Friday, April 10, 2020

नारी जीवन। सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक, उनको उबारो यह जी चाहता है । करते रहे आदिशक्ति की पूजा मगर मातृशक्ति कुण्ढित रही है। हुआ मान जिनका नहीं भूलकर भी, वही आज व्याकुल विवश हो रही है । तड़फती तिरस्कृत है आज ममता, उसे अपनाने को जी चाहता है । दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता सावित्री मीरा अनसुईया गार्गी मैयत्री सारंगा पन्ना न जाने कोन सी हैऐसी ललना, करें संरक्षण दें उच्च शिक्षा दिलाने प्रतिष्ठा को जी चाहता है । पाया जन्म जिसनें शैशव मे खेले, भूल अहसास उसका ये क्या कर रहे हो ? पलती हुई गर्भ मे है जो मातृ शक्ति, शिक्षित कृतघ्न बन क्यों वध कर रहे हो ? लुप्त हो जायगी मानव जाति इससे, यह एहसास कराने को , जी चाहता है सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक उनको उबारो ये जी चाहता है । .... 🙏🏻

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...