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गर्मी की ठंडाई पापा कुल्फी की ठंडाई पापा
बारिश की पुरवाई पापा
ठंडी की रजाई पापा
दादा दादी की परछाई पापा
मेहनत की कमाई पापा
सागर की गहराई पापा
दुनिया की अच्छाई पापा।
सपनों का आधार पापा
अपनों के कर्णधार पापा
मेरी गलतियों का सुधार पापा
मेरा एटीएम कार्ड पापा
मुझसे जब नुकसान हुआ तो तुमने की भरपाई पापा
जब भी मुझ को चोट लगी तो
तुम ही थे मेरी दवाई पापा
तुम ही प्रश्न हो तुम ही हो उत्तर
तुम ही मेरी पढ़ाई पापा
और जीवन की आपाधापी में
तुम ही हो हमराही पापा
स्वरचित
*द्वारा स्मिता जैन रांची
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