
बुजुर्गों का है
कही बातो को
अब हम मानेगे
यह जाना है
आओ देखो ये
सब सिखलाने का
वक़्त आया
जागो भारत
के जन-जन वासी
वक़्त आया
एक हैं हम
एक परिवार है
हम मानेगे
नया जमाना
आया अब देखो ये
हम सब का
*कल्पना ओसवाल
इंदौर
=============================================
हाइकु-कोरोना
कोरोना बड़ा
बढ़ता जा रहा
क्या करें
कोई बताए
मर रहे लोग
सूना जग
अभी तक
कोई इलाज नहीं
समझ आया
कैसा होगा
भविष्य देश का
कटता मन
चिंता ग्रस्त
है विश्व सारा
सूना मन
हे प्रभु
कर दो सब
अब ठीक
स्वरचित
*हेमलता शर्मा 'भोली बैन'
= ========
विधा -हाईकु
भोर मुस्काई
बसंत इठलाया
बिखरे रंग।
. लालिमा छाई
झूमा गुलमोहर
मन हर्षित।
. हवा महकी
कलिया प्रफुल्लित
झूमती डाली।
. कोयल कूकी
बौराई अमराई
जगी लालसा।
. मनवा डोले
चाहे रसास्वादन
आत्मा है तृप्त ।
××××××××××××××
. माँ का आँचल
सहेजता अपार
दृढ़ विश्वास।
. माँ की ममता
शीतल बयार सी
खुशियाँ देती।
. माँ का आशीष
आधार जीवन का
धन्य जीवन।
. माँ की दुआऐं
सफल करे काज
अग्रसर पथ
. माँ का प्यार
सदैव करे त्याग
सार्थक तप ।
स्वरचित --- वन्दना अर्गल
=============
जनवरी में
चीन में वायरस
का आगमन
फरवरी में
इटली से जापान
फैला कोरोना
मार्च भारत
हो गए बदरंग
होली के रंग
अप्रैल सुना
ना लिखना पढ़ना
छुट्टी मनाना
मई वीराना
ना नानी घर जाना
ना आम खाना
जून बेहाल
गर्मी से बुरा हाल
ना कुल्फी स्वाद
देखें जुलाई
क्या रंग लाएगा
लॉकडाउन
अगस्त राखी
बहन मजबूर
भाई है दूर
××××××××××××××
स्कूल खुलेंगे यहां?
किसको पता
अक्टूबर में
दुर्गा का आगमन
हर्षित मन
नवंबर ने
नई उमंग लाई
दिवाली आई
ए दिसंबर
कोरोनावायरस
को विदा कर
*स्मिता जैन रांची
==============================
हायकू - - -
मेरा भारत
मेरा भारत
एकता + अनेकता
है गुलदस्ता
अंतरिक्ष में
बना है महाशक्ति
पूर्ण स्वदेशी
हिमालय व
हिन्द महासागर
है गौरव का
विलनशील
संस्कृति की पोषक
भारत माता
है स्वतंत्रता
अभिव्यक्ति की यहाँ
विशेषतया
सबसे बड़ा
लोकतंत्र विश्व का
गर्व हमारा
*चेतना भाटी
===================================================
[12/06, 20:50] Chinmay: हायकु
--------
१.बंद हैं स्कूल
शिक्षक है कोरोना
घर में क्लास।
२.मित-व्ययिता ,
संयम सिखा रहे
'कोरोना' सर।
३. देव -दानव
कोरोना ने बताए
इसी जगह।
४. फिल्म रिलीज
'साधु और शैतान'
देश भर में।
५. फूल उगाए
खुद ने ही उखाड़े
बेबस माली।
६. सूखी तुलसी
बढ़ता मनी प्लांट
' अर्थ'समझे।
७.बरसों बाद
गृहिणी के स्पर्श से
हँसा है घर।
८ गुण सिखाए
कितना बाकी कोर्स
'प्रकृति' मेम?
९. दवा मिलेगी
वैक्सिन भी बनेगा
पर 'वहम?
१०. सहज भाव
खतम ज़िंदगी से।
संशय राज!
११. तृप्त धरती
जल-नभ-निर्मल
मिले असीस।
१२.विपदा आई
तब खुली तिजोरी
भामाशाहों की।
१३. पंछी चहके
घुंगरू बजे जैसे
लौटा समय।
१४.प्रेम ही तो है
लिखा तुमने
मोरपंख से।
१५. नन्हा-सा शिशु
जैसे गोद में बैठा
नाम हायकु।
****
*अरुणा खरगोनकर.
