Wednesday, April 15, 2020

डा अम्बेडकर जयंती पर
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 शुभसंकल्प का ऑनलाइन
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 गीत ,गजल कार्यक्रम संपन्न
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"उजाले अपनी यादो के
हमारे पास
रहने दो,ना जाने किस गली मे
                            जिंदगी  की शाम  हो जए"
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 लाक डाऊन के तले घर के अन्दर बेठे-ठाए रचनाकारो के लिय शुभसंकल्प समूह द्वारा ओनलाईन शेर,शायरी ,गीत ,गजल का कार्यक्रम संपन्न्ं हुआ विषय था "स्वर्ग नर्क" यह कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से सरस्वती वंदना से प्रारम्भ हुआ तो देर रात तक चलता रहा।

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शुभसंकल्प समूह की निर्देशक डा सुनीता श्रीवास्तव ने बताया की इंदौर के आलावा बहार के रचनाकारो ने भी इस कार्यक्रम में गर्मजोशी से हिस्सा लिया।प्रतिभागियो में शारदा मिश्रा ने कहा - "स्वर्ग नर्क कुछ भी नही , शब्दो का मायाजाल। सुख मिल जाए स्वर्ग हैं दुख हैं नर्क समान" अचला गुप्ता ने बया किया- "स्वर्ग वही ,जिस घर में होता बुजुर्ग मात पिता का सम्मान" पूनम शर्मा ने कुछ इस तरह से बोला - "मेरी नजर मे स्वर्ग और नर्क इसी दुनिया में हैं क्योकी जो देखा नही इन आखो से.." शोभा तिवारी ने कहा- "मातभूमि तुमको नमन वंदे मातरम् देश की धडकने हैं..." अनुराधा विसावाडिया - " हो महामारी की फेलना या लम्बी बिमारी की लाचारी यही नर्क हैं...." मनोरमा जोशीने कहा- "स्वर्ग और नर्क कर्मो की है माया नगरी.." उषा गुप्ता - "स्वर्गनर्क ढूढे बंदा दोनो हाथ और आखे ऊपर करके, तेरे कर्मो पर टिका है ये.." प्रभा जैन - "सुख मानो तो स्वर्ग हैं बस लेते आना चाहिय.." वंदना अर्गल- "अछ्छे कर्मो से ही होती पह्चान स्वर्ग की.." रीता जैन- सबसे बड़ी सौगात हैं जीवन नदा हैं जो जीवन से हारे,," कुंदन पाटिल- जीवन मेरा उपभोगतवादी कर्म मेरे नर्क के द्वार चाह मन में स्वर्ग प्राप्ति.." बीना सिंग- कभी यह सोचा भी नही था मंजर तबाही का भी होगा सोचा भी नही था .." शारदा गुप्ता- तू क्यो नही आया रे नदी का वीरा .." मनी टेगो-- "सब निकले हैं स्वर्ग की तलाश में कोई कसर नही छोडी अपने प्रयास में.." राजेश - "लोग उलझे हैं तमाम रिश्तो मे बेफिजूल खुद को प्त नही...के खुद से वास्ता क्या हैं " सुरेन्द्र सिंग राजपूत - बोलना और प्रतिक्रिया करना जरुरी है लेकिन सयम और सभ्यता का दामन.." सुनीता सक्सेना - "मेरा क्या हैं जिंदगी जीरो से शुरू हुई हो जीरो पे खत्म हो जाऊगी.." सरला मेहता - "आसा नही सफर जिन्दगी का ख्बाब जन्नत के आने लगे हैं." ममता बड़जात्या - "रोज रोज जलते है फिर भी खाक न हुय अजीब हैं कुछ ख्बाब भी राख नही हुय" मनी टेगो- सब निकले हैं स्वर्ग की तलाश मे कोई कसर नही छोडी अपने प्रयास में.. इस कार्यकम में शारदा गुप्ता,मन्जू गुप्ता मुबई , रिता जैन ,प्रभा जैन ,अचला गुप्ता ,पूनम शर्मा ,मनोरमा जोशी,सुषमा शुक्ला , वन्दना अर्गल देवास,अनुराधा विसावाडिया ,कुंदन पाटिल देवास ,सुरेखा भारती ,शोभा तिवारी,ममता बड़जात्या ,हिमानी भट्ट ,राजेश ,बीना सिंग जयपुर,सरला मेहता ,मनी टेगो,श्वेता बडजात्या,सत्यप्रका ठ ाकुर ,मानवेंद्र नारायणि माया ,मनीष तिवारी ,सरला मेहता ने वाचन किया ,कार्यक्रम का संचालन सत्य प्रकाश ठाकुर ने किया,चिन्मय श्रीवास्तव ने आभार माना, निर्देशन संकल्प ने किया।

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