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पिताजी इस जीवन की मुस्कान
इसी शब्द में संसार है
जीवन का वो मजबूत आधार
जीवन की बसंती बहार हैं ।
पिताजी ने आंखों में आंसुओं को
कभी आने नहीं दिया है
होठों को मुस्कुरहटों से सजाया
जिंदादिली से जीना सिखाया है।
आज जो भी उपलब्धि मिली
उनके प्रोत्साहन से मिली है
उस रूढ़िवादिता के समय में
सहशिक्षा में हमें पढाया है।
आज जो कुछ भी हैं
उन्हीं की प्रेरणा से संचालित
जीने का अंदाज सिखाया है ।
मुश्किलों का दौर संभाल लिया
जीवन बगिया को महकाया है
पिताजी का होना बहुत जरूरी
वर्ना ॒ जीवन सुमन मुरझाया है।
जीवन रूपी उपहार दिया है
रंगबिरंगी दुनिया से रुबरू करवाया
उनके उपकार तो हैं अनगिनत
उनसे ज्ञान प्रकाश पाया है।
||| नीति अग्निहोत्री|||
५७सांई विहार इन्दौर मप्र
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