बाबूजी 🖋
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मेरी चंचल आँखों में है एक सितारा बाबूजी
मेरी नन्हीं इन बाहों का एक सहारा बाबूजी
सुबह को जब आँखें खोलूँ तो पिटकोली में चढ़ जाऊँ
नन्हें नन्हें दाँतों मंजन करवाते है बाबूजी
उनकी उंगली का स्पर्श मुझको याद अभी तक है
बंद आँखों में मुँह में कुल्ला खुद करवाते बाबूजी
करवाते स्नान मुझे और गाते मीठे गाने वो
उनकी मीठी तान गूंजती कानों में सुर बाबूजी
ले जाते स्कूल मुझे वो रोज कहानी नई सुनाते
सुनके कहानी मैं मुस्काती कब बड़ी हो गई बाबूजी
स्कूल कालेज,खूब पढाये शौक कराये नये नये
पिक्चर मेले,दुनियां घुमाई ,साथ हँसे थे बाबूजी
बड़ी हुई तो वर भी ढूँढा ,कहते तुझसे सुंदर है
हँसते रोते ब्याह रचाया,चुपचुप रहते बाबूजी
दुल्हन बन जब शादी हुई तो बाबूजी कुछ न बोले
फिर सीने से मुझे लगाके खूब रोये थे बाबूजी
सदा सुहागन आशीषों की खुशियाँ झोली भर लाई
छोड़ सुनेहरी बचपन यादें याद रही सब बाबूजी
जीवन के पच्चास बसंतों तक वो साथ हमारे थे
आज नहीं है साथ हमारे,मेरे प्यारे बाबूजी
यादों में हरपल है छाये मेरे प्यारे बाबूजी
अंश आज भी दौड़ रहा है रग रग मेरे बाबूजी
मेरी आँखों की रंगत में खूब बसे हो बाबूजी
सारी दुनियां मुझसे कहती दिखती हो तुम बाबूजी
सरिता सिंघई कोहिनूर 💎
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