Sunday, June 21, 2020

मेरी नजर में मेरे पापा



    मेरी नजर में मेरे पापा
    -----------

 गर्मी की ठंडाई पापा कुल्फी की ठंडाई पापा
 बारिश की पुरवाई पापा
 ठंडी की रजाई पापा

दादा दादी की परछाई पापा
 मेहनत की कमाई पापा
 सागर की गहराई पापा
दुनिया की अच्छाई पापा।

 सपनों का आधार पापा
 अपनों के कर्णधार पापा
मेरी गलतियों का सुधार पापा
मेरा एटीएम कार्ड पापा

  मुझसे जब नुकसान हुआ तो तुमने की भरपाई पापा
जब भी मुझ को चोट लगी तो
 तुम ही थे मेरी दवाई पापा

तुम  ही प्रश्न हो तुम ही हो  उत्तर
 तुम ही मेरी पढ़ाई पापा
और जीवन की आपाधापी में
तुम ही हो हमराही पापा
 स्वरचित


*द्वारा स्मिता जैन रांची

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...