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माँ का आँचल अगर हो सर पर ,
खुशनसीब हम कहलाते।
पिता की एक हथेली सर पर,
हो तो हम हिम्मत पाते।
माँ की लोरी में है मधुरता,
जीवन मे रस घोलती है।
पिता की रौबीली आवाज
प्रेरणा के पन्ने खोलती है।
माँ खुश होती है खुशियों में,
दुःख में साथ वो रोती है।
महसूस होती है सिर्फ पिता की
भावनाएं जो होती हैं।
माँ जीवन देती है,ममता
की गागर छलकाती है।
पिता की प्रेरणा कठिन राहों की
मंजिल तक पहुंचाती है।
व्यक्त होता है माँ का प्रेम ,
जीवन को सहलाता है।
खामोश पिता की आंखों में
स्नेह--सागर लहराता है।
*अचला गुप्ता
इंदौर
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