----
1,,,,ऋषि मुनि का
अमर वरदान,
निरोग रहें।
2,,,, नीम हकीम,
योग रखता दूर ,
योग जरूरी।
3,,,,,,है प्राणायाम,
रहे निरोगी काया,
बनें सुंदर।
4,,,,,,,,। योग साधना ,
होते निर्विकार,
निरोग रहे।
5,,,,,, मन वर्तियां,
अनुशासित रखें
हों ऊर्जावान।
🌹मधु वैष्णव🌹
जोधपुर राजस्थान स्वरचित मौलिक हाइकु
No comments:
Post a Comment