Friday, April 10, 2020

बचपन जीने का नाम है बेटी

डा  शारदा गुप्ता

“ बचपन जीने का नाम है बेटी “ 

 कितनी रातें जागी थी मैं तुझे सुलाने में कितने सपने बुने थे मैंने लोरियाँ गाने में वो तेरा 

मुँह में अँगूठा लेना और आँचल को मेरे पकड़ कर खिंचना सोई ममता जगाती है बेटी ।

बचपन जीने का ——- वो तेरा आँगन में कूदना फाँदना दो चोटी बाँध कर स्कूल जाना अल्हड़ पण से मेरे गले बाँहें 

डालना और शिकायतों के पुलिंदे से मेरी झोली भरना सोए अरमा जगाती है बेटी। 

बचपन—— यौवन को दहलीज़ पर खड़ा देख अपनों से आँखे चुराना तेरा सखियों को हमराज़ बनाना तेरा और छोटी 


बहन को आँखे दिखाना तेरा मन के सागर को आंदोलित करती है बेटी। बचपन जीने ———

*डा  शारदा गुप्ता

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