Sunday, April 12, 2020

घोर आतंक कैसा ये आतंक मचा , असहनीय आत्मघाती ।


 हर दिशा से रूदन , की आवाज आती । जर्जरित अवसाद से , प्रत्येक छाती ।


कामनाओं की पिपासा , हैं सताती , यह दशा दयनीय मानव , को रूलाती


। हम बनायें सुखद पथ , नव जिन्दगी का , शांन्ति पा जाये मनुज , उस राह चलकर । गूँज जायेगी गिरा , संदेश बनकर ,


थम जायेगा कहर , संदेश सुनकर ।

* मनोरमा जोशी ।🙏🏻

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