==========================================
: लोग डरे से
बीमारी भयानक
कोरोना थामे !!
जग में होना
कौन कहता यह
सहज होना
* रश्मि सक्सैना
पचोर
==================================
हाइकू
१कोयल गाए
अंबुआ की डार पे
बौर हैं आए ।
२ मुस्काते रहो
जीवन अनमोल
व्यर्थ ना बीते।
३ तुम जो मिले
आंखें सब कहतीं
होंठ ना हिले।
४ बासंती हवा
क्यों ऐसे बहकाए
क्यों तडपाए ।
५ नया सवेरा
कही पंछी चहका
ओस का डेरा।
६ पुष्प खिलते
देख मन खिलते
गीत रचते।
७ संगीत बजा
कौन मन के द्वारे
दिल है सजा।
८ सोचे जाने क्या
ये बावरा मन तो
पंख नहीं हैं ।
९छवि नैनों में
बसी प्यारे श्याम की
दिल वहीं है।
१० ॠतु सावन
तरसे विरहन
रहा ना जाए।
११ प्रीत मिलती
मन हरा हो जाता
प्यास बुझती ।
*नीति अग्निहोत्री
======================%%%%%%%%%
🙏
(१)
ज्ञानदायिनी
बालक हैं नादान
शारदा माता।
(२)
वंदन करे
सुर शब्द चिंतन
वरदायिनी।
(३)
देखे नयन
नजारा अनुपम
दूर के ढोल।
(४)
भरी कोठियां
भूखा क्षुधित तन
चींटी कतार।
(५)
लोलक पड़ी
बरस गई बूंदें
सावन आया।
(६)
घुटता दम
पाशविक अधम
नरपिशाच।
(७)
रजत सोना
सब कुछ नाम के
प्रेम है खरा।
(८)
मन के मोती
बंधन नेह माला
प्रेम गुंजन।
(९)
लहलहाती
निहारती धरणी
गरल डाले।
(१०)
दीप उजाला
मन घोर अंधेरा
मानव शुष्क।
*प्रस्तुति
माया मालवेंद्र बदेका
======================/////
हायकू
माँ-बेटी
बचपन की
सारी यादें दिल में
मेरे समायी ।
बड़े लाड से
पाला कह कर कि
तू पराई है।
संस्कार मुझ
को देकर वो सारे
सिखाया जीना।
जिस आंचल
में बड़े हो आ गया
बिन रहना।
इंतजार में
बीत जाता महीना
गर्मी आने के
तेरे हाथ का
बना है खाना याद
ससुराल में।
जब बिटिया
ससुराल से आती
ख़ुश हो जाती।
बिटिया माँ से
मिलती मायके में
सब भूल के।
*मीना जैन भोपाल (स्वरचित)
=================
मन की प्यास
---------
मन की प्यास
कैसे बुझे सांवरे
राह दिखाओ ।
मन बसे हो
कब आओगे देने
दर्शन बोलो ।
हर पल हूँ
व्याकुल तुझ बिन
सुनो सांवरे ।
राधा पुकारूँ
तुझे रिझाऊं कान्हा
दर्श दिखाओ ।
पूजा न जानू
अवगुण हैं सारे
करो स्वीकार ।
व्यथित मन
तुम्हें सदा पुकारें
पार लगाओ ।
कष्ट बहुत
जीवन संकट में
सौंपा है भार ।
तुम ही जानो
तुम तारणहार
मुझे उबारो ।
स्वरचित
*निशा"अतुल्य"
=================================
मेघा पानी दे
---------
मेघा पानी दे
बच्चें करें गुहार
गुड़ धानी दे
******
मेघा पानी दे
धरती की गुहार
मेघा पानी दे
*******
भीगी धरती
मद मस्त फुहार
छाई बहार
*****
बरसे दुलार
मेघ करें सत्कार
खुशियाँ छाई
******
पिया मिलन
तरसते नयन
भीगा ये तन
*********
आया सावन
मुदित हुआ मन
आओ साजन
*******
तुहिन कण
शबनम के मोती
धरती देती
*****
मेघों की गांठ
खोलती हैं हवाएँ
बरखा आए
******
*शोभना नाईक
========================
सुख -दुख
-------
सुख वह दुख
होते एक समान
है मेहमान |
कीजिये भूल
पर नहीं कीजिये
की गई भूल |
मैं हूँ उदास
सारे विरोधाभास
है आस पास |
कैसी लाचारी
बेईमानी से हरी
ईमानदारी |
देख लिखा हे
किताबों से अधिक
पड़ो चेहरे |
खुशबू आई
या उनके आने की
खबर आई |
गाँठ मे शेष
अभाव मायी पूँजी
कुबेरी होड़ |
हम है दूखी
यह समझकर
दुख भी सूखी |
नारी को देते
दो रोटी, छत, धोती
