" खुश रहने का राज"
ये बात उन दिनों की है जब मेरे पति का तबादला इंदौर से जबलपुर हो गया था,यहां में बेहद संजे सवरे अपने घर से किराए के मकान में शिफ्ट हो गई थी क्योंकि सरकारी आवास मिलने में थोड़ा समय लगने वाला था,एक तो नई जगह और मन के मुताबिक मकान (वहां के लोग उसको बंगला कहते थे) न मिलने के कारण में तनाव में रहती थी,वैसे भी मै परिवर्तन को आसानी से अपना नहीं पाती हूं,ये मेरी बहुत खराब बात है,
तभी मैंने घर का काम करने के लिए एक बाई को रखा ,वो बहुत खुश मिजाज थी, मै सोचती थी घर में इसके सब ठीक ठाक होगा ये कुछ अन्य आमदनी हो जाए इसीलिए काम करती होगी,वो मेरे से अक्सर पुरानी पत्रिका और समाचार पत्र के जाया करती थी,
एक दिन उत्सुकता वश मैंने उससे पूछा तुम्हारे पति क्या करते हैं तो उसने बताया की वो ५-६ साल से लकवा ग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर हैं , में आपके घर आने से पहले उनको नाश्ता,दवा और मालिश कर के आती हूं,मेरे दो छोटे बच्चे हैं जो सरकारी स्कूल में जाते हैं, पुरानी पत्रिका में अपने पति के लिए ही लेकर जाती हूं ताकि उनका दिल लगा रहे,
ये सब सुनकर मेरे को दुःख और आश्चर्य हुआ फिर तुम इतना खुश कैसे रह लेती हो भला?? तब वह बोली मैडम ये जीवन भी एक बोझ की तरह होता है,जब भी और जितना भी हम परेशानी वाली बातों को याद करते रहगें तो दुःख का बोझ उतना ज्यादा भारी होता जाता है, और हम जीवन से बहुत ज्यादा उम्मीद बांध लेते हैं जब वो पूरी नहीं हो पाती हैं तो हम दुखी हो जाते हैं ,मैने जीवन से ज्यादा उम्मीदें नहीं बांधी है जो भगवान् करेंगे वो अच्छा ही होगा,
यही मेरे खुश रहने का कारण है ... मै मौन हो गई थी उसकी बातें सुनकर ,उसने सच ही तो कहा था.
Thursday, April 9, 2020
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Superb di, very motivational story 👌👌
ReplyDeleteMast👌👌poonam
ReplyDeleteप्रेरक कहानी
ReplyDeleteजिंदगी की सच्चाई को जल्दी समझ जाने में ही समझदारी है खुश रहो का आशीर्वाद हमें ऐसे ही नहीं मिला है उसकी कीमत को पहचानिए और हमेशा खुश रहिए। बहुत सुंदर कहानी।
ReplyDeleteशाश्वत सत्य। बधाई पूनम जी।
ReplyDeleteएक संवेदनशील प्राणी ही दूसरों की समस्या को समझ पाता है। आपकी संवेदनशीलता को देख कर अच्छा लगा।
हार्दिक शुभकामनाएं।