गरीब का दिल
कमला बहुत ही गरीब थी |
वह तथा उसका पति मजदूरी करते थे |
घर बनाने का काम करते थे |
ईंट, गारा उठा उठा कर सुबह से शाम हो जाती थी |
घर में चार बच्चे इंतजार करते रहते थे |
आज वे दोनों किसी के घर मजदूरी करने आए, देखा कि उस घर में मां नहीं है |
बहुत ही प्रेम से पूछा, तुम्हारी मां कहां है? बच्चों ने कहा -वो अब इस दुनिया में नहीं है |
यह सुनकर कमला बहुत ही दुखी हो गई |
और कहा -बेटा मैं खाना बना दूं कया? तुम सब भूखे होगे |
यह सुनकर उन बच्चों को अपनी मां याद आ गई |
बात खाना बनाने की नहींं पर उस औरत के प्रेम पूर्ण दुलार की थी |
यह बात आज भी प्रासंगिक है |फटे कपडे. ,बिखरे बाल, कल का पता नहीं |परंतु दिल ममता से भरा | प्रेम के दो बोल जादू कर सकते हैं |यह उस महिला ने सिखा दिया | एैसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को सीतल करे आपहू सीतल होय |
द्वारा -आराधना विसावाडिया इंदौर |
वह तथा उसका पति मजदूरी करते थे |
घर बनाने का काम करते थे |
ईंट, गारा उठा उठा कर सुबह से शाम हो जाती थी |
घर में चार बच्चे इंतजार करते रहते थे |
आज वे दोनों किसी के घर मजदूरी करने आए, देखा कि उस घर में मां नहीं है |
बहुत ही प्रेम से पूछा, तुम्हारी मां कहां है? बच्चों ने कहा -वो अब इस दुनिया में नहीं है |
यह सुनकर कमला बहुत ही दुखी हो गई |
और कहा -बेटा मैं खाना बना दूं कया? तुम सब भूखे होगे |
यह सुनकर उन बच्चों को अपनी मां याद आ गई |
बात खाना बनाने की नहींं पर उस औरत के प्रेम पूर्ण दुलार की थी |
यह बात आज भी प्रासंगिक है |फटे कपडे. ,बिखरे बाल, कल का पता नहीं |परंतु दिल ममता से भरा | प्रेम के दो बोल जादू कर सकते हैं |यह उस महिला ने सिखा दिया | एैसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को सीतल करे आपहू सीतल होय |
द्वारा -आराधना विसावाडिया इंदौर |

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