उम्र कैद |
हमारे राम
आपके रेहमान
एक ही नाम |
ना समझ हैं
भूले अपना धर्म
निरपेक्ष हैं |
खुशी या गम
हर हालत पर सूखी
हैं हम |
आप हैं खुश
मुझे लागने लगा
जामन खुश |
कुछ तो करें
कि हम शेष रहें
शेष के लिए |
हमारे सुख
उनको नहीं भाते
दूखी हो जाते |
बोये थे बीज
अलगाव के यहा
मिलन कहा |
सावधानियाँ
दूर करे हमारी
परेशानियाँ |
हो गए हम
अनुशासन हीन
सोच विहीन |
तितलियाँ हैं
फूल पर उनके
हस्ताक्षर हैं |
आईना खुश
शायद देख लिया
आपको खुश |
अपने जाए
अपनो के हो गए
बुढ़ापा रोये |
*डॉ विजया त्रिवेदी
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हांइकु - अलका
पड़े हैं छाले
हिम्मत नहीं हारे
ये मज़दूर
गहन तम
प्यार पाने की आस
दिखे न भोर
श्रमिकगण
भाग रहे है भूखे
गाँव ही छांव
ये मज़दूर
बने है फुटबॉल
बाप न माई
सड़क पर
क़ाफ़िले पे क़ाफ़िले
आत्मनिर्भर
ये सरकार
अमीरों की सुनती
दीन मरता
गिरी है लाशे
आँखों में गाँव बसा
दिल में है माँ
*डॉ अलका पाण्डेय
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पावस मंजूषा(हाइकु)
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मेघा पानी दे
बच्चें करें गुहार
गुड़ धानी दे
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मेघा पानी दे
धरती की गुहार
मेघा पानी दे
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भीगी धरती
मद मस्त फुहार
छाई बहार
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बरसे दुलार
मेघ करें सत्कार
खुशियाँ छाई
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पिया मिलन
तरसते नयन
भीगा ये तन
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आया सावन
मुदित हुआ मन
आओ साजन
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तुहिन कण
शबनम के मोती
धरती देती
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मेघों की गांठ
खोलती हैं हवाएँ
बरखा आए
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*शोभना नाईक
सूची
हाइकु
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रचनाकार
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1आशा जाकड
2लता प्रसार
3शलिनी खरे
4अन्जुल कंसल
5शारदा मिश्रा
6मित्रा शर्मा
7प्रणीता
8राधिका इंग्ले
9वसुंधरा
10 शैलेष वाणी
11 वंदना पुणेता बेकर
12 आभा माथुर
13 प्रेरणा सेन्द्रे
14शशिकला व्यास
15 नंदनी जोशी
16प्रमिला सक्सेना
17 सुधा चौहान
18 संगीता पाठक
19 मंजिरी पुणे
20 विजय चौरे
21प्रभा जैन
22रश्मि सक्सेना
23संजय मालवी
24मीना जैन
25कुमुद दुबे
26 नवनीत जैन
27 सविता ठाकुर
28 कवितासक्सेना
29सरला मेहता
30मनोरमा जोशी
31उषा गुप्ता
32 ंमधु टाक
33 चारुमित्रा नागर
34शोभा तिवारी
35 ंमधु वेश्णव
36मंजू गुप्ता
37 ंमधुलिका सक्सेना
38माधुरी व्यास
39 कुन्दन पाटिल
40 सुषमा सिंग
41 हेमलता शर्मा
42 कल्पना ओसवाल
43वन्दना अर्गल
44स्मिता जैन
45- चेतना भाटी
46- अरुणा खरगोनकर
47- रश्मि सक्सेना पचौर
48-निति अग्निहोत्री
49 -माया मानवेंद्र
50- मीना जैन
51निशा तुल्य
52 शोभना नाईक
53 विजिया त्रिवेदी
54 अलका पाण्डेय
55 शोभना नाईक
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