आसपास जड़ें फैलाते मजबूत बरगद का पेड़ है पिता ,
प्रेरणा और सफलता की सीढ़ी है पिता ।
ढाल बनकर जीवन में खड़ा रहता है पिता ,
मुस्किलों से जूझकर भी आसान रास्ता देता है पिता।
ढोता है सारी तकलीफ बच्चों का कष्ट वह पिता,
कड़कती आवाज में भी अंदर से मोम रहता है पिता।
सपनों के पंख लगाता है बच्चों का वह पिता,
बिना आंसू का रोकर सींचता है पिता।
*मित्रा शर्मा
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