नारी जीवन।
सहे जुल्म जिसने सदियों
से अब तक,
उनको उबारो यह जी चाहता है ।
करते रहे आदिशक्ति की पूजा
मगर मातृशक्ति कुण्ढित रही है।
हुआ मान जिनका नहीं भूलकर भी,
वही आज व्याकुल विवश
हो रही है ।
तड़फती तिरस्कृत है आज ममता,
उसे अपनाने को जी चाहता
है ।
दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता
सावित्री मीरा अनसुईया
गार्गी मैयत्री सारंगा पन्ना
न जाने कोन सी हैऐसी ललना,
करें संरक्षण दें उच्च शिक्षा
दिलाने प्रतिष्ठा को जी चाहता है ।
पाया जन्म जिसनें शैशव
मे खेले,
भूल अहसास उसका ये
क्या कर रहे हो ?
पलती हुई गर्भ मे है
जो मातृ शक्ति,
शिक्षित कृतघ्न बन क्यों
वध कर रहे हो ?
लुप्त हो जायगी मानव जाति
इससे,
यह एहसास कराने को ,
जी चाहता है
सहे जुल्म जिसने सदियों से
अब तक उनको उबारो ये
जी चाहता है ।
.... 🙏🏻

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