Friday, April 10, 2020

फागुन की चौपाल होली उत्सव प्रीत का , यह रंगों का बाजार , निशदिन फागुन प्रीत , के नये पढ़ाये पाठ । अखियों ही अखियों , हुऐं रंगों के संकेत , रह रह कर महके रात भर कस्तूरी के खेत । प्रीत महावर की तरह , इसके न्यारे है रंग , बतियाती पायल हँसे , हँसे ऐड़ियाँ संग । रंगों वाले आईने , भूलें सभी गुमान , जो भीगें वो जानता , फागुन की मुस्कान । दोहे ठुमरी सखियां , फाग अभंग ख्याल , मोसम करता रतजगा , फागुन की चौपाल । मनोरमा जोशी 118/बीएच विजयनगर ।🙏🏻

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