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मेरे पड़ोस में एक परिवार रहने आया था। ना तो उन्होंने किसी से परिचय किया ना ही किसीको स्माइल दी। 4, 5 दिन पहले परिवार के पुरुष सदस्य बाहर गांव जाते दिखे। 3 दिन बाद एक
दोपहर उनकी 5 वरस के लगभग
बच्ची के जोर जोर से रोने की आवाज अा रही थी वह बर्थडे मना ना चाहती थी,जो कि पापा के ना होने से केसे मनेगा।मैने घर में से सुना तो निश्चय कर लिया की स्वीट डी श ओर दो सवजी पूरी बना कर उनके घर जा कर बिटिया का बर्थडे मना देगे सब तेयारी करके बैठक में आकर देखती हूं कि पतिदेव ओर बेटा गायब है। कहा गए होगे।थोड़ी देर में बर्थडे items,happy birthday ki झालर ,डेकोरेटिव समान,केक,गिफ्ट लेकर,बेटा गुब्बारे ओर नमकीन,पेप्सी की बोतल लेकर आए और बोले चलो पड़ोस में बेटी का बर्थडे मानने चलते है। हमने नोक किया,ओर हैप्पी बर्थडे प्यारी अंजू कहते हुए उनके घर में प्रवेश किया उनसे बिना पूछे बेटे ने जल्दी से सब सजावट का सामान सजा दिया।
अंजू यो उछल पड़ी उसने खुशी खुशी केक काटा,मिठाई खाई,गिफ्ट लिया,ओर भिया कहकर बेटे के टांगो में लिपट गई,उसके सारे फोटो उसके पापा को सैंड कर दिए।तुरंत उसके पापा ने आश्चर्य करते हुए धन्यवाद कहा।हम पांचों ने डिनर साथ में
लिया। अगली सुबह ही अपने गिफ्ट से खेलते हुए अंजू बेझिझक हमारे घर में अा गई। प्यार से प्यार ही मिलता है,ये सच है
*निर्मल सिंघल एडवोकेट
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