घोर आतंक
कैसा ये आतंक मचा ,
असहनीय आत्मघाती ।
हर दिशा से रूदन , की आवाज आती । जर्जरित अवसाद से , प्रत्येक छाती ।
कामनाओं की पिपासा , हैं सताती , यह दशा दयनीय मानव , को रूलाती
। हम बनायें सुखद पथ , नव जिन्दगी का , शांन्ति पा जाये मनुज , उस राह चलकर । गूँज जायेगी गिरा , संदेश बनकर ,
थम जायेगा कहर , संदेश सुनकर ।
* मनोरमा जोशी ।🙏🏻
हर दिशा से रूदन , की आवाज आती । जर्जरित अवसाद से , प्रत्येक छाती ।
कामनाओं की पिपासा , हैं सताती , यह दशा दयनीय मानव , को रूलाती
। हम बनायें सुखद पथ , नव जिन्दगी का , शांन्ति पा जाये मनुज , उस राह चलकर । गूँज जायेगी गिरा , संदेश बनकर ,
थम जायेगा कहर , संदेश सुनकर ।
* मनोरमा जोशी ।🙏🏻

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