महाबली संकट मोचन अंजनी के पुत्र जो संकट में हमारी रक्षा करते हैं।
प्रभु को मेरा शत-शत नमन एक घटना: एक दिन साधक संत के पास गया, और उसने कहा मैंने तो बहुत भक्ति कर ली।
साधक बोलता "महाराज आप मुझे कुछ ऐसा मंत्र बताओ इस मंत्र की सिद्धि से मुझे संकट मोचन के दर्शन हो ।
संत बोलते हैं_ नहीं बेटा यह बच्चों का खेल नहीं है ।
बहुत कठिन तरीके से तप करना पड़ता है, पर साधक नहीं मानता और जीत कर कर के मंत्र जानना चाहता है।
संत बोले, तू करलेगा !! तो ठीक है। संत ने साधक को मंत्र प्रदान किया और उसे बताया 5 दिन तक मंत्र जाप करने से
तुम्हें बजरंगबली के दर्शन होंगे, पर्याप्त प्रसाद अपने पास रखना। साधक बोलता है, वह तो मैं सब कर लूंगा, आप चिंता
मत करिए। (साधक के शब्दों में अहम का भाव था ) संत धीरे से मुस्कुरा देते हैं। साधक अपनी साधना में लीन हो जाते
हैं, दिन रात एक कर कर मंत्र का जाप करते हैं, अंतिम दिन हनुमान जी वानर के रूप में प्रकट होकर कर दर्शन देते हैं।
बड़े विकराल स्वरूप में रहते हैं, जैसे ही प्रसाद के लिए आगे आते हैं, साधक डर के मारे पूरा कटोरा उन्हें दे देते हैं।
वानर फिर से प्रसाद मांगते हैं। साधक बोलता है अब तो नहीं है, बस इतना ही था। वानर उसे खींच के थप्पड़ लगाते हैं।
बोलते हैं साधक से की तुने मेरा आहवान किया था - जब तू बोल रहा था कि मेरी सब तैयारी है।
साधक का घमंड टूट गया। अगले दिन साधक संत के पास गया और सारी घटना सुनाई।
मुस्कुराते स्वर में बोले - बेटा यदि तू वहां पर थोड़ा दिमाग का इस्तेमाल करता और प्रसाद को बिखेर देता तो वो खाने में
व्यस्त हो जाते, तब तू तुरंत दूसरे प्रसाद का प्रबंध कर लेता। साधक को अपनी गलती का एहसास हुआ उसने क्षमा
याचना की। ऐसा ही कुछ जीवन मे होता है, हमें जो कार्य करने का मना किया जाता है, हम उसी कार्य को करते हैं अपना
ज्यादा दिमाग लगाते हैं।
* हिमानी भट्ट धन्यवाद।
प्रभु को मेरा शत-शत नमन एक घटना: एक दिन साधक संत के पास गया, और उसने कहा मैंने तो बहुत भक्ति कर ली।
साधक बोलता "महाराज आप मुझे कुछ ऐसा मंत्र बताओ इस मंत्र की सिद्धि से मुझे संकट मोचन के दर्शन हो ।
संत बोलते हैं_ नहीं बेटा यह बच्चों का खेल नहीं है ।
बहुत कठिन तरीके से तप करना पड़ता है, पर साधक नहीं मानता और जीत कर कर के मंत्र जानना चाहता है।
संत बोले, तू करलेगा !! तो ठीक है। संत ने साधक को मंत्र प्रदान किया और उसे बताया 5 दिन तक मंत्र जाप करने से
तुम्हें बजरंगबली के दर्शन होंगे, पर्याप्त प्रसाद अपने पास रखना। साधक बोलता है, वह तो मैं सब कर लूंगा, आप चिंता
मत करिए। (साधक के शब्दों में अहम का भाव था ) संत धीरे से मुस्कुरा देते हैं। साधक अपनी साधना में लीन हो जाते
हैं, दिन रात एक कर कर मंत्र का जाप करते हैं, अंतिम दिन हनुमान जी वानर के रूप में प्रकट होकर कर दर्शन देते हैं।
बड़े विकराल स्वरूप में रहते हैं, जैसे ही प्रसाद के लिए आगे आते हैं, साधक डर के मारे पूरा कटोरा उन्हें दे देते हैं।
वानर फिर से प्रसाद मांगते हैं। साधक बोलता है अब तो नहीं है, बस इतना ही था। वानर उसे खींच के थप्पड़ लगाते हैं।
बोलते हैं साधक से की तुने मेरा आहवान किया था - जब तू बोल रहा था कि मेरी सब तैयारी है।
साधक का घमंड टूट गया। अगले दिन साधक संत के पास गया और सारी घटना सुनाई।
मुस्कुराते स्वर में बोले - बेटा यदि तू वहां पर थोड़ा दिमाग का इस्तेमाल करता और प्रसाद को बिखेर देता तो वो खाने में
व्यस्त हो जाते, तब तू तुरंत दूसरे प्रसाद का प्रबंध कर लेता। साधक को अपनी गलती का एहसास हुआ उसने क्षमा
याचना की। ऐसा ही कुछ जीवन मे होता है, हमें जो कार्य करने का मना किया जाता है, हम उसी कार्य को करते हैं अपना
ज्यादा दिमाग लगाते हैं।
* हिमानी भट्ट धन्यवाद।

Koi bhi sadhana Guru ke purna margdarshan me honi chahiye.
ReplyDeleteGuru ke samne apni hoshiyari nahi bgharna chahiye