Thursday, April 9, 2020

हनुमान जयंती पर विशेष----

 बात उन दिनों की है, शायद जब हमें ज्ञान भी न आया होगा...... मेरी माँ हनुमान जी को अपना भाई मान लिया था।वो अपने जीवन के सुख दुःख की वार्ता हनुमान जी से किया करती.... और न जाने कबसे राखी और भाई दूज पर थाल उनके भी सजने लगे।सबसे पहले थाल उनकी ही सजती ,पूरा परिवार हम चारों भाई-बहन व पिताजी वहां इकट्ठे होते माँ तिलक लगाती मैं शंख बजाती भाई घंटा बजाता.... मानो लगता हनुमान जी साक्षात आसन पर विराजमान हो गए हो।कोई भी मुश्किल आए माँ कहती... अपने हनुमान मामा जी से कह दो वो सही कर देंगें ,और तब से ये क्रम आज भी जारी है. और आप को विश्वास नहीं होगा संकटमोचन वो संकट हर लेते हैं। हम वाराणसी से हैं तो हमारे यहाँ आज के दिन हनुमत ध्वजा यात्रा प्रभातफेरी सा निकलती है जिसमें नगर के सभी पुरुष ,स्त्री भाग लेते हैं.... येपरिक्रमा संकटमोचन मंदिर मे आकर समाप्त होती है.।आज भी हमारे परिवार मे बच्चों के दिवस का प्रारंभ हनुमान चालीसा से ही होता है। आपको जान के आश्चर्य होगा कि हनुमानजी अमर है और ऐसी मान्यता है कि आज भी राम चरित मानस का अखण्ड पाठ जहाँ भी होता है हनुमानजी वहाँ अवश्य उपस्थित होते हैं। जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीश तिहुँ लोक उजागर. जय श्री राम

मेघना रौय

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