कविता
चीन की उमंग देख दंग जग संग में। कोरोना की जंग देख पूरा जग संग में।। शत्रु अदृश्य है लड़ रहे जंग हैं। मन में उमंग है कोरोना भी दंग है।। शंखनाद सिटी से करतल थाली से। कोरोना बीमारी से रण है महामारी से।। 6 तारीख को शंखनाद दीप ज्वलंत थे। जमाती भारतवक्ष पर सबसे बड़े कलंक थे।। कलंकी कलंक लिए भारत को कलंकी दिए। दिल्ली में कोरोना लिए भारत को कलंकित किए।। दिल्ली में मौलाना साद मस्जिद मरघटों के काज। जमाती बाँटते कोरोना दाग इनके बैकपुट पै लगाओ आग।। भारतीय कोरोना से जंग करते मस्जिद में कोरोना श्वान साद पलते। भारतीयता का दम्भ भरते भारत को कलंकित करते।। देशविद्रोही मौलाना को चौराहे पर टांग दो। सीस में छिद्र कर सूप पाक भेज दो।। ये नही कहता मैं सभी मुस्लिम दागदार। ये भी कह देता हूँ मैं ऐसे भी हैं वफादार।। भारत जिन पर गर्व करता गर्व का गुमान करता। शान से अभिमान करता सभी का कल्याण करता।। चीन है संवेदनहीन व्याकुल हुई सब मानव मीन। अब भी न सुधरा चीन विश्व होगा मानवहीन।। जीवन हुआ अस्त व्यस्त चीन फिर भी है मस्त। पूरा विश्व त्रासदी से त्रस्त चीनी मस्ती में मस्त।। सत्य नारायण स्वरचित कविता
चीन की उमंग देख दंग जग संग में। कोरोना की जंग देख पूरा जग संग में।। शत्रु अदृश्य है लड़ रहे जंग हैं। मन में उमंग है कोरोना भी दंग है।। शंखनाद सिटी से करतल थाली से। कोरोना बीमारी से रण है महामारी से।। 6 तारीख को शंखनाद दीप ज्वलंत थे। जमाती भारतवक्ष पर सबसे बड़े कलंक थे।। कलंकी कलंक लिए भारत को कलंकी दिए। दिल्ली में कोरोना लिए भारत को कलंकित किए।। दिल्ली में मौलाना साद मस्जिद मरघटों के काज। जमाती बाँटते कोरोना दाग इनके बैकपुट पै लगाओ आग।। भारतीय कोरोना से जंग करते मस्जिद में कोरोना श्वान साद पलते। भारतीयता का दम्भ भरते भारत को कलंकित करते।। देशविद्रोही मौलाना को चौराहे पर टांग दो। सीस में छिद्र कर सूप पाक भेज दो।। ये नही कहता मैं सभी मुस्लिम दागदार। ये भी कह देता हूँ मैं ऐसे भी हैं वफादार।। भारत जिन पर गर्व करता गर्व का गुमान करता। शान से अभिमान करता सभी का कल्याण करता।। चीन है संवेदनहीन व्याकुल हुई सब मानव मीन। अब भी न सुधरा चीन विश्व होगा मानवहीन।। जीवन हुआ अस्त व्यस्त चीन फिर भी है मस्त। पूरा विश्व त्रासदी से त्रस्त चीनी मस्ती में मस्त।। सत्य नारायण स्वरचित कविता